बिहार पंचायत चुनाव: चुनावी वर्चस्व बनाने के लिए दोहरा हत्याकांड, खगड़िया में संभावित सरपंच प्रत्याशी बना हत्यारा!

बिहार पंचायत चुनाव खगड़िया में दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले में संभावित सरपंच प्रत्याशी को हिरासत में लिया गया है। इस वारदात के बाद से दहशत का माहौल कायम है। तो वहीं ऐसी सुबगुहाट है कि चुनावी वर्चस्व स्थापित करने के लिए हत्या की गई।

Shivam BajpaiMon, 27 Sep 2021 12:16 PM (IST)
बिहार पंचायत चुनाव- खूनी जंग में दो की गई जान।

आनलाइन डेस्क, भागलपुर। बिहार पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक अमला जी तोड़ मेहनत कर रहा है लेकिन दागी प्रवृत्ति के संभावित प्रत्याशी अपना चुनावी वर्चस्व स्थापित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ताजा मामला खगड़िया के बेलदौर का है, जहां दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में जिस आरोपी को हिरासत में लिया गया है, वो सरपंच पद का संभावित प्रत्याशी बताया जा रहा है। मामले के बाद से संबंधित गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। 

मामला जिले के बेलदौर थाना स्थित डुमरी पंचायत का है। यहां रोहियामा गांव में दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया। इस हत्याकांड में डुमरी पंचायत से सरपंच पद के संभावित प्रत्याशी पप्पू पासवान को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि चुनावी रंजिश के चलते इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। मृतकों में गांव के रिटायर होमगार्ड जवान हरिबोल यादव और एक अन्य किशुनदेव चौधरी की हत्या हुई है। 

(मौका-ए-वारदात पर पहुंचे पुलिस अधिकारी)

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पंचायत चुनाव से पहले हत्याकांड 

किशुनदेव चौधरी भी डुमरी पंचायत से पंचायत समिति सदस्य पद का संभावित प्रत्याशी था। इधर ये बात भी निकलकर सामने आ रही है कि मारे गए हरिबोल और किशुनदेव पर भी कई मामले दर्ज है और वे जमानत पर बाहर हैं। हत्या, लूट और डकैती के तीन अलग-अलग मामलों में संलिप्त दोनों की हत्या के बाद से कई तरह की चर्चा इलाके में चल रही हैं। इस पंचायत में पांचवें चरण के तहत 24 अक्टूबर को मतदान होने हैं। वहीं, 30 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होनी है। इससे पहले ही इस हत्याकांड ने पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ाने का संकेत दे दिया है।

चुनावी चर्चा के दौरान हुई कहासुनी और फिर..

बताया जा रहा है कि रविवार की रात शनिचर चौधरी के दरवाजे पर हरिबोल यादव, किशुनदेव चौधरी, ढोलन चौधरी और शनिचर चौधरी बैठकर आपस में कुछ चर्चा कर रहे थे। चुनावी चर्चा में ही कहासुनी हुई। उसी दरम्यान लाइट चली गई और इस हत्याकांड को अंजाम दे दिया गया।  हरबोल यादव व किशुनदेव चौधरी के सीने में गोलियां जा लगीं। एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे की इलाज के दौरान।

उधर दोहरे हत्याकांड के बाद से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दहशत साफ देखी जा सकती है। मृतकों की आपराधिक छवि रही है। उनके जानने वाले किसी तरह की हिंसा पर उतारू न हो जाएं इसके लिए मौका-ए-वारदात पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। 

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