Bhagalpur double murder case : दो भाइयों की हत्‍या का मुख्य आरोपित विक्रम यादव गिरफ्तार, भारी मात्रा में नशीली दवा बरामद

Bhagalpur double murder case भागलपुर में दो सगे भाइयों की हत्‍या का मुख्‍य आरोपित विक्रम यादव पकड़ा गया। साथ ही उसकी निशानदेही पर कई जगहों पर छापेमारी की गई। इसमें हथियार के साथ साथ भारी मात्रा में नशीली दवा भी जब्‍त की गई।

Abhishek KumarFri, 30 Jul 2021 08:29 PM (IST)
भागलपुर में दो सगे भाइयों की हत्‍या का मुख्‍य आरोपित विक्रम यादव पकड़ा गया। सांकेतिक तस्‍वीर।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। नाथनगर अंचल के मधुसूदनपुर थानाक्षेत्र स्थित महाकाल ढाबे में 14 जुलाई 2021 को दिनदहाड़े हुई दो सगे भाइयों की हत्या में मुख्य आरोपित विक्रम यादव और जिंतेंद्र यादव गिरफ्तार कर लिया गया। दोनो को सिटी एएसपी पूरण झा के नेतृत्व में गिरफ्तार किया गया। शुक्रवार को टीम में शामिल नाथनगर इंस्पेक्टर सज्जाद आलम, हबीबपुर इंस्पेक्टर कृपा सागर, बबरगंज थानाध्यक्ष पवन कुमार सिंह, मधुसूदनपुर थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार और जिला सूचना इकाई प्रमारी कौशल भारती ने पुलिस बल के सहयोग शुक्रवार की दोपहर बाइपास इलाके से दबोचने में सफलता पाई।

गिरफ्तार विक्रम और जिंतेंद्र कि निशानदेही पर सदरुद्दीनचक से गुलाम सरवर को पुलिस टीम ने दबोच लिया। गुलाम सरवर को लेकर पुलिस बबरगंज थानाक्षेत्र के हुसैनाबाद मरकजी टोला स्थित घर पर छापेमारी की। वहां से एक पिस्टल, मैगजीन और दो बोरी अवैध नशीली दवा आदि बरामद किया गया। विक्रम और जिंतेंद्र सदरुद्दीनचक में छुपते थे। उनके लोकेशन पर पुलिस उन तमाम जगहों पर छापेमारी की। पुलिस की यह बड़ी सफलता मानी जा रही है।

नाथनगर अंचल के मधुसूदनपुर थानाक्षेत्र के किशनपुर बाइपास स्थित महाकाल ढाबे में 14 जुलाई को पुरानी रंजिश में दिनदहाड़े दो सगे भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वारदात को बदमाशों ने तब अंजाम दिया जब गोविंद यादव और राजकुमार यादव महाकाल ढाबा पर सोए हुए थे। दोनों के सिर और कनपटी में काफी नजदीक से बदमाशों ने निशाना बनाया गया था। गोली लगने के चंद मिनटों में ही उनकी मौत हो गई थी। घटना बाद बदमाश अपाचे और पल्सर बाइक पर सवार होकर भाग निकले थे। हत्या जिस समय हुई उस समय गोविंद और राजकुमार के अलावा उसके तीसरे सबसे छोटे भाई गुलशन भी ढाबे पर मौजूद था। उसने दोनों भाइयों की हत्या होते देख ढाबे में खाट की ओट में छिप गया कर सबकुछ सिसक-सिसक कर देखता रहा। हत्यारों में वि्क्रम यादव, विक्की यादव, विशुनदेव यादव, बमबम यादव, रितिक यादव, सुमन यादव, जिंतेंद्र उर्फ अरुण यादव शामिल थे। उसने देखा कि विक्रम यादव और जिंतेंद्र समेत अन्य ने कमर से पिस्तौल निकाल खाट पर सोए भाई को नजदीक से गोली मार दी। गोली लगते ही वह सहम कर खाट की ओट में हो गया था। थर-थर करते हत्या होते देखा था। मुंह से आवाज निकालते नहीं निकल रही थी। जब हत्यारे बाइक पर सवार होकर वहां से भाग निकले तब वह शोर मचाना शुरू किया था। चंद मिनटों में नाथनगर और मधुसूदनपुर की पुलिस मौके पर पहुंच गई। दोनों को खून से लथपथ हालत में जवाहर लाल नेहरू अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सकों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया था।

महाकाल ढाबे के स्वामित्व को लेकर था विवाद

दो सगे भाइयों की हत्या का कारण महाकाल ढाबा के स्वामित्व का विवाद सामने आया था। पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आ चुकी है। किशनपुर बाइपास के समीप सरकारी जमीन पर महाकाल ढाबा पहले मारे गए दोनों भाइयों के चाचा रामदेव यादव उर्फ रामू यादव ने खोला था। बाद में वह ढाबा अपने भतीजे गोविंद और राजकुमार को दे दी थी। दोनों ढाबा चला रहे थे। एक माह पूर्व बहन के विवाह के सिलसिले में ढाबा दोनों भाइयों ने बंद कर रखा था। दोनों भाइयों से ढाबा विक्रम यादव और उसके बहनोई ने संचालन के लिए ले लिया। ढाबा चलने लगा। मृतक के छोटे भाई गुलशन की माने तो विक्रम और उसके साथियों ने इलाके के कई प्लाटरों और अपने संपर्क और प्रभाव के बूते भीड़ जुटाने लगे थे।

शराब भी चोरी-छुपे पिलाई जाने लगी थी। ढाबा को चलता देख विक्रम को लालच हो गया था। इस बीच शादी से निवृत होने पर दोनो भाइयों ने ढाबा खुद चलाने की बात कही तो विक्रम ने मना कर दिया। कहा हम बहुत रकम लगाए हैं। तुम भी यहां काम करो। ढाबा फिर से वापस लेने को लेकर बुधवार को ही पंचायत होनी थी। सरकारी जमीन पर ढाबा था इसलिए दोनों भाई पुलिस की मदद भी नहीं ले सकते थे। विक्रम प्रभावशाली पड़ रहा था। पंचायत को लेकर सभी जुटे थे। लेकिन सुबह पंचायत नहीं हुआ। ढाबा पर बैठे-बैठे साे गए गोविंद और राजकुमार की हत्या की योजना पर पहले से ही विक्रम काम कर रहा था। जब ढाबा मिलने में देरी से दोनों भाइयों ने भी विक्रम के बारे में गाहे-बगाहे उसके लोगों को सुनाने लगे थे कि हम ढाबा का सुख नहीं भोगेंगे तो विक्रम को भी नहीं भोगने देंगे। कहा जा रहा है कि पहले से योजना बनाकर दोनों भाइयों को पंचायती के लिए बुलाया लेकिन सुबह पंचायत नहीं हुई। वहीं खाकर सोने लगे तभी हत्या को अंजाम दे विक्रम और उसके साथी भाग निकले थे। 

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