इंजीनियर की नौकरी छोड़ बन गए बकरी पालन विशेषज्ञ, कम पूंजी वालों को दिया रोजगार, जानिए...

इंजीनियर संतोष कुमार बने बकरी पालन विशेषज्ञ।

कम पूंजी वाले बकरी पालकों के लिए बेहद किफायती बकरी शेड व नाद का मॉडल किया तैयार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान ने किया अनुशंसित। भागलपुर समेत बिहार झारखंड के किसानों और पशुपालकों को सिखा रहे व्यावसायिक बकरी पालन के गुर।

Dilip Kumar shuklaWed, 24 Feb 2021 08:20 AM (IST)

भागलपुर [नवनीत मिश्र]। दिल्ली की मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ संतोष कुमार बकरी पालन विशेषज्ञ बन गए। उन्होंने कम पूंजी वाले किसानों के लिए बेहद किफायती बकरी शेड व नाद का मॉडल तैयार किया है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान ने तकनीकी रूप से बेहतर मान अनुशंसित भी कर दिया है। इन दिनों कृषि प्रौद्योगिक प्रबंध अभिकरण (आत्मा) की ओर से वे भागलपुर समेत बिहार-झारखंड के विभिन्न जिलों के किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक और व्यावसायिक बकरी पालन के गुर सिखा रहे हैं। व्यावसायिक बकरी पालन के पूरे प्रोसेस को समझने के लिए संतोष ने कई केंद्रीय संस्थानों के साथ तमिलनाडू, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र के बकरी फॉर्म में जाकर गहन अध्ययन किया।

वर्ल्‍ड बैंक व विश्व बैंक भी मुरीद

व्यावसायिक बकरी पालन में विशेषज्ञता की वजह से संतोष के सुझाव के बाद पहली बार बकरी पालन पर सब्सिडी एवं पीपीआर टीकाकरण को राज्यव्यापी वार्षिक कार्यक्रम में शामिल किया है। भारत ही नहीं वल्र्ड बैंक व विश्व बैंक ने भी अपने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए इनसे सलाह लिया है।

धीरे-धीरे फलक पर कारोबार

संतोष चाहते हैं कि जैसे डेयरी, पॉल्ट्री और फिशरीज तीन-चार दशकों में एक बड़े इंडस्ट्री के रूप में स्थापित हो चुका है, उसी तरह बकरी पालन भी एक बड़े इंडस्ट्री का रूप ले ले। क्योंकि बकरी चराने की जगह धीरे-धीरे सिकुड़ती जा रही है। ऐसे में व्यवस्थित तरीके से व्यावसायिक बकरी पालन हो, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों के खासकर छोटे किसानों को प्रशिक्षण और अन्य सहयोग दे रहे हैं। इनका प्रयास है कि विभिन्न माध्यमों से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित व्यवसाय सुदृढ़ किया जाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को भरण-पोषण के लिए गांव-परिवार छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़े।

फीडिंग ट्रफ भी किया डिजाइन

व्यावसायिक बकरी पालन के लिए आधुनिक बकरी आवास और नाद की डिजाइन काफी महंगी है। कम पूंजी वाले छोटे और सीमांत किसान तो इसके बारे में सोच भी नहीं सकते। इसे सिर्फ वही अपना सकते हैं, जिनके पास पर्याप्त पूंजी हो। कम पूंजी वाले किसान इस व्यवसाय को कैसे अपनाएं, इसे लेकर संतोष काम कर रहें हैं। उन्होंने स्थानीय और ग्रामीण सामानों से बकरी शेड के साथ फीडिंग ट्रफ भी डिजाइन किया है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से न सिर्फ सभी मापदंडों को पूरा करता है, बल्कि कीमत भी बहुत कम है।

संतोष कहते हैं कि शहर का पैसा गांव में आए, ताकि गांव-देहात में रहने वाले भी समृद्व बन सकें।

दरवाजे पर खुद पहुंचते हैं खरीदार

बकरी पालन में अभी तक सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर और महिलाएं ही जुड़ी रहीं हैं। मूलत: शिवहर जिले के रहने वाले संतोष कुमार का कहना है कि परंपरागत रूप से की जा रही बकरी पालन पहले भी रोजगार की मुख्यधारा में नहीं रहा। दिनोंदिन सिकुड़ते व खत्म होते सार्वजनिक चारागाह की वजह से परंपरागत तरीके से बकरी पालन मुश्किल हो रहा है। मांसाहारियों के बीच बकरे की मांस अभी भी पसंदीदा है। मांग और पूर्ति के बीच के अंतर को पाटने के लिए वैकल्पिक विधि से बकरी पालन ही विकल्प है। बकरी की मार्केटिंग की चुनौती नहीं है। यही कारण है कि बकरी पालने वाले बकरा को बेचने के लिए बाजार नहीं जाते, बल्कि बाजार ही उनके दरवाजे तक आता है। छह महीने से लेकर दो साल तक के बकरे की बाजार में मांग है। इसमें जोखिम भी कम है।

दस लाख तक मिलता है अनुदान

बकरी पालन के लिए सरकार 50 फीसद तक अनुदान दे रही है। एससी-एसटी को 60 फीसद अनुदान मिलता है। दस से लेकर सौ बकरी का पालन किसान कर सकते हैं। सरकार की ओर से अधिकतम दस लाख रुपये तक अनुदान दिया जा रहा है। एससर-एसटी को 12 लाख रुपये तक अनुदान मिलता है। न्यूनतम दस बकरी व एक बकरा का पालन करने पर एक लाख रुपये अनुदान मिलता है। 20 बकरी व दो बकरा के लिए दो लाख, 40 बकरी व दो बकरा के लिए चार लाख और 100 बकरी व पांच बकरा के लिए दस लाख रुपये मिलता है।

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