सिल्क सिटी में बिजली संकट, प्रतिदिन बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर काटी जा रही बिजली, बढ़ता जा रहा लोगों का आक्रोश

सिल्क सिटी के लोग लगातार बिजली संकट झेल रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। आखिरकार बिजली विभाग का खामियाजा उपभोक्ता क्यों झेलें लेकिन यहां ऐसा ही हो रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं का आक्रोश कभी भी फूट सकता है।

Abhishek KumarSun, 01 Aug 2021 10:34 AM (IST)
सिल्क सिटी के लोग लगातार बिजली संकट झेल रहे हैं।

 जागरण संवाददाता, भागलपुर। सुधार की दुहाई और संकट झेलो भाई। शहर में बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर ्रप्रतिदिन उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलने के लिए विवश होना पड़ रहा है। चार से आठ घंटे तक कटौती की जा रही है। इससे उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। आखिरकार बिजली विभाग का खामियाजा उपभोक्ता क्यों झेलें, लेकिन यहां ऐसा ही हो रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं का आक्रोश कभी भी फूट सकता है।

सुधार के नाम पर फीडरों को बंद कर घंटों बिजली कटौती की जा रही है। नतीजतन सबौर ग्रिड से उपकेंद्रों को पर्याप्त मिलने के बाद भी लोगों को बिजली संकट झेलना पड़ रहा है। बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तार बिछाने, पोल गाडऩे व रखरखाव कार्य के नाम पर फीडरों को घंटों बंद किया जा रहा है। पिछले आठ दिनों से बरारी क्षेत्र में बिजली सुधार की दिशा में कार्य चल रहा है। पहले चार दिन जेल से बरारी उपकेंद्र को वैकल्पिक लाइन जोडऩे के लिए बरारी उपकेंद्र के औद्योगिक फीडर को चार से सात घंटे तक बंद कर इन फीडरों से जुड़े इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप की गई। पिछले चार दिनों से बरारी रोड में 33 हजार वोल्ट के तार को पोल से खीचने का काम चल रहा है। इसके कारण बरारी फीडर को भी चार से छह घंटे बंद रखा गया। शनिवार को भी इस फीडर को चार घंटे बंद कर आपूर्ति ठप कर दी गई। व्यवस्था सुधार के नाम पर प्रतिदिन फीडरवार घंटों बिजली काटी जा रही है।

कैचवर्ड :-मनमानी

- नए तार बिछाने, पोल गाडऩे व रखरखाव कार्यों के नाम पर कटौती

- आठ दिनों से बरारी क्षेत्र में चल रहा है मेटनेंस का कार्य

- फीडरवार क्षेत्रों में चार से आठ घंटे बंद की जा रही आपूर्ति

- 35-40 साल पुराने जर्जर तार गर्मी में गलकर टूट रहे

- 1.25 लाख कनेक्शन है शहरी क्षेत्र में,

- 10 साल में बढ़कर सवा लाख हो गए उपभोक्ता पर सुविधा नहीं

करोड़ों बिल भुगतान पर आपूर्ति की नहीं वैकल्पिक व्यवस्था

शहरी क्षेत्र में सवा लाख कनेक्शन हैं। उपभोक्ताओं को समय पर बिल का भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी जाती है। निश्चित समय पर बिल जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं से विलंब शुल्क भी वसूला जाता है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को सुविधा नहीं मिल रही है। सुधार के नाम पर बिजली कटौती तो की जाती है, लेकिन संबंधित फीडर से जुड़े मोहल्लों के निर्बाध आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। नतीजतन लोगों को घंटों बिजली संकट झेलना पड़ रहा है।

वैकल्पिक लाइन की व्यवस्था नहीं होने के कारण 33 केवी लाइन या 11 केवी लाइन में फाल्ट आने के कारण तीन से बारह घंटे तक बिजली ठप रहती है। गुरुवार की रात दो बजे हबीबपुर और कजरैली फीडर का ब्रेकडाउन हो गया था। विभाग की लचर व्यवस्था के कारण इन फीडरों से जुड़े 55-60 इलाके के लोगों को 11 घंटे बिजली संकट झेलना पड़ा था।

सात-आठ फीट की ऊंचाई पर लटक रहे बिजली के तार

बिजली व्यवस्था हांफ रही है। व्यवस्था वेंटीलेटर पर है। यही वजह है कि सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक बिजली खंभे एंगल पर टिके हुए हैं। तारों की झुलमुठ की यही स्थिति है। मुख्य सड़कों के किनारे खंभों पर खींचे गए सात-आठ फीट की ऊंचाई पर लटक रहे बिजली तार बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। जेल रोड, तिलकामांझी, घंटाघर, स्वामी विवेकानंद रोड, बरारी रोड, कचहरी चौक, डा. आरपी रोड, खलीफाबाग, जीरोमाइल व सबौर सहित शहर के सड़क किनारे लगे बिजली खंभों में कई टेढ़े होने के साथ झुक गए हैं। इन खंभों को एंगल के सहारे टिका कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। वहीं उलझे सर्विस वायर के टूटने पर खुद के तार को भी उपभोक्ताओं के लिए पहचानना मुश्किल हो जाता है। 35-40 साल पुराने जर्जर तार लोड सहने की स्थिति में नहीं है। गर्मी में लोड बढऩे पर जर्जर तार गलकर गिर जाते हैं। बारिश में तार टूटने की समस्या बढ़ गई है।

उपभोक्ता बढ़े पर आधारभूत ढाचा का नहीं हुआ विकास

पिछले दस साल में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर सवा लाख से अधिक हो गई है, लेकिन लोड के अनुपात में पुराने जर्जर तार नहीं बदले जा सके हैं। क्षमता विस्तार के नाम पर उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाकर पांच से 20 से 25 केवीए कर दी गई है। दबाव कम करने के लिए मेडिकल कालेज, सबौर इंजीनियङ्क्षरग कालेज, टीएनबी कालेजिएट स्कूल, लोदीपुर व सीटीएस परिसर में नए उपकेंद्र बनाने का काम चल रहा है।

नए भीखनपुर उपकेंद्र को तीन माह पहले चालू कर दिया गया है। दिसंबर तक तार, पोल व ट्रांसफार्मर बदलने का काम पूरा हो जाएगा। नए उपकेंद्रों को चालू करने की योजना है। उपकेंद्रों की संख्या बढऩे पर फीडरों की संख्या भी बढ़कर 48 हो जाएगी। इससे फीडरों पर लोड कम होगा और आपूर्ति की समस्या का काफी हद तक समाधान होगा। वार्ड 18 से 31 और 38 नंबर वार्ड में अंडरग्राउंड तार बिछाने की योजना है। मुख्यालय से स्वीकृति मिलने पर 11 हजार वोल्ट तार को दो उपकेंद्रों को जोडऩे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - सुनील कुमार गावस्कर, कार्यपालक अभियंता, परियोजना।

 

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