अब सीवरेज से निकलेगा पीने का पानी, साहेबगंज में 384 करोड़ की लागत से बनेगा ट्रीटमेंट प्लांट

भागलपुर में अब पेयजल की किल्‍लत नहीं होगी।

भागलपुर में अब पेयजल की किल्‍लत नहीं होगी। इसके लिए साहेबगंज में 384 करोड़ की लागत से नया सिवरेज ट्रिटमेंट प्‍लांट बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे पानी की सप्‍लाई भी शुरू की जा सकती है।

Abhishek KumarThu, 04 Mar 2021 07:24 PM (IST)

जागरण संवाददाता,भागलपुर। जल्द ही शहर में पेयजल समस्या का समाधान हो जाएगा। नमामि गंगे परियोजना के तहत भागलपुर के साहेबगंज में 384 करोड़ से बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पीने योग्य पानी निकलने लगेगा। इस प्लांट के निर्माण की जिम्मेदारी अदाणी ग्रुप को मिली है। यह सीवरेज प्लांट लगभग 65 एमएलडी क्षमता का होगा। भागलपुर में छोटे बड़े करीब 80 नालों का पानी गंगा नदी में गिरता है। नालों के पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा और उसको शोधित किया जाएगा।

नगर निगम भागलपुर के प्रभारी नगर आयुक्त प्रफुल्ल चंद्र यादव ने बताया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित जल को पाइप लाइन के द्वारा बरारी वाटर वर्कर्स तक पहुंचाया जाएगा। वहां से पुरानी व्यवस्था के तहत शहर को जलापूर्ति की जाएगी। शहर को 45 एमएलडी पानी की जरूरत है, जो वहां से मिल जाएगा। खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए केनाल बनाया जाएगा। मालूम हो कि पहले गंदे पानी को शोधित कर सिंचाई कार्य में उपयोग लाए जाने की योजना थी। बाद में बदलाव लाकर इस आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जलशोधन के बाद पानी में बीओडी  (बायो कैमिकल ऑक्सीजन डिमांड) मानक 10 से 12 पर लाने के कार्य की योजना बनाई गई। इस फेरबदल से 10 से 15 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त खर्च आएगा।

एनजीटी की गाइडलाइन पर तीन स्तर पर स्थापित होगा प्लांट

एनजीटी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जारी गाइडलाइन के मुताबिक, भागलपुर में दूसरे और तीसरे स्तर पर कार्य होगा। दूसरे स्तर के प्लांट में जलशोधन के बाद खेतों की सिंचाई की योजना है। वहीं तीसरे स्तर के प्लांट में पीने योग्य पानी तैयार किया जाएगा। शहर के बुनकर क्षेत्र व औद्योगिक क्षेत्र के रसायन युक्त पानी से गंगा नदी प्रदूषित हो रही है। सीवरेज प्लांट से औद्योगिक क्षेत्र के दूषित पानी को शुद्ध कर उसे पीने योग्य बनाने से प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी।  

ऐसे बनेगा प्लांट

यह सीवरेज प्लांट लगभग 65 एमएलडी क्षमता का होगा। नई तकनीक से नाले के पानी में मौजूद आर्गेनिक व इनआर्गेनिक पदार्थों का भी सही इस्मेताल होगा। प्लांट तक पहुंचने वाले पानी को ग्रिड चैंबर तक पहुंचाया जाएगा। मुख्य ट्रीटमेंट प्लांट से पहुंचने से पहले इनआर्गेनिक पदार्थ जैसे पत्थर, ईंट, बालू आदि ठोस पदार्थ को हटाया जाएगा। इसके बाद आर्गेनिक तत्व जैसे रसोई के कचरे, मल-मूत्र आदि को अलग कर जैविक खाद तैयार किया जाएगा। इसके बाद पानी मुख्य प्लांट में चला जाएगा। वहां पर बायो वैक्टिरिया डालकर सफाई की जाएगी। ट्रेट्री मशीन के जरिए शोधन से उपलब्ध जल का करीब 80 से 85 फीसद पीने योग्य बन जाएगा, जबकि 15-20 फीसद पानी सिंचाई योग्य बनेगा। इससे प्राकृतिक भूजल का दोहन भी कम होगा। यहां शोधन से टीडीएस भी बना रहेगा और लोगों को पानी पीने योग्य मिलेगा।

गंंगा में नहीं गिरेगा नाले का पानी

गंगा किनारे बसे भागलपुर में छोटे बड़े करीब 80 नालों का पानी गिरता है। हाल में ही नमामि गंगे व एनटीजी की टीम ने गंगा नदी के पानी का सैंपल लिया था। उसमें पता चला कि भागलपुर में गंगा में हानिकारक वैक्टिरिया की संख्या बढ़ रही है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस समस्या से निपटने के लिए प्लांट बनना शुरू हुआ है। दावा किया जा रहा है यह बिहार का पहला ऐसा प्लांट है, जहां से पीने योग्य पानी बनाने की व्यवस्था की जा रही है।  

एनजीटी के गाइडलाइन पर भागलपुर शहर के नालों से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन कर पीने योग्य बनाया जाएगा। इससे भागलपुर का जल संकट दूर होगा। - चंद्रभूषण, पीआरओ, (बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम)

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