भागलपुर जेल: बंदियों के हाथों तैयार मशरूम जल्द बिकेंगे बाजार में, कई कैदी इस विधा में है प्रवीण

भागलपुर जेल में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण पाकर कई कैदी प्रवीण हो गए हैं। मशरूम को बाजार देने के तमाम संसाधन जेल प्रशासन मुहैया कराएगा। उत्पादन का प्रशिक्षण पाकर दक्ष हुए कैदी कई अन्‍य कैदियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।

Dilip Kumar ShuklaWed, 20 Oct 2021 10:57 AM (IST)
भागलपुर जेेल में मशरूम का उत्‍पादन किया जा रहा है।

भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। जेलों की सलाखों में कैद बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए कारा मुख्यालय समय-समय पर उन्हें हुनरमंद बनाने को प्रशिक्षण सत्र शुरू कराती रही है। विशेष केंद्रीय कारा में बंद बंदियों को ऐसी ही योजना के तहत मशरूम और बर्मी कंपोस्ट तैयार कराने को न सिर्फ दक्ष बनाने का काम किया गया बल्कि अब उनके तैयार उत्पाद को बाजार देने की भी योजना का खाका तैयार किया जा रहा है। मशरूम और बर्मी कंपोस्ट तैयार करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर दक्ष बने बंदी अरुण मंडल, मंटू, अंजनी और राजकुमार ने जेल में मिले प्रशिक्षण के अनुरूप प्रायोगिक उत्पादन कर अपनी दक्षता दिखाई तो जेल प्रशासन ने उसे व्यावसायिक रूप देने की सोची। बंदी अरुण सजा काट कर अपनी दक्षता का इस्तेमाल अब अपने स्वजनों के साथ करने लगा है।

बंदी मंटू, अंजनी और राजकुमार अन्य चयनित बंदियों को इस विधा में प्रवीण बना रहे हैं। योजना के तहत 60 चयनित बंदियों को मशरूम और बर्मी कंपोस्ट तैयार करने में दक्ष बनाकर उनसे तैयार उत्पाद को बहुत जल्द बाजार दिया जाएगा। यानी बंदियों की तरफ से तैयार मशरूम और बर्मी कंपोस्ट बाजार से मिलने वाले आर्डर पर मुहैया कराया जाएगा। जेल अधीक्षक मनोज कुमार कहते हैं कि सबकुछ योजना के तहत मूर्त रूप लिया तो बहुत जल्द ही बंदियों की तरफ से तैयार मशरूम और बर्मी कंपोस्ट बाजार में आर्डर के मुताबिक उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह लक्ष्य है कि जेल जीवन के दौरान समाज की मुख्य धारा से कट चुके बंदी जब जेल की सजा काट कर बाहर निकलें तो उनकी ऐसी दक्षता उन्हें स्वावलंबी बनाने में फौरी तौर पर सहायक बने। अपनी दक्षता के बूते वह स्वरोजगार के जरिये अपने और अपने परिवार की जीविका चला सके।

तीन प्रकार के मशरूम तैयार होंगे जेल की द्वितीय खंड में

जेल प्रशासन योजना को मूर्त रूप देने का खाका तैयार कर लिया है। विशेष केंद्रीय कारा के द्वितीय खंड में तीन प्रकार के मशरूम तैयार करने की योजना है। इसके लिए तैयार प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही वृहत पैमाने पर इसका उत्पादन कर उसे बाजार दिया जा सकेगा। योजना के तहत बटन खुम्बी, धान के पुआल से तैयार पैडी स्ट्रा खुम्बी और पैरा खुम्बी का उत्पादन किया जाना है। उत्पाद को व्यावसायिक रूप देने के लिए पैरा मशरूम और बटन मशरूम की खेती को केंद्र में रखा गया है।

मुहैया कराए जाएंगे संसाधन

जेल प्रशासन जल्द ही मशरूम उत्पादन के लिए गेहूं, धान के भूसे और दानों के अलावा शेड, झोपड़ी और रैक मुहैया कराएगी। धान की पुआल और बांस से बने शेड भी बंदी ही तैयार करेंगे। योजना के मुताबिक सबकुछ सही रहा तो बहुत जल्द बंदियों के हाथों तैयार शेड, झोपड़ी और रैक पर कम लागत में तैयार मशरूम बाजार में होंगे। इन्ही बंदियों के हाथ तैयार बर्मी कंपोस्ट को भी बाजार में लाने की योजना है। इसके पूर्व बंदियों ने जेल के प्रथम खंड में आर्गेनिक पौधों की बगिया लगा कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां उस बगिया में उगाकर कोरोना काल में उसका लाभ इम्युनिटी बढ़ाने के रूप में ले चुके हैं।

कारा महानिरीक्षक स्तर पर बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती रही है। मशरूम उत्पादन में दक्ष बंदियों के उत्पाद को बाजार देने की हमारी योजना हैं। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जल्द बंदियों के उत्पाद आर्डर के मुताबिक बाजार में भी दिया जाएगा। - मनोज कुमार, अधीक्षक, विशेष केंद्रीय कारा, भागलपुर।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.