हमारा शहर भागलपुर कैसे बनेगा इंदौर, शौचालय तो दूर की बात, यहां तो सोच में ही लटका है ताला!

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 की जारी रैंकिंग के मुताबिक हमारा भागलपुर शहर पिछड़ चुका है। अब हमारी मुहिम है कि हमें मिलकर शहर को इंदौर की तरह स्वच्छ साफ और सुंदर बनाना है। जागरण के साथ मिलकर इसे सफल बनाएं। हमने ग्राउंड रिपोर्टिंग में तस्दीक की कि जनजागरूकता में...

Shivam BajpaiThu, 25 Nov 2021 12:31 PM (IST)
हमने है ठाना-स्वच्छ साफ और सुंदर भागलपुर है बनाना।

जागरण संवाददाता, भागलपुर : स्वच्छता रैंकिंग का शौचालय की साफ-सफाई का विशेष महत्व है लेकिन, नगर निगम ने शौचालय निर्माण पर लाखों रुपये खर्च कर दिया। शौचालय की स्थिति नारकीय है। शौचालय बने हैं तो उनका प्रयोग हो रहा है। कागजों पर खुले में शौच मुक्त हुआ शहर जमीन पर ओडीएफ प्लस के मानक पूरे करने से दो कदम पीछे है। जिसका ताला तक नहीं खुला। हमारा शहर भागलपुर कैसे इंदौर बनेगा, क्योंकि यहां तो सोच पर ही ताला लगा है। लोग अभी भी खुले में शौच के लिए विवश है। कागजी कार्रवाई में निगम व्यस्त है।

14 हाईटेक व 17 दो मंजिला शौचालय

शहरी क्षेत्र में ऐसा नहीं की शौचालय की कमी है। छह वर्ष पहले छह से नौ लाख रुपये प्रति हाईटेक शौचालय निर्माण पर खर्च हुआ। इसमें से अधिकांश का ताला भी नहीं खुला और संसाधन जर्जर हो गए। अब 17 स्थानों पर दो मंजिला शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन, दो वर्ष में 12 का निर्माण पूरा हुआ। जिसका निर्माण पूरा हुआ पर चालू नहीं कराया गया।

लोगों की आदत में नहीं हुआ बदलाव

शहर के तिलकामांझी चौक पर निगम ने बायो टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया है। यहां पानी से लेकर एक कर्मी को प्रतिनियुक्त किया। जागरूकता के लिए स्वच्छता संदेश के बैनर लगाए गए। लोग चौराहे पर शौचालय का उपयोग नहीं कर खुले में शौच कर रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जनता को अपनी भागीदारी भी तय करना होगा। आदत में बदलाव नहीं आया तो रैंकिंग में असर पड़ेगा।

स्लम बस्तियों की सबसे दयनीय स्थिति

शहर ओडीएफ तो घोषित कर दिए गए, लेकिन गंगा के तटवर्ती क्षेत्र व स्लम बस्तियों के लोग वर्तमान दौर में भी खुले में शौच को विवश है। इसमें नाथनगर के लालूचक, भीखनपुर, साहेबगंज, मोहनपुर, मुसहरी घाट, भीखनपुर, सकुल्लाहचक, वारसलीगंज हुसैनाबाद आदि मोहल्ले शामिल है। इसके लिए प्रशासन को जागरूक करना था। खुले में शौच करने वालों पर जुर्माना का भी प्रावधान है। सरकार के आदेशों पर महज खानापूरी हुई। न जनजागरूकता अभियान चला और न ही का जुर्माना लगा।

शौचालय निर्माण पर लाखों खर्च, उपयोग में फिसड्डी अभियान : मेरा शहर इंदौर जैसा क्यों नहीं शौचालय परिसर में पसरी गंदगी, कहीं ताला बंद तो कहीं निर्माण कार्य अधूरा शहरवासियों को खुले में शौच की आदत में लाना होगा बदलाव, तभी स्वच्छ बनेगा शहर

केयर टेकर नहीं होने से लगे ताले

सार्वजनिक स्थानों पर भी शौचालय की स्थिति भी बदतर है। दीवारें या सड़क के फ्लैंक गंदे हो रहे हैं। शौचालय के रखरखाव को केयर टेकर नहीं है। देखभाल के बिना सामुदायिक शौचालय टूटे हैं तो कहीं केयर टेकर नहीं होने से ताले लगे हैं। खंजरपुर, मायांगज, नाथनगर आउट पोस्ट लेन का शौचालय बंद पड़ा है। दीपनगर चौक का शौचालय क्षतिग्रस्त हो चुका है। सैंडिस कंपाउंड परिसर के शौचालय का दरवाजा ही टूटा हुआ है। सदर अस्पताल के पास व मारवाड़ी पाठशाला के समीप सामुदायिक शौचालयों में गंदगी का अंबार है। दीवारों पर स्वच्छता का संदेश तक नहीं है। यहां फूलों के गमले, सेनेटरी वेंडिग मशीन, इंसीनरेटर, हैंडवाश के लिए साबुन, तौलिया और शीशे नहीं रखे गए हैं।

सीवर लाइन से अछूता है शहर

महानगरों की तर्ज पर भागलपुर में सीवर लाइन की कोई कार्ययोजना नहीं बनी। शहर की वर्तमान में करीब छह लाख से अधिक आबादी है। वहीं निगम से निबंधित घरों की संख्या करीब 76 हजार है। इतनी बड़ी आबादी वाले शहर में सीवर लाइन की सुविधा नहीं होना व्यवस्था को आइना दिखा रहा है। बेशक घर-घर में शौचालय है, लेकिन काफी शौचालयों का मलबा पाइपों के जरिए नालों में गिरने से दमघोटू सड़ांध से लोगों का जीना हराम हो गया है। नालों के माध्यम से शौचालय का पानी नाले से होकर गंगा में प्रवाहित हो रहा है। सीवर लाइन को तरस रहे भागलपुर के लिए ओडीएफ प्लस और ओडीएफ डबल प्लस सर्टिफिकेट दूर है।

मलबा निस्तारण को प्लांट नहीं

शहरी क्षेत्र में मल टंकी की सफाई के लिए टैंकर है। लेकिन, इसके मलबे के निस्तारण को फीकल सल्ज ट्रीटमेंट प्लांट नगर निगम के पास नहीं है। काफी शौचालयों का मलबा पाइपों से नालों में गिरता है। मल टंकी की सफाई कर खुले स्थानों में बहाया जाता है। सड़क किनारे व बड़े नालों में प्रवाहित की जाती है। जबकि मानक के अनुरूप मलबा का निस्तारण करना है। इससे खाद भी तैयार कर उपयोग में लाया जा सकता है। फीकल सल्ज ट्रीटमेंट प्लान नहीं होने से सेप्टिक टैंक के मलबा निस्तारण ढंग से नहीं होता है।

व्यक्तिगत शौचालयों का हाल

शहर में 10 प्रतिशत में पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। 15 प्रतिशत में दरवाजे-कुंडी और 20 प्रतिशत में लाइट की व्यवस्था नहीं है। पंद्रह प्रतिशत शौचालयों इतने गंदे हैं कि कोई व्यक्ति उनका इस्तेमाल करना तो दूर, मारे बदबू के उनके पास से गुजरना नहीं चाहेगा।

मैं भी स्वच्छता प्रहरी:  स्वच्छ शहर का सपना करेंगे साकार

'स्वच्छ शहर की दिशा में निगम प्रशासन की भूमिका अहम है। अगर जनता को सुविधा मिले को सुधार होगा। कूड़ेदान के उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। साथ-साथ आसपास के लोगों को स्वच्छता का संदेश देंगे। शहर को स्वच्छ बनाने में सहयोग देने का संकल्प लेते हुए कहा कि वह लोगों को खुले में कूड़ा नहीं डालने, घरों पर गीला व सूखा कूड़ा अलग कर डस्टबिन में डालने को प्रेरित करेंगे। शौचालय इस्तेमाल करने के लिए लोगों को जागरूक करेंगे।'- संजय कुमार, समाजसेवी

स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले दुरूस्त होगा शौचालय

शहरी क्षेत्र में शौचालय की बदतर व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू हो गई। नगर आयुक्त ने स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान को लेकर विभिन्न स्थलों में सामुदायिक शौचालय में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके लिए निगम केे अभियंता को शौचालय की वर्तमान स्थिति का आंकलन करना है। इसके साथ एक सप्ताह में जीर्णोद्धार कार्य के लिए प्राक्कलन तैयार करने का टास्क दिया है। जिला स्कूल मार्ग के अधूरे निर्माण वाले शौचालय को चालू कराया जाएगा। वहीं सदर अस्पताल, बरारी पुल घाट, बूढ़ानाथ मंदिर के निकट, बड़ी खंजरपुर में सामुदायिक शौचालय को आधुनिक मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि जनहित में आमलोगों को इसका लाभ मिल सके। मूलभूत सुविधा के तहत हाथ धोने के लिए बेसिन, पानी, टाइल्स, जलनिकासी व रंगाई होगी।

'सामुदायिक शौचालयों पर केयर टेकर रखा जाएगा। इसके निगम क्षेत्र के सभी शौचालय को पीपीसी मोड पर दिया जाना है। इससे देखभाल की समस्या दूर होगी। जर्जर शौचालय का जीर्णोद्धार होगा। लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं स्मार्ट सिटी से करीब 2.6 करोड़ रुपए ई-टायलेट पर खर्च होगा। शहर में 25 शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा। कंपनी को शौचालय निर्माण के बाद पांच साल तक रखरखाव करने की भी जिम्मेदारी दी जाएगी। इसकी सभी तैयारी की जा रही है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।' - प्रफुल्ल चंद्र यादव, नगर आयुक्त

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