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Flood : गंगा व कोसी का जलस्‍तर बढ़ा, शेष नदियां स्थिर, बांध पर खतरा

भागलपुर, जेएनएन। पूर्व बिहार, कोसी और सीमांचल में अधिकांश नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। पूर्व बिहार के भागलपुर और जमुई में बारिश हई है। इस दौरान वज्रपात से मधेपुरा में दो और कटिहार में चार लोगों की मौत हुई है। खगडिय़ा में कोसी और बागमती खतरे के निशान से ऊपर हैं, लेकिन इनके जलस्तर में कमी आ रही है। 

मुंगेर में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गुरुवार को यहां गंगा का जलस्तर 35.080 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मुंगेर में गंगा हर तीन घंटे पर एक सेमी बढ़ रही है। खगडिय़ा में बूढ़ी गंडक और गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन दोनों खतरे के निशान से नीचे हैं। सुपौल में कोसी नदी का जलस्तर निचले सतह पर आ जाने से मात्र एक बिंदू पर नेपाल प्रभाग में आंशिक दबाव बना है। भारतीय प्रभाग में कहीं दबाव नहीं है। मुख्य अभियंता वीरपुर के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नदी के जलस्राव में हो रही भारी गिरावट से भारतीय प्रभाग वाले पश्चिमी तटबंध के विभिन्न बिंदुओं को दबाव मुक्त कर लिया गया। नेपाल प्रभाग के पूर्वी बाहोत्थान बांध के 26.88 किमी स्पर के डीएप्रोन भाग पर नदी दबाव बनाए हुए है। नदी का जलस्राव दिन के दो बजे बराहक्षेत्र में 78,800 क्यूसेक एवं कोसी बराज पर 1,11,630 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। मधेपुरा में कोसी व उपधार के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।

वज्रपात से कुमारखंड व मधेपुरा में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। अररिया जिले से होकर बहने वाली सभी नदियों के जलस्तर में कमी हो रही है। इस कारण कटाव जारी है। किशनगंज में बुधवार रात को भारी बारिश होने के बाद गुरुवार को बूंदाबांदी होती रही। महानंदा, मेंची, कनकई, बूढ़ी कनकई, रेतुआ आदि नदियों का जलस्तर यहां घट रहा है। जगह-जगह सड़कें ध्वस्त होने से आवागमन ठप है। कटिहार में महानंदा नदी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। यह खतरे के निशान से दो से आठ सेमी तक नीचे है। गंगा, कोसी आदि नदियों का जलस्तर पिछले 24 घंटे से स्थिर है। हालांकि जलस्‍तर खतरे के निशान से ज्‍यादा है। कई गावों में पानी का फैलाव हो रहा है। दिन में बारिश हुई है। वज्रपात से कोढ़ा प्रखंड के विनोदपुर में एक पुरुष व दो महिलाओं के अलावा हसनगंज में एक महिला की मौत हुई है। पूर्णिया में भी नदियों का जलस्तर घटा है। महानंदा, परमान और कनकई खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।

 

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