Bihar Election 2020: बागी के बगावती तेवर के बीच हो रही महागठबंध व राजग की अग्निपरीक्षा

इस बार सीमांचल में महागठबंधन और राजग की होगी परीक्षा।
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 04:59 PM (IST) Author: Abhishek Kumar

अररिया [आशुतोष कुमार निराला]। सीमांचल का अररिया जिले में विकास के नाम पर चुनावी शोर शुरू होकर बाद में जात-जमात पर ही मतदान होता है। प्रत्येक साल बाढ़-कटाव का वादा कर चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी चुनावी नैया पार करने के लिए अपनी जाति विरादरी को खोजते खोजते नैया पार कर लेते हैं। उसके बाद विकास की बात हाशिए पर ही रह जाती है। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी पीड़ा बाढ़ के समय दिखती है। सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आज जाते हैं। न अपने खाने व रहने का ठिकाना रहता है और न ही मवेशियों के लिए। ऐसे में घर रखा अनाज भी बाढ़ के पानी बह जाता है। चुनाव में मतदान के बाद आस लगाए लोग रहते हैं कि इस बार बाढ़-कटाव से निजात मिलेगा। लेकिन उम्मीद की डोर टूट जाती है। अधिकांश गांवों में युवा खोजने से नहीं मिलेंगे। अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में पंजाब हरियाणा में काम करने चले जाते हैं। यहां गांव में विरह की आग में चूल्हे जलते हैं। पड़ोसी जिला नेपाल होने के कारण तस्करी का धंधा भी परवान पर रहता है।

अररिया में महागठबंधन व एनडीए के बीच सीधा मुकाबला

विधानसभा का नाम - अररिया

प्रत्याशी- कुल 12

आबिदुर रहमान- कांग्रेस

शगुफ्ता अजीम- जदयू

चंद्रशेखर ङ्क्षसह बब्बन- लोजपा

अररिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने अपने पुराने उम्मीदवार व सीङ्क्षटग विधायक आबिदुर रहमान पर ही भरोसा जताया है। वहीं इस सीट पर जदयू ने शगुफ्ता अजीम को चुनाव मैदान में उतारा है। शगुफ्ता यहां से दो पूर्व में जिप अध्यक्ष रही है वर्तमान में वे जिप सदस्य हैं। उनके पति भी जिप अध्यक्ष हैं। यहां दो राजनीतिक घराने के बीच सीधे लड़ाई हो रही है। आबिदुर रहमान के पिता व दादा विधायक रह चुके हैं। वहीं शगुफ्ता के ससुर भी पलासी व सिकटी से विधायक रहे हैं। वहीं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर ङ्क्षसह बब्बन यहां से लोजपा से चुनाव मैदान में कूद कर मुकाबला को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

जोकीहाट में दो भाईयों की लड़ाई में कमल खिलाने की कवायद

विधानसभा का नाम-जोकीहाट-

प्रत्याशी- कुल 12

रंजीत यादव- भाजपा

सरफराज आलम- राजद

शाहनवाज आलम- एआइएमआइएम

जोकीहाट विधानसभा सीट में सबसे रोचक मुकाबला हैं। यहां सीमांचल के गांधी कहे जाने वाले तस्लीमुद्दीन के मंझले पुत्र व पूर्व सांसद सरफराज आलम राजद से व उनके छोटे भाई सरफराज आलम शाहनवाज एआइएमआइएम से चुनाव मैदान में हैं। इन दोनों भाईयों के बीच भाजपा के रंजीत यादव कमल खिलाने मैदान में उतरे हैं। दोनों भाई ही तस्लीमुद्दीन के सपने को साकार करने की बात चुनावी अखाड़े में कर रहे हैं। वहीं 25 साल भाजपा ने जोकीहाट से अपना उम्मीदवार उतार कर सबको चौकाने पर मजबूर कर दिया है। यहां से तीनों उम्मीदवार पूरी तरह से जोर लगा रहे है। यहां से इन तीनों के साथ कुल नौ उम्मीदवार चुनाव में कूदे हुए हैं। भाजपा जहां दो भाईयों के बीच कमल खिलाने का दंभ भर रही है। वहीं सरफराज महागठबंधन के वोट बैंक के सहारे चुनावी नैया पार करने में लगे हैं। शाहनवाज अपने पिता के नाम व पिछले दो सालों में किए कार्यो पर वोट मिलने की बात कर रहे हैं।

सिकटी में बागियों ने बढ़ाई दलीय की परेशानी

विधानसभा का नाम- सिकटी-

कुल प्रत्याशी- कुल 14

विजय कुमार मंडल- भाजपा

शत्रुघन मंडल- राजद

कमरूजमा- निर्दलीय

सिकटी विधानसभा सीट पर भाजपा का 2015 में कब्जा था। पिछले चुनाव में यहां जदयू से शत्रुघन मंडल चुनाव मैदान में थे। वे रनर भी रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा-जदयू मिलकर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में जदयू से नाता तोड़कर शत्रुघन मंडल राजद की टिकट से चुनाव मैदान में आ गए। वहीं राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष कमरूजमा निर्दलीय चुनाव मैदान में अड़े हैं। इसके साथ साथ भाजपा कार्यकर्ता व पूर्व विधायक प्रतिनिधि राजा मिश्रा व राजद के नेता व पूर्व विधायक आनंदी यादव के पुत्र अभिषेक आनंद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरकर दलीय प्रत्याशी के पसीने छूड़ा रहे हैं। हालांकि यहां के लोगों की बात करे तो साफ तौर पर कहते नजर आ रहे हैं कि चाहे जीत जिसकी भी हो लेकिन हराने जिताने में बागी का बहुत बड़ा योगदान होगा।

फारबिसगंज: कांग्रेस व भाजपा के बीच होगा निर्णायक मुकाबला

विधानसभा का नाम- फारबिसगंज

कुल प्रत्याशी- 13

भाजपा- विद्यासागर केशरी

कांग्रेस- जाकिर अनवर

फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र यूं तो 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में है। लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा के विद्यासागर केशरी व कांग्रेस के जाकिर अनवर के बीच है। यहां इन दोनों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में श्रीराम सेना के अध्यक्ष प्रदीप देव मुकाबला त्रिकोणीय बना रहे हैं। प्रदीप देव भी हिन्दुत्व के मुद्दे पर ही चुनाव मैदान में वोट मांग रहे हैं। वहीं भाजपा के केशरी सीङ्क्षटग विधायक होने के कारण अपने बचे हुए कामों को पूरा करने व नरेंद्र मोदी के नाम पर लोगों के बीच जा रहे हैं। कांग्रेस के जाकिर अनवर फारबिसगंज से 2000 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। इस बार फिर वही इतिहास दुहराना चाह रहे हैं। वहीं तीन नवंबर को नरेंद्र मोदी फारबिसगंज में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। इसी दिन अररिया में भी राहुल गांधी का भी चुनावी सभा प्रस्तावित है। इसके बाद का माहौल नेताओं के भविष्य को तय करेगा।

नरपतगंज में जातीय गोलबंदी पर से बनता जीत हार का समीकरण

विधानसभा का नाम- नरपतगंज

कुल प्रत्याशी- 20

जयप्रकाश यादव- भाजपा

अनिल यादव- राजद

नरपतगंज में राजद से पुराने चेहरे व सीङ्क्षटग कंडिडेट अनिल यादव चुनाव उम्मीदवार हैं। वहीं भाजपा ने यहां से नये उम्मीदवार पर दांव लगाया है। यहां से सेवानिवृत पुलिस पदाधिकारी जयप्रकाश यादव को कमल खिलाने की जिम्मेदारी दी है। यहां से जनाधिकार पार्टी से ङ्क्षप्रस विक्टर व एएमआइएम से हदीश चुनाव चुनाव लड़ रहे हैं। अभी तक असुदद्दीन ओवैसी को छोड़कर कोई भी स्टार प्रचारक यहां नहीं आए है। अब तक के चुनाव में जातीय गोलबंदी ही जीत-हार का समीकरण तय करती है। एम-वाई समीकरण के साथ पिछड़ा व अति पिछड़ा वोटर का रूख से यहां अपनी ओर सभी करने में जुटे हैं। अधिकांश चुनाव में यादव जाति के जनप्रतिनिधि ही जीत का सेहरा पहनते हैं।

रानीगंज में राजद व जदयू की लड़ाई को तिकोणीय बनाने में लगा लोजपा

विधानसभा का नाम- रानीगंज

कुल प्रत्याशी- 12

अचमित ऋषिदेव- जदयू

अविनाश मंगलम- राजद

परमानंद ऋषिदेव- लोजपा

रानीगंज से 2015 के चुनाव में जदयू के अचमित ऋषिदेव विधायक बने थे। पिछले चुनाव में जदयू-राजद साथ साथ चुनाव लड़े थे। इस बार का समीकरण बदला हुआ है। इस बार जदयू व राजद के एक दूसरे के आमने सामने है। जदयू से फिर इस बार भी अचमित ऋषिदेव ही चुनावी मैदान में है। वहीं राजद से अविनाश मंगलम है। मंगलम नियोजित शिक्षक की नौकरी छोड़ कर अपना किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं अचमित नीतीश कुमार के नाम पर फिर एक बार विकास की बयार बहाने का आश्वासन दे रहे हैं। इन सबके बीच भाजपा से दो बार विधायक रहे परमानंद ऋषिदेव लोजपा की टिकट पर मैदान में आ गए हैं। वे अपने आप को जिताकर कमल खिलाने की ही बात कर वोटरों को लुभा रहे हैं।

 

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