स्थानीय लोगों को भोजन कराकर भुगतान लिया

भागलपुर। सर्दी और गर्मी के दिनों में आगंतुकों के लिए ठहरने के लिए शहर में बनाए गए रैन बसे

JagranTue, 26 Oct 2021 01:50 AM (IST)
स्थानीय लोगों को भोजन कराकर भुगतान लिया

भागलपुर। सर्दी और गर्मी के दिनों में आगंतुकों के लिए ठहरने के लिए शहर में बनाए गए रैन बसेरों में स्थानीय लोगों को भोजन कराकर भुगतान लिया जा रहा था। इतना ही नहीं केयरटेकर के रूप में कालेज में पढ़ने वाले छात्र को रखा गया था। आठ जिलों की सोशल सर्वे टीम ने रैन बसेरों के संचालन में काफी अनियमितता पाई है। अब नगर विकास विभाग को टीम करेगी रिपोर्ट। ऐसे में दोषी लोगों पर गाज गिर सकती है।

सर्वे के दौरान अनियमितता की सभी हदें पार करने वाली बातें सामने आई। पता चला कि दिन में ही स्थानीय महिला को भोजन कराकर पिछले कई वर्ष से निगम से भुगतान लिया जा रहा था। केयरटेकर के रूप में कालेज में अध्ययनरत छात्र को रखा गया है, जबकि नियम के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिला अपने स्वजनों को नहीं रख सकती है। नियम को ताक पर रखकर महिला को रखा गया। उसे आठ हजार रुपये की बजाय दो हजार रुपये मानदेय का भुगतान किया जा रहा था।

शहरी क्षेत्र में राहगीरों को रात्रि विश्राम के लिए नगर निगम की ओर से छह रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, लेकिन यहां विभाग के गाइडलाइन को ताक पर रखकर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। पिछले 21 से 25 अक्टूबर तक आठ सदस्यीय टीम ने रैन बसेरों का सोशल आडिट किया। सोमवार को अंतिम दिन नाथनगर में रैन बसेरा परिसर में टीम ने जनसुनवाई के दौरान खामियां गिनाई। इस अवसर पर सुधार के लिए सुझाव भी दिए। सर्वे टीम अब नगर विकास एवं आवास विभाग को रिपोर्ट करेंगी। इसके आधार पर विभाग द्वारा कार्रवाई भी तय होगी।

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सर्वे रिपोर्ट में कई कमियां हुई उजागर

नाथनगर रैन बेसरा में राज्य स्तरीय टीम ने जनसुनवाई में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें जूरी सदस्य के रूप में निगम के नामांतरण शाखा प्रभारी शब्बीर अहमद, वार्ड वार्ड व एक स्थानीय महिला सदस्य को शामिल किया गया था। टीम ने बताया कि सर्वे शुरू करने के बाद सीसीटीवी कैमरे, शिकायत पेटी व फस्ट एड बाक्स लगाया गया, जबकि यह सुविधा पहले नहीं थी। रैन बसेरा का संचालन स्वयं सहायता समूह की एएलओ कर रही थी। उन्हें रैन बसेरा के गाइडलाइन की जानकारी तक नहीं है। रजिस्टर के संधारण की जानकारी नहीं है। यहां शौचालय तो है पर पानी दूर से लाना पड़ रहा है। नल की सुविधा तक नहीं है। स्नानागार की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। रात में टीम ने रेलवे स्टेशन से एक व्यक्ति को रैन बसेरा लाया तो ताला बंद मिला। रात्रि में यहां कोई नहीं रहता है। यहां ठहरने वाले लोगों को सामान रखने के लिए अलमीरा नहीं है। रोशनी का भी घोर अभाव है।

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संवेदक ने नहीं हटाई निर्माण सामग्री

रैन बसेरा के ग्राउंड तल के निर्माण के एक वर्ष बाद भी संवेदक ने निगम को इसे हैंडओवर नहीं किया। कमरे में निर्माण सामग्री रखी हुई है। उसे हटाने का गत वर्ष तत्कालीन नगर आयुक्त जे. प्रियदर्शनी ने भी निर्देश दिया था, लेकिन अनुपालन नहीं हुआ। इससे 15 लोगों की क्षमता वाले रैन बसेरा में नौ लोगों के विश्राम की व्यवस्था है।

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सेवा बहाल करने का दिया सुझाव

टीम में सुझाव में कहा कि चौक-चौराहों पर रैन बसेरा का प्रचार-प्रसार कराया जाए। एएलओ को रजिस्टर संधारण का प्रशिक्षण दिया गया। सर्दी शुरू होने से पहले रैन बसेरा के ग्राउंड तल में सेवा बहाल होगी। गर्मी में ठंडा पानी और सर्दी में गर्म पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

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टीम मे यह थे शामिल

सर्वे टीम में मुंगेर के मुकेश कुमार, बांका से फातिमा बेगम, किशनगंज से अब्दुल, सहरसा से सदानंद यादव, मधेपुरा से चंदन कुमार, सत्यम कुमार व चंदन कुमार के साथ भागलपुर से इंतखाब शामिल थे। वहीं,डेएनयूएलएम के सिटी समन्वयक अमरेंद्र कुमार व मृत्युंजय सिन्हा आदि मौजूद थे।

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