जेएलएनएमसीएच में आइसीयू किया गया अपडेट, बच्चों के लिए बनाए जा रहे कोविड सेंटर

भागलपुर में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए जेएलएनएमसीएच के आइसीयू को अपडेट कर दिया गया है। साथ ही बच्‍चों के लिए स्‍पेशल कोविड वार्ड बनाया जा रहा है। इससे किसी...!

Abhishek KumarMon, 02 Aug 2021 11:06 AM (IST)
भागलपुर में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग तैयारी कर रहा हो, लेकिन पहली लहर आने पर डाक्टर भी हैरत में थे। उन्हें कोरोना संक्रमण के बारे में गहराई से जानकारी नहीं थी। पहली लहर से ज्यादा ताकतवर दूसरी लहर थी। दूसरी लहर में वायरस और भी आक्रामक था। इसलिए मरीजों को इलाज करने का मौका भी नहीं मिलता था। चार दिनों के अंदर ही मौत हो जा रही थी।

दूसरी लहर में मरीजों की जान बचाने में स्वास्थ्य विभाग की तैयारी लगभग नहीं के बराबर थी। चिकित्सीय उपकरणों के अभाव के साथ ही जांच की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं थी। इन दो लहरों में स्वास्थ्य विभाग को जो सीख मिली उससे अब संभावित तीसरी लहर से मरीजों को बचाने के लिए इलाज के मामले में सुधार किया जा रहा है।

- मायागंज अस्पताल, सदर अस्पताल, कहलगांव और नवगछिया में आक्सीजन प्लांट का हो रहा निर्माण

- कोरोना की पहली लहर में जांच की व्यवस्था नहीं थी

- समय पर नहीं आ रही थी रिपोर्ट, चिकित्सकों को भी नहीं थी कोरोना के बारे में विशेष जानकारी

- कोरोना मरीजों के लिए अलग बेड और चिकित्सीय उपकरणों का था अभाव

- दूसरी लहर में मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती होते थे, लोगों में जागरुकता की कमी थी

- डाक्टर समेत अस्पताल के कर्मचारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

वेंटीलेटर रहते हुए भी उसे संचालित करने वाला कोई नहीं था

कोरोना की पहली लहर में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के अधीक्षक डा. आरसी मंडल अधीक्षक थे। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की जानकारी डाक्टरों को भी नहीं थी। राज्य में सरकारी स्तर पर जांच की सुविधा भी नहीं थी। जब जांच प्रारंभ हुई तो केवल मेडिकल कालेज में सुविधा दी गई। रिपोर्ट कई दिनों तक नहीं मिलने से मरीज का इलाज भी समुचित ढंग से नहीं हो रहा था। वैक्सीन भी नहीं थी, लेकिन कोरोना वायरस के लक्षण पांच-छह दिन बाद आते थे। वेंटीलेटर रहते हुए भी उसे संचालित करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा कि डाक्टर समेत अस्पताल के कर्मचारियों को चिकित्सकीय उपकरण संचालित करने के अलावा इलाज के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक है, ताकि समय पर मरीज को आक्सीजन और दवा दी जा सके।

इलाज हो रहा था विलंब, जांच भी नहीं हो रही थी

अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डा. अशोक भगत कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल की व्यवस्था देख रहे थे। उन्होंने कहा कि मरीज को कैसे मैनेज करना है इसकी जानकारी भी नहीं थी। इलाज करने में विलंब हो जाता था। जांच नहीं हो रही थी। इमरजेंसी में मरीजों को भर्ती करने के बाद उसे शीघ्र ही आइसीयू में रेफर किया जाता था। मरीज के स्वजन भी मरीज के पास जाने के लिए व्याकुल रहते थे। अब मरीज को संक्रमित मानकर इलाज करना आवश्यक है।

दूसरी लहर में नहीं मिल पा रहा था इलाज का मौका

वर्तमान अस्पताल अधीक्षक डा. असीम कुमार दास ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर भयानक थी। पहली लहर में मरीजों में लक्षण चार-पांच दिनों के बाद आते थे। दूसरी लहर में मरीज के इलाज का मौका ही नहीं मिलता था। कई मरीजों की मौत तो अस्पताल में भर्ती होने के कुछ घंटे बाद ही हो गई। लक्षण भी नहीं मिलते, जबकि फेफड़ा संक्रमित होकर बेकार हो जाता था। 10-15 दिनों के बाद सीटी स्कैन में फेफड़ों में खराबी की जानकारी मिलती थी। कोई भी दवा सटीक नहीं थी। आक्सीजन मरीज की संख्या इतनी बढ़ गई कि आक्सीजन भी कम पडऩे लगा।

कोरोना की दूसरी लहर इतनी भयावह होगी किसी को अनुमान नहीं था। कम समय में ज्यादा कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। अब तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आक्सीजन प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य केंद्रों में कोविड मरीजों के लिए बेड रिजर्व किए गए हैं।

डा उमेश शर्मा सिविल सर्जन

अस्पताल में ये हो रही तैयारी

डाक्टर और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आइसीयू को अपडेट किया गया है। वेंटीलेटर और अन्य चिकित्सकीय उपकरण की आपूर्ति की जा रही है। बच्चों के लिए कोविड सेंटर बनाए जा रहे हैं। मायागंज अस्पताल, सदर अस्पताल, कहलगांव और नवगछिया में आक्सीजन प्लांट निर्माण किए जा रहे हैं। डाक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। वैक्सीनेशन किया जा रहा है। कोरोना जांच में तेजी आई है। शारीरिक दूरी और मास्क लगाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।  

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