आलू उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा बिहार, बीएयू की नई किस्म से होगी बंपर पैदावार, जानिए क्यूं है खास

आलू के उत्पादन में बिहार जल्द आत्मनिर्भर हो जाएगा। बीएयू की नई किस्म से बंपर पैदावार होगी। साथ ही रोग मुक्त और गुणवत्तायुक्त आलू का उत्पादन होगा। इससे हिमाचल और पंजाब पर हमारी निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही...!

Abhishek KumarSun, 12 Sep 2021 08:36 PM (IST)
आलू के उत्पादन में बिहार जल्द आत्मनिर्भर हो जाएगा।

भागलपुर [ललन तिवारी]। अब बिहार में ही रोग मुक्त और गुणवत्तायुक्त उच्च तकनीक से आलू के बीज का उत्पादन किया जाएगा। यहां के किसानों को आलू बीज के लिए हिमाचल प्रदेश और पंजाब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बीज भी यहीं पर उपलब्ध हो जाने से लागत कम होगी। इतना ही नहीं रोगों से नुकसान होने की संभावना भी बहुत कम होगी।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से समन्वय कर बीज उत्पादन की नई तकनीक के साथ विस्तारीकरण और अनुसंधान पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में नालंदा उद्यान महाविद्यालय में आलू के मिनी ट््यूबर बीज से 17 ङ्क्षक्वटल जीवन सीड बनाया गया है, जिसे कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस बार बिहार के चार जिलों नालंदा, पटना, शेखपुरा और लखीसराय में खेतों में प्रयोग किया जाएगा। इसके विस्तारीकरण को लेकर हाईटेक लैब की स्थापना पर काम चल रहा है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान से 75 हजार मिनी ट््यूबर बीज लेने की बात की गई है, जिससे जीवन सीड बनाया जाएगा। इस तरह बिहार के किसान अब नई तकनीक से रोग मुक्त और गुणवत्तायुक्त आलू का उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।

दूसरे प्रदेशों पर निर्भर रहने से खर्च अधिक होता था

बीएयू के अनुसंधान निदेशक डा. फिजा अहमद कहते हैं कि बिहार में आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन उच्च गुणवत्तायुक्त बीज नहीं होने के कारण यहां के आलू उत्पादक किसान हिमाचल प्रदेश और पंजाब से बीज मंगाते हैं। इससे खर्च ज्यादा होता है और रोग आदि से नुकसान होता है। अब बिहार की धरती पर ही गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन किसानों के खेतों में किया जाएगा। मिनी ट््यूबलर बीज बनाने के लिए नालंदा में उच्च तकनीक से युक्त लैब होगी, जिसकी टेंडर प्रक्रिया में है। बड़े पैमाने पर आलू का बीज आने वाले समय में किसानों के सहयोग से उत्पादन किया जाएगा।

फसल में नहीं लगेगा झुलसा रोग

आलू की फसल में झुलसा आदि रोग नहीं लगेगा। यह आहार में स्वाथ्यवर्धक होगा। इसकी कई प्रकार की रंगीन और खूबसूरत किस्में होंगी। अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार होने के कारण विदेशों में भी बेचा जा सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरुप आलू का उत्पादन हो इसके लिए बीएयू सहित तीन संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में पोषणयुक्त स्वास्थ्यवर्धक आलू का उत्पादन सूबे के किसान कर सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। - डा. अरुण कुमार, कुलपति बीएयू सबौर  

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