Bihar: शादी के चंद घंटों बाद छूटा सात जन्मों का साथ, मुंह दिखाई से पहले देनी पड़ी दूल्‍हे को मुखाग्नि

सुल्‍तानगंज घाट में पत्‍नी का दाह संस्‍कार करते उनका पति।

मुंगेर में एक शादी के बाद एक दुल्‍हन की मौत हो गई। जहां दुल्‍हन को दूल्‍हे का घर जाना था उसे अस्‍पताल जाना पड़ गया। अस्‍पताल का चक्‍कर लगाते-लगाते 24 घंटे में ही दुल्‍हन की मौत हो गई। पति ने मुंह दिखाई देने से पहले उसे मुखाग्नि दी।

Dilip Kumar ShuklaTue, 11 May 2021 05:46 PM (IST)

जागरण संवाददाता, मुंगेर। भाग्य भी कभी-कभी ऐसे खेल दिखाती है कि लोग सिर्फ आह भर कर रह जाते हैं। सिसकियां और चित्कार के बीच इसे नियति मान कर लोग कलेजे पर पत्थर रख लेते हैं। लेकिन, लंबे अर्से तक ऐसी त्रासदी लोगों के जेहन में जिंदा रहती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं- मुंगेर के तारापुर प्रखंड के अफजनगर पंचायत के खुदिया गांव की। जहां शादी के चंद घंटे के बाद ही विवाहिता की मृत्यु हो गई। जहां खुशियां थी, वहां पलक झपकते ही मातम पसर गया। लड़की का अंतिम संस्कार उसके पति रविश कुमार ने हिंदू रीति रिवाज के अनुसार किया।

जानकारी के अनुसार, आठ मई की रात खुदिया गांव के रंजय यादव की बेटी निशा कुमारी की शादी हवेली खड़गपुर प्रखंड के महकोला गांव से सुरेश यादव के पुत्र रवीश की बारात पहुंची। गांव के ही मुखिया के पिता पूर्व मुखिया गणेश मांझी की तबीयत खराब होने से जल्दबाजी में शादी की रस्म पूरी की गई थी। विवाह के कुछ देर के बाद ही लड़की की तबीयत अचानक बिगड़ गई। विवाहिता निशा कुमारी सिंदूरदान के बाद अपनी ससुराल भी नहीं जा पाई। जिस दुल्हन को मायके से ससुराल के लिए विदा होना था, वह इस संसार को ही अलिवदा कह सुल्‍तानगंज स्थित श्मशान घाट की ओर विदा हो गई।

मृतक निशा देवी की माता रीता देवी ने कहा कि बेटी की तबीयत अचानक खराब हुई। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। तबीयत खराब होने के बाद तुरंत उसे निजी गाड़ी से तारापुर ले गए। तारापुर में कोई चिकित्सक नहीं मिले। शांति नगर में एक चिकित्सक ने देखा तो बीपी बढ़ा हुआ बताया। प्राथमिक उपचार के बाद भागलपुर जाने की सलाह दी। इसके बाद बिटिया को लेकर भागलपुर गए। भागलपुर में एक निजी चिकित्सक में दिखाए। उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही, परंतु अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। दूसरे दिन पुनः आने के लिए कहा। इस बीच उन्होंने दवा दिया। दूसरे दिन दवा चालू किया। दवा देने के बाद अचानक उसका पेट पूरी तरह फूलने लगा। आगे की दवा बंद कर दी। हम लोग पुनः उसे लेकर भागलपुर गए।

भागलपुर में भी जेएलएनएमसीएच (मायागंज) से सदर अस्पताल, फिर सदर अस्पताल से जेएलएनएमसीएच का चक्कर लगते रहे। इस बीच कहीं भी उसका इलाज नहीं हुआ। यहां से वहां चिकित्‍सक भेजते रहे। इलाज के बगैर ही उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने गैस की बीमारी बताई पर इलाज नहीं किया। पटना ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कर ही रहा था कि उसकी मौत हो गई।

लड़के की शादी के लिए आठ मई को बारात आई थी। नौ मई को शादी होना तय था। परंतु मुखिया जी के पिताजी की अचानक बिगड़ी तबियत को देखते हुए वरमाला कराते हुए सिंदूर दान आठ की रात में करा दिया गया था। लड़की की मां ने बताया किशादी में लगभग सात लाख रुपये खर्च हुए। वह घर की सबसे बड़ी थी। अब वे लोग पूरी तरह बर्बाद हो गए। नए दामाद ने हमेशा संबल प्रदान किया। कभी पीछे नहीं हटे और उन्होंने ही मेरी बेटी का अंतिम संस्कार किया।

लड़की के पिता रंजन यादव ने कहा कि बीपी बढ़ने तथा पेट में गैस बनने के कारण अचानक उसकी मौत हो गई। वह पहले से किसी प्रकार की बीमारी से ग्रसित नहीं थी। शादी के 24 घंटे के अंदर ही उसकी मौत हो गई । मुखिया जी के पिताजी के मृत्यु होने के बाद छूतक हो गया था। लड़के वाले ने लड़की की विदाई की बात कही। छूतक होने के कारण मैंने विदा नहीं करने की बात कही गई। नौ तारीख को दिन में लड़की ने तबीयत खराब होने की बात कही। हम सीधे मायागंज ले गए। वहां से सदर अस्पताल भेजा गया। दोनों अस्पताल का दो-दो बार चक्कर लगाने के बाद अंततः मायागंज अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज प्रारंभ होने के बाद उसकी मृत्यु हो गई और उसे बाहर कर दिया गया। इसे विधि की विडंबना ही कहा जाएगा कि कुछ घंटे पूर्व ही निशा के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन लेने वाले रवीश कुमार को पत्नी निशा कुमारी को मुखाग्नि देने पड़ी।

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