भागलपुर में बाढ़ से 50407 हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद, मुआवजे के ल‍िए अपनाएं यह प्रक्रिया

भागलपुर में बाढ़ से 50407 हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद होने का अनुमान है। इसके ल‍िए सरकार की ओर से मुआवजे का प्रावधान है। कृषि विभाग ने 66 करोड़ 43 लाख मुआवजा के लिए सरकार से की मांग। 65 सौ प्रति हेक्टेयर अस‍िंंच‍ित क्षेत्र के लिए दिया जाएगा मुआवजा।

Dilip Kumar ShuklaTue, 14 Sep 2021 09:56 AM (IST)
भागलपुर के ब‍िहपुर व जगदीशपुर प्रखंड में बाढ़ से कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। बाढ़ ने जिले में 50407 हेक्टेयर में लगी फसल को बर्बाद कर दिया। कृषि विभाग ने सोमवार को फसल क्षति की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में 50407 हेक्टेयर में फसल को नुकसान बताया गया है। बाढ़ से 46828 हेक्टेयर सिंचित व 2880 हेक्टेयर असिंचित भूमि में नुकसान पहुंचा है। 699 हेक्टेयर में लगी शाश्वत फसल को नुकसान पहुंचा है। बिहपुर व जगदीशपुर प्रखंड में बाढ़ से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

फसलों के नुकसान के एवज में किसानों को मुआवजा देने के लिए कृषि विभाग ने सरकार से 66 करोड़, 43 लाख 44 हजार रुपये मुआवजा की मांग की है। सरकार से राशि मिलने के बाद किसानों के बीच मुआवजा राशि का वितरण शुरू कर दिया जाएगा। जिला कृषि पदाधिकारी कृष्णकांत झा ने कहा कि फसल क्षति के आकलन का कार्य पूरा कर लिया गया है।

डीएम के आदेश पर हुई जांच

डीएम के आदेश पर जिला कृषि पदाधिकारी ने खुद गोराडीह, शाहकुंड व सन्हौला प्रखंड में हुई फसल की क्षति की जांच की थी। जांच दस सितंबर से 12 सितंबर के बीच की थी। सहायक निदेशक (रसायन) मिट्टी जांच अविनाश कुमार ने गोपालपुर, इस्माइलपुर, रंगरा चौक, नवगछिया, खरीक, नारायणपुर प्रखंड में जांच की। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी कुमार विजय ने पीरपैंती व कहलगांव और सहायक निदेशक पौधा संरक्षण अरविंद कुमार ने सबौर, नाथनगर व सुल्तानगंज प्रखंड में जाकर जांच की। धान, मक्का, मिर्च, सब्जी, गन्ना, केला, पपीता, दलहन व तेलहन फसल को ध्यान में रखकर जांच की गई।

ऐसे मिलेगा मुआवजा

65 सौ रुपये प्रति हेक्टेयर अ‍सिंच‍ित क्षेत्र के लिए दिए जाएंगे मुआवजा 13 हजार 500 रुपये सिंचित क्षेत्र के लिए मिलेगा मुआवजा 18 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर पायोनियर फसल के लिए दिया जाएगा मुआवजा नुकसान की भरपाई के लिए किसान कर सकते हैं दलहन और तिलहन की खेती

जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने लगा है। अभी भी खेत से पूरी तरह से पानी निकलने और खेत तैयार होने में कम से कम 20 दिन का समय लगेगा। 20 दिन बाद किसान कलई की खेती कर सकते हैं। दलहन और तिलहन की आगात खेती भी किसानों के लिए लाभदायक है। दलहन और तिलहन की आगात खेती करने पर फूल पर लावा का प्रकोप भी कम होगा।

-164 पंचायत बाढ़ प्रभावित -46828 हेक्टेयर सिंचित भूमि -2880 हेक्टेयर असिंचित भूमि -699 शाश्वत फसल को पहुंचा नुकसान

प्रखंड नुकसान हे. में

पीरपैंती 7200 कहलगांव 6368 सुल्तानगंज 5150 शाहकुंड 2701 नाथनगर 3765 नवगछिया 3636 रंगरा चौक 4979 गोपालपुर 4145 इस्माइलपुर 1851 खरीक 1251 सबौर 2100 सन्हौला 1257 नारायणपुर 1163 गोराडीह 4851

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