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नेपाल में तैयार होती है नकली रेमडेसिविर, बिहार को बनाया मुख्‍य बाजार

नेपाल में तैयार होती है नकली रेमडेसिविर।

Fake Remedesivir in Nepal नेपाल में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाया जा रहा है। इसका बाजार मुख्य रूप से बिहार ही है। बीते दिनों नेपाल पुलिस ने नकली दवा के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। वहां की पुलिस अनुसंधान कर रही है।

Dilip Kumar ShuklaSun, 16 May 2021 07:47 PM (IST)

अररिया [अशोक झा]। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में मौत के सौदागर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार कर रहे हैं। इसका बाजार मुख्य रूप से बिहार ही है। इस मामले का पर्दाफाश पिछले दिनों नेपाल के विराटनगर में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन पकड़े जाने के बाद हुआ। नेपाल पुलिस को पता चला है कि एंटीबॉयोटिक स्टासेफ इंजेक्शन का लेबल उखाड़कर इस पर रेमडेसिविर का लेबल लगा दिया जाता है।

स्टासेफ व रेमडेसिविर की शीशी का साइज एक

एंटीबॉयोटिक स्टासेफ व रेमडेसिविर इंजेक्शन की शीशी का आकार एक जैसा ही है। इसका फायदा गलत रेमडेसिविर बनाने वाले लोग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मरीज के स्वजनों से इस नकली दवा की कीमत सात से 35 हजार रुपये तक ली जा रही है। इस मामले में नेपाल में गिरफ्तार फार्मेसी संचालक सोनू आलम ने अब तक कितनी नकली रेमडेसिविर दवा बेची, इसका पता विराटनगर पुलिस द्वारा किया जा रहा है।

नेपाल पुलिस कर रही अनुसंधान

मोरंग एसपी संतोष खड़का ने बताया कि जिला पुलिस कार्यालय विराटनगर की विशेष शाखा को नकली दवा के कारोबार की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर विराटनगर के एक अस्पताल के बाहर से दवा दुकानदार सोनू आलम व उसके सहयोगी श्रवण यादव की गिरफ्तारी की गई। उन लोगों के पास से काफी मात्रा में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किया गया। अनुसंधान चल रहा है।

खुली सीमा के रास्ते भारतीय क्षेत्रों में नकली दवा

सूत्रों की मानें तो नेपाल से जोगबनी के रास्ते भारतीय क्षेत्रों में बैठे कुछ माफिया नकली रेमडेसिविर मंगवा रहे हैं। इसे भारतीय क्षेत्र में खपाया जा रहा है। इन इलाकों में इसके कुछ दलालों के सक्रिय होने की बात भी कही जा रही है। इनसे संपर्क कर नकली रेमडेसिविर कोसी व सीमांचल के कुछ निजी नर्सिंग होम में भेजी जा रही है।

इस संबंध में अररिया के सिविल सर्जन डॉ. एमपी गुप्ता ने कहा कि अररिया जिले में किसी भी निजी क्लीनिक में कोरोना का इलाज नहीं हो रहा है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपयोग की जाने वाली दवा पर निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में कहीं से नकली रेमडेसिविर का उपयोग जिले में होने की जानकारी नहीं है। अगर कहीं से इसकी शिकायत मिलेगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस सूचना पर भी नजर रखी जा रही है कि अररिया में कहीं नेपाल से तो नकली दवा नहीं आ रही।

 

वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मोइज ने बताया कि अररिया जिले में स्टासेफ दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। अगर मरीज को नकली रेमडेसिविर दवा लगा दी गई तो उसकी जान को खतरा हो सकता है।

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