ज्‍वेलरी की खरीदारी करनी हो तो... देख लें इसमें हॉलमार्क है या नहीं, पहचानने का यह है सही तरीका, जानिए... दुकानदारों के लिए क्‍या नियम बने

अगस्त तक हॉलमॉर्क का लाइसेंस लेने की अवधि बढ़ी दुकानों में रखे पुराने ज्वेलरी पर लगा सकते हैं मुहर। बुधवार को सराफा दुकानें खुली तो बिना हॉलमॉर्क के नहीं बिके जेवर बढ़ने लगी लाइसेंस लेने वालों की संख्या।

Dilip Kumar ShuklaThu, 17 Jun 2021 08:22 AM (IST)
बिहार में 13 जगहों पर होती है हॉलमार्क की मार्किंग।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। सोने के ज्वेलरी पर हॉलमाॅर्क की मुहर अनिवार्य कर दिए जाने से ग्रामीण इलाके के स्वर्ण दुकानदारों का पसीना छूट रहा है। अब ग्रामीण क्षेत्र के स्वर्ण दुकानदार ग्राहकों को झांसे में नहीं ले सकते हैं। अभी सोने के ज्वेलरी में कांटा और मिलावट का खेल नहीं चलेगा। ऐसे दुकानदारों पर सीधा शिकंजा कसा जाएगा। बुधवार को सराफा बाजार में सोने-चांदी का कारोबार हुए। सोने के ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को हॉलमॉर्क मुहर लगी जेवरात ही दिए गए। इधर, उपभोक्ता मंत्री पीयूष गोयल ने अगस्त माह तक सराफा कारोबारियों को हॉलमार्क का लाइसेंस बनाने की छूट देकर बड़ी राहत दी है। नए नियम लागू हो जाने के बाद व्यापारी लाइसेंस नहीं बना सके हैं, उसमें अब तेजी आई है, फटाफट लाइसेंस बनाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

मिलावट पर लगेगी रोक, पुराने जेवरात खरीदने पर टांका नहीं

सर्टिफिकेशन ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड की तरफ से निगरानी शुरू होने के बाद नए-पुराने जेवरों के बनाने में मिलावट पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में जेवरात बनाने में सोने के साथ मिलावट भी की जाती है। जब उसी जेवर को ग्राहक बेचने जाते हैं तो उसमें टांका बंटाकर वजन और वैल्यू को कम किया जाता है। इससे ग्राहकों को सीधा नुकसान पहुंचता है। वहीं, दुकानदारों की जेब में पूरा पैसा चला जाता है।

सूबे में 13 जगहों पर हॉलमार्किंग

सूबे में महज 13 जिलों में हॉलमार्किंग की मुहर लगती है। इसमें भागलपुर भी शामिल है। नए नियम में 40 लाख का टर्न ओवर करने वाले कारोबारियों को छूट दी गई है। भागलपुर हॉलमार्क सेंटर पर दूसरों जिलों से भी दुकानदार मुहर लगाने पहुंचते हैं। यहां खगड़िया, बांका, मुंगेर, झारखंड के गोड्डा, दुमका और पाकुड़ तक के जेवरात पर मुहर लगती है।

हॉलमॉर्क के लेकर नियम घड़ी, फाउंटेन पेन और विशेष प्रकार के आभूषण कुंदन, पोल्की और जड़ाऊ और मीना जेवर पर को हॉलमार्किंग नहीं। हॉलमार्किंग के लिए 18, 22 और 24 कैरेट के सोने की भी अनुमति होगी। सभी खुदरा विक्रेता अपने शोरूम के बाहर उपलब्ध हॉलमार्क ज्वलेरी का बोर्ड हर हाल में लगाएंगे। 31 अगस्त 2021 तक ज्वेलरी के खिलाफ कोई दंड, तलाशी और जब्ती और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। अगस्त तक अपने पुराने स्टॉक के ज्वेलरी पर हॉलमार्क हर हाल में करवा या ज्वेलरी को बेचकर पुराना स्टॉक समाप्त करें। 13 जगहों पर बिहार में होती है हॉलमार्क की मार्किंग 03 माह तक मिली लाइसेंस बनाने की छूट 01 ही बार लेना होगा लाइसेंस, नवीकरण की जरूरत नहीं 03 दर्जन दुकानदारों ने लाइसेंस के लिए किए ऑनलाइन आवेदन

चार निशान बताएंगे हॉलमार्क वाले सोने की पहचान

हॉलमार्क वाले जेवरात पर चार निशान होंगे। पहला निशान सोने का कैरेट और शुद्ध्ता। दूसरा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड का लोगो रहेगा। तीसरा जिस दुकान से जेवरात खरीदे गए हैं उस फर्म का नाम भी रहेगा। चौथे नंबर पर ज्वेलरी का कोड भी रहेगा। जेवरात खरीदने वक्त सभी निशान को जांच कर ही खरीदारी करें।

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