घोरघट पुल... 45 दिन में एक भी पीलर नहीं गड़ा सके अफसर, डीपीआर भेजने में चार बार उलझे, जानिए क्या है मामला

घोरघट पुल का मामला पिफर एक बार फंसता दिख रहा है।

घोरघट पुल का मामला पिफर एक बार फंसता दिख रहा है। अब तक डीपीआर का काम पूरा नहीं हो सका है। भेजे गए डीपीआर पर मंत्रालय से सवाल उठाए गए हैं कि इस पुल के निर्माण में तीन करोड़ अतिरिक्त क्यों भुगतान किया जाए?

Abhishek KumarThu, 25 Feb 2021 07:30 AM (IST)

 भागलपुर [आलोक कुमार मिश्रा]। भागलपुर-मुंगेर सीमा पर निर्माणाधीन घोरघट पुल का फाइनल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेजने में चार बार अधिकारी उलझे। इस पुल का फिर आठ करोड़ का डीपीआर केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया। भेजे गए डीपीआर पर मंत्रालय से सवाल उठाए गए हैं कि इस पुल के निर्माण में तीन करोड़ अतिरिक्त क्यों भुगतान किया जाए?

इधर, 45 दिनों के प्रयास के बाद भी इस पुल का एक पीलर तक नहीं गाड़ा नहीं जा सका है। ऐसी स्थिति में अब जून-जुलाई से पहले निर्माण पूरा होने की उम्मीद कम है। बता दें कि बेरियर लगा कर जर्जर पुराने पुल पर दस सालों से बड़े वाहनों का परिचालन रोक लगा दी गई है। इसकी वजह से भागलपुर और मुंगेर के बीच बस सेवा बंद होने से लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

इस पुल का निर्माण वर्ष 2012 में पूरा होना था, लेकिन निर्माण एजेंसी काम पूरा नहीं कर सकी। अधूरा काम छोड़कर भागने वाली एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एनएच विभाग द्वारा फिर इस पुल का दोबारा टेंडर किया गया, लेकिन एक भी एजेंसी द्वारा दिलचस्पी नहीं दिखाने पर टेंडर रद करना पड़ा। दोबारा डीपीआर बनाने के बाद टेंडर किया गया। एजेंसियों के रूचि नहीं लेने की स्थिति में इसी तरह तीन साल तक टेंडर की प्रक्रिया चलती रही।

वर्ष 2015 में डीपीआर बनाने के बाद फिर इस पुल का टेंडर किया गया। 7.61 करोड़ की लागत से बनने वाले इस पुल का ठेका सीएंडसी को मिला। एक स्पेन का काम अधूरा छोड़ एजेंसी ने जुलाई 2019 में काम बंद दिया। दिवालिया के कगार पर पहुंचने सीएंडसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभाग ने एजेंसी का 40 लाख सिक्योरिटी मनी कर ली गई। साथ ही, इस पुल को एनएच विभाग से पुल निर्माण निगम को बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पांच माह पूर्व इस पुल के निर्माण का ठेका ब्रिज कंस्ट्रक्श्न को मिला। दिसंबर 2020 में एजेंसी ने निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन 45 दिन के प्रयास के बाद भी ठीकेदार पीलर गाडऩे में असफल रहा है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार पीलर नदी के 100 फीट अंदर जाएगा, लेकिन 40-50 फीट के बाद पीलर अंदर नहीं जा पा रहा है। गोताखोर लगाने के बाद ही मान नदी के सतह के नीचे ठोस पदार्थ या पत्थर होने का पता चल पाएगा। अधिकारियों ने बताया कि भागलपुर की ओर पीलर गाडऩे की समस्या खड़ी हो रही है। इस पुल के पहुंच पथ के रेटिंग वाल बनाने सहित इस पुल के निर्माण में बदलाव संबंधी आठ करोड़ का डीपीआर एनएच विभाग के माध्यम से भेजा गया। मंत्रालय द्वारा उठाए गए सवाल का जबाव भेज दिया गया है। दरअसल, चार साल पूर्व बनने पर इस पुल का निर्माण 7.61 करोड़ रुपये खर्च होना था, लेकिन अब चार करोड़ रुपये अधिक यानि 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

गोताखोर लगाने पर मान नदी के सतह के नीचे ठोस जमीन या पत्थर का पता लगाया जा सकता है। डीपीआर मंत्रालय को भेज दिया गया है। -मनोरंजन कुमार पांडेय, कार्यपालक अभियंता, एनएच विभाग।  

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