भागलपुर नगर निगम: फर्जी ट्रेड लाइसेंस पर जिन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर, उन्हीं को मिल गया जांच का जिम्मा

Bhagalpur Municipal Corporation भागलपुर में जांच प्रक्रिया खुद जांच के घेरे में है। तीसरी बार गठित हुई कमेटी पांच माह में भी पूरी नहीं हो पाई जांच अब 10 अगस्त की टाइमलाइन। अपने समकक्ष की नहीं कर सकते जांच जिलास्तर से हो पहल।

Dilip Kumar ShuklaThu, 29 Jul 2021 11:15 AM (IST)
भागलपुर नगर निगम में जांच के नाम पर लापरवाही।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। नगर निगम के फर्जी ट्रेड लाइसेंस पर जिन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, उन्हीं को जांच का जिम्मा दे दिया गया है। ऐसे में नगर निगम की जांच प्रक्रिया खुद जांच के घेरे में आ गई है।

इससे पहले दो बार जांच कमेटी बनी और निरस्त हो गई। पांच माह बीत गए पर अभी तक जांच की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई है। जबकि निगम में प्रतिदिन फर्जी ट्रेड लाइसेंस के मामले पहुंच रहे हैं। अब तक निगम में 70 से अधिक फर्जी ट्रेड लाइसेंस मिल चुके हैं। इसकी फाइल भी तैयार कर ली गई है।

तीन वर्ष पहले भी मामला आया था सामने

तीन वर्ष पहले से फर्जी तरीके से ट्रेड लाइसेंस जारी करने का मामला सामने आ रहा था। लाइसेंस जारी करने के लिए 2500 रुपये शुल्क लेना था, पर दो हजार रुपये लिए गए थे।

जिलास्तर से जांच का सुझाव

तत्कालीन उपनगर आयुक्त सत्येंद्र वर्मा ने बिहार शरीफ नगर निगम में योगदान देने से पहले जून में दस्तोवजों को हैंडओवर कर दिया था। जांच से संबंधित फाइल पर उन्होंने लिखा कि ट्रेड लाइसेंस की जांच अपने समकक्ष के पदाधिकारी नहीं कर सकते। लिहाजा जिला स्तरीय या वरीय पदाधिकारी से जांच कराना उचित होगा। हालांकि इस पर अमल नहीं हुआ। 13 जुलाई को सत्येंद्र वर्मा को मुक्त कर सिटी मैनेजर समेत पांच सदस्यीय टीम को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उन्हें 10 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मुख्‍य बातें

- 02 बार जांच कमेटी बनी और हो गई निरस्त - 05 माह में भी पूरी नहीं हो पाई है जांच की कार्रवाई - 70 से अधिक फर्जी ट्रेड लाइसेंस मिल चुके अब तक, तैयार कर ली गई है फाइल - इनके हस्ताक्षर होने की चर्चा : उपनगर आयुक्त सत्येंद्र वर्मा, तत्कालीन उपनगर आयुक्त रीता कुमारी, सिटी मैनेजर रवीश वर्मा और शाखा प्रभारी नरेंद्र मिश्रा।

क्या कहा स्पष्टीकरण में

24 मार्च को स्मृति ने स्पष्टीकरण में कहा कि नवीनीकरण हेतु प्रस्तुत लाईसेंस फर्जी था। उसपर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात कही थी।

उन्होंने 30 अप्रैल को जांच दल को आदेश दिया कि पंजी, अभिलेख, पार्वती रसीद, कैश रजिस्टर और निर्गत लाइसेंस की जांच की जाए।

10 जून से अब तक

10 जून से अब तक 168 लाइसेंस निर्गत व नवीनीकरण हुआ है। 70 नए आवेदन भी मिले हैं। शहर में करीब छह हजार दुकानदार हैं। जिससे लाइसेंस मद से निगम को 25 लाख रुपये वार्षिक आय होती है। लाइसेंस निर्गत नहीं होने से 200 करोड़ का व्यापार प्रभावित हो रहा है।

क्या कहा पार्षदों ने

निगम के अफसरों की मिलीभगत से जांच को दबाया जा रहा है। जांच करने वाले खुद इस मामले में संदिग्ध हैं। नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। - हंसल सिंह, सशक्त स्थायी समिति सदस्य

जांच से पहले ही फाइल गायब होना निगम प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। डीएम के स्तर से मामले की जांच होनी चाहिए। दुर्भाग्य है जो इस मामले में संदिग्ध हैं, उन्हीं को जांच का जिम्मा दे दिया गया है। संविदा कर्मी सिटी मैनेजर से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं बनता। - उमर चांद, पार्षद

फर्जी ट्रेड लाइसेंस मामले की जांच की जिम्मेदारी जिन पदाधिकारियों को दी गई है, उनसे स्वच्छ जांच की उम्मीद नहीं है। भारी पैमाने पर गबन की संभावना है। निगम के बदले जिला पदाधिकारी के स्तर से जांच कराई जाए तो मामला सामने आएगा। - संजय कुमार सिन्हा, पार्षद

जिस विभाग में घटना हुई है उस विभाग के पदाधिकारी से जांच कराया जाना उचित नहीं है। इसके लिए जिला स्तरीय टीम गठित की जानी चाहिए। प्रमंडलीय आयुक्त को निगम से जवाब मांगनी चाहिए। - डा. प्रीति शेखर, पार्षद

समीक्षा बैठक के दौरान जिला मुख्यालय स्तर के पदाधिकारी से जांच कराने की मांग जिलाधिकारी से की गई है। निगम के स्तर से जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन इसमें भी लापरवाही बरती जा रही है। - सीमा साहा, मेयर

कोरोना संक्रमण के कारण थोड़ा विलंब हुआ। निर्धारित समय पर रिपोर्ट सौंपनी होगी।। इस रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई भी की जाएगी। - प्रफुल्ल चंद्र यादव, नगर आयुक्त

ट्रेड लाइसेंस और शिक्षा शाखा में पढ़े-लिखे लोगों की जरूरत है। यहां से मुझे हटा दिया जाए। मेयर व नगर आयुक्त से गुहार लगा चुके हैं। पर कोई नहीं सुन रहा। यह विभाग दलदल वाला है, इसलिए इससे निकलना चाहता हूं। - निरंजन मिश्रा, प्रभारी ट्रेड लाइसेंस व शिक्षा शाखा

निगम की आंतरिक जांच चल रही है। ट्रेड लाइसेंस में किसके हस्ताक्षर हैं, सत्यापन के बाद ही पता चल पाएगा। इससे पहले कुछ कहना उचित नहीं। - रवीश वर्मा, सिटी मैनेजर

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