IGNOU exam: 22 से 25 सितंबर तक पूर्णिया के सेंटर पर होगी परीक्षा, कोसी और सीमांचल के इन जिलों के छात्रों का है सेंटर

22 सितंबर से इग्‍नू के पूर्णिया सेंटर पर परीक्षा शुरू हो जाएगाी। तीन दिनों तक यह परीक्षा चलेगी। इसमें कोसी और सीमांचल के कई जिलों के छात्र भाग लेंगे। परीक्षा को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।

Abhishek KumarFri, 17 Sep 2021 03:19 PM (IST)
22 सितंबर से इग्‍नू के पूर्णिया सेंटर पर परीक्षा शुरू हो जाएगाी।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की जून 2021 की सत्रांत प्रायोगिक परीक्षा 22 से 25 सितंबर तक ली जाएगी। स्नातक विज्ञान की वनस्पति, जीव विज्ञान (एलएसई चार एल, एलएसई आठ एल, एलएसई 11 एल एवं एलएसई 14 एल), भौतिकी (वीपीएचएल 103, पीएचई आठ एल, पीएचई 12 एल) एवं रसायन विज्ञान (सीएचई तीन एल, सीएचई सात एल, सीएचई आठ एल, सीएचई 11 एल, सीएचई 12 एल, एईसी एक एल) की प्रायोगिक परीक्षा 22 सितंबर से 24 सितंबर तक ली जाएगी। इसके अलावा प्रयोगशाला तकनीक (सीपीएलटी) 101, 102, 103, 104 की प्रायोगिक परीक्षा 25 सितंबर को ली जाएगी।

इग्नू अध्ययन केंद्र, पूर्णियां के समन्वयक प्रो. गौरी कांत झा ने बताया कि क्षेत्रीय केंद्र सहरसा अन्तर्गत आने वाले सहरसा, कटिहार एवं पूर्णिया के अध्ययन केंद्रों में स्नातक विज्ञान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की विज्ञान प्रायोगिक परीक्षा पूर्णिया कालेज परीक्षा केंद्र पर ली जाएगी । इस परीक्षा में सहरसा, कटिहार एवं पूर्णिया शिक्षार्थी सहायता केंद्र के कुल 534 परीक्षार्थी सम्मिलित होंगे। प्रायोगिक परीक्षा में सम्मिलित होने की पात्रता मात्र उन्हीं शिक्षार्थियों को है, जो स्नातक विज्ञान में जुलाई, 2018 या उससे पूर्व नामांकित हों अथवा सत्रांत परीक्षा जून 2021 में सम्मिलित होने की पात्रता रखते हो। इसके अलावा मार्च, 2021 में आयोजित प्रायोगिक परीक्षा में असफल रहे हों । प्रो. झा ने बताया कि जुलाई, 2018 से पूर्व नामांकित किसी परीक्षार्थी की परीक्षा छूट गई हो अथवा कोई अन्य कारण हो तो वैसे परीक्षार्थी भी क्षेत्रीय निदेशक से विधिवत अनुमति लेकर प्रायोगिक परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं ।

उच्च स्तरीय कमेटी की जांच के बाद सवाल उठाना गलत

्रपूर्णिया विश्वविद्यालय में तीन वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को लेकर कुछ लोगों द्वारा सवाल उठाए जाने को छात्र नेता सौरभ कुमार ने अनुचित करार दिया है। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों के विरोध में दिया गया आवेदन तथ्यहीन है। अतिथि शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कई बार उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर किया जा चुका है। गत तीन वर्षों से अतिथि शिक्षकों से कार्य भी लिया जा रहा है। ऐसे में केवल राजनीति चमकाने के लिए तथ्यहीन आरोप लगाए जा रहे हैं और इससे विश्वविद्यालय की अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में जरुरत है कि ऐसे मसलों का ठोस समाधान एक बार कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों द्वारा कोरोना काल में भी आनलाइन वर्ग का संचालन किया जाता रहा था। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के जरिए भी छात्र-छात्राओं को लाभान्वित कराने का प्रयास किया जाता रहा है।

 

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