Girl friend को बुलाया घर, धोखे से किया गंदा काम, भागलपुर अदालत ने आरोपित के मां-बाप को कहा-You are guilty, सजा होगी

भागलपुर में बेटे को दुष्कर्म करने में सहयोग करने वाले मां-बाप मुजरिम करार। पाक्सो मामले की विशेष अदालत नौ दिसंबर को सुनाएगी दोनों को सजा। मां-बाप ने पीडि़ता को दिल्ली ले जाने में भी बेटे को किया था सहयोग।

Dilip Kumar ShuklaMon, 06 Dec 2021 09:58 PM (IST)
08 सितंबर 2016 को बाथ थाना क्षेत्र से छात्रा को धोखे से घर ले जाकर बेटे ने किया था दुष्कर्म।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। पाक्सो मामले के विशेष न्यायाधीश आनंद कुमार स‍िंह की अदालत ने छात्रा से दुष्कर्म मामले में 2016 में नाबालिग रहे आरोपित के मां-बाप को सुनवाई के दौरान सोमवार को मुजरिम करार दिया है। विशेष न्यायाधीश ने पिता सुभाष मंडल और मां संयुक्ता देवी को सजा सुनाने के लिए नौ दिसंबर की तिथि तय की है।

सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक शंकर जयकिशन मंडल ने बहस में भाग लिया। मां-बाप को विशेष न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान चार पाक्सो एक्ट में दोषी पाया है। दुष्कर्म के आरोपित बेटे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में नाबालिग होने के कारण पूर्व में स्थानांतरित हो चुकी थी। मामले में नामजद मां-बाप का ट्रायल पाक्सो की विशेष न्यायालय में चला और सोमवार को फैसले की मुकाम तक पहुंच गया।

बेटे की करतूत में था पूरा सहयोग, पीडि़ता को धमकी भी दी थी

बाथ थाना क्षेत्र में छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म की इस घटना में दोषी मां-बाप का बेटे की करतूत में पूरा सहयोग था। बेटे ने जब छात्रा को धोखे से घर लाया था तो भी मां-बाप को जानकारी थी। उसे अपने कब्जे में रख उसके साथ समय बिताया और बाद में दिल्ली लेकर चला गया। तब भी मां-बाप को इसकी पूरी जानकारी थी। लेकिन दोनों ने बेटे को ऐसा करने से मना करने के बजाय उल्टे पीडि़ता को फोन पर धमका कर रहे थे। दिल्ली में पीडि़ता मौका देख किसी तरह आरोपित बेटे के चंगुल से मुक्त होकर भाग निकली। सुरक्षित स्थान पर पहुंचते ही सबसे पहले उसने अपने पिता को फोन किया। फिर घर वालों के सहयोग से वह बाथ थाना क्षेत्र लौटी थी। आठ सितंबर 2016 को घटना की बाबत केस केस दर्ज कराया गया था। दर्ज केस में मोटरसाइकिल से धोखे से घर ले जाकर दुष्कर्म करने में छोटू कुमार और उसके पिता सुभाष मंडल और मां संयुक्ता देवी को नामजद किया गया था।

पीडि़त पक्ष पर डाला गया था दबाव

दुष्कर्म के बाबत केस दर्ज कराने के बाद पीडि़त परिवार पर सामाजिक स्तर पर काफी दबाव बनाया गया था। लेकिन तमाम दबाव के बावजूद बेटी के साथ हुए अन्याय को देखते हुए पीडि़त छात्रा के मां-बाप ने गवाही दी। पीडि़ता की भी गवाही कराई गई।

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