बिहार में भारी वित्‍तीय अनियमितता का मामला उजागर, लोकायुक्त ने पकड़ी पूर्णिया विश्वविद्यालय में करोड़ों की धांधली

बिहार के पूर्णिया से बड़ी खबर सामने आ रही है। लोकायुक्त ने पकड़ी पूर्णिया विश्वविद्यालय में करोड़ों की धांधली। जांच के बाद आडिट कराने का दिया निर्देश। पूर्णिया विवि के कुलपति के अनुरोध पर सरकारी स्तर पर आडिट शुरू।

Dilip Kumar ShuklaWed, 08 Dec 2021 10:01 PM (IST)
बिहार के पूर्णिया से आ रही है। पूर्णिया विवि।

पूर्णिया [राजीव कुमार]। पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना के अभी तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं कि लोकायुक्त की जांच में पूर्व कुलपति द्वारा नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की धांधली करने का मामला पकड़ा गया है। लोकायुक्त के निर्देश पर गठित जांच टीम ने जब विश्वविद्यालय में दो वर्षों के दौरान विभिन्न मदों में खर्च की गई राशि की जांच की तो उसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी बरते जाने की बात सामने आई।

पूर्णिया विश्वविद्यालय में यह वित्तीय गड़बड़ी 18 मार्च 2018 को विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ शुरू हुई जो लंबे समय तक जारी रही। जांच टीम द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी को देखते लोकायुक्त ने पूर्णिया विश्वविद्यालय को दो वर्षों के दौरान विभिन्न मदों में खर्च की गई राशि की आडिट कराने को कहा। इसके आलोक में पूर्णिया विवि के कुलपति डा. राजनाथ यादव ने सरकार को पत्र लिखकर सरकारी आडिट टीम से विवि की आडिट कराने का अनुरोध किया। इस आलोक में आडिट टीम ने जांच शुरू कर दी।

लोकायुक्त की जांच में कई तरह की गड़बड़ी पाए जाने व आडिट कराने के निर्देश पर सरकार स्तर पर आडिट कराने के लिए पत्र भेजा गया है। इस आलोक में आडिट टीम द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। आडिट रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में आगे कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। - डा. राजनाथ यादव, कुलपति, पूर्णिया विश्वविद्यालय

अतिथि शिक्षकों की बहाली में विवि की चुप्पी पर सवाल

पूर्णिया विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षकों की बहाली में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल में हुई सीनेट की बैठक में भी यह मामला जोरदार ढंग से गूंजा था। पूरे मामले में जांच के बाद यथोचित कार्रवाई की बात कही थी। इधर बैठक के कई दिनों बाद भी इस मामले में कोई पहल नहीं होने पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सह सीनेट सदस्य शिवशंकर सरकार ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कई अनुत्तरित सवाल हैं और अगर इसका जवाब नहीं आता है तो निश्चित रुप से विश्वविद्यालय प्रशासन खुद सवालों के घेरे में रहेगा।

मगध विश्वविद्यालय के मामले से पूरे बिहार की छवि खराब हुई है और ऐसे में पूर्णिया विश्वविद्यालय को विशेष सजगता बरतने की जरुरत है। उन्होंने कामर्स एवं बोटनी बिषय में अतिथि शिक्षकों की बहाली यूजीसी एवं उच्च शिक्षा विभाग के मापदंडों की अनदेखी करते हुए की गई थी। एलाइड बिषय में व विज्ञापन की अंतिम तिथि तक बगैर नेट एवं पीएचडी की उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों की अतिथि शिक्षक के रुप में चयन की जांच होनी चाहिए। बीपीएससी 2014 में सहायक प्राध्यापक बहाली में किसी भी एलायड बिषय को शामिल नहीं किया था।

साथ ही वर्ष 2018 में अतिथि शिक्षकों की बहाली में पूर्णिया विश्वविद्यालय को छोड़कर किसी विश्वविद्यालय ने एलायड विषय को नही माना। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग वर्ष 2020 में सहायक प्राध्यापक बहाली में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मान्य विषयवार एलायड बिषयों की जारी सूची में कॉमर्स बिषय के लिए किसी एलायड बिषय को नही माना है। ऐसे में पूर्णिया विश्वविद्यालय ने कामर्स बिषय में सभी नियमों को तोड़कर एमबीए पास बगैर नेट पास अभ्यर्थी को अतिथि शिक्षक बनाकर स्वयं सवाल खड़ा कर दिया है। इसी तरह बोटनी बिषय में नियम तोड़कर अमान्य एलायड बिषय एग्रीकल्चर पास अभ्यर्थियों को अतिथि शिक्षक की बहाली पर सवाल उठ रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति को तत्काल इस मामले में पहल करनी चाहिए।

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