Black marketing of remdesivir: गिरोह में शामिल प्यादे गिरफ्तार, बजीर की तलाश में ठिठक रहे पांव

कोरोना काल में रेमडेसिविर की लगातार कालाबाजारी हो रही है।

Black marketing of remdesivir गिरफ्तार राहुल राज और पिंटू ठाकुर को पुलिस ने भेजा जेल एजेंट आलम और चंदन कुमार फरार। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में कइयों के हाथ काले। पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है।

Dilip Kumar ShuklaSat, 08 May 2021 10:20 AM (IST)

भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। Black marketing of  remdesivir: रेमडेसिविर की कालाबाजारी में कोरोना काल में लाखों का वारा-न्यारा करने वाले संगठित गिरोह में शामिल छोटे प्यादे राहुल राज और पिंटू ठाकुर गिरफ्तारी बाद शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गए लेकिन इनके बजीर पर हाथ डालने में औषधि विभाग और पुलिस पदाधिकारियों के पांव ठिठक रहे हैं। जिस मुकुल ट्रेडर्स के यहां पल्स हॉस्पिटल का डिमांड लेटर और वहां भर्ती मरीज के आधार कार्ड का हवाला दे रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने की जुगाड़ लगाने पिंटू पहुंचा था वह मुकुल ट्रेडर्स के संचालक विनय शंकर ठाकुर की निगाह में संदिग्ध लग गया था। विनय ने चंद मिनटों में ही स्थिति को भांप तुरंत अपने प्रतिष्ठान के अंदर ही कब्जे में ले लिया। फिर औषधि निरीक्षक और कोतवाली थाने को इसकी सूचना दी थी। सूचना के काफी देर बाद औषधि निरीक्षक दयानंद प्रसाद मुकुल ट्रेडर्स प्रतिष्ठान पहुंचे। उसके बाद कोतवाली पुलिस भी पहुंची थी। उसके बाद आनन-फानन में टीम गठित हुई। पल्स हॉस्पिटल में टीम पहुंची। औषधि निरीक्षक दयानंद प्रसाद और अनिल कुमार साह ने योजना बनाकर मैनेजर राहुल राज को अस्पताल से ही एक चिकित्सक से फोन करा इशाकचक से हॉस्पिटल बुलाया जहां उसे टीम ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों से औषधि विभाग की टीम और पुलिस पदाधिकारी पूछताछ करते रहे। पल्स के मैनेजर राहुल राज ने पूछताछ में इशाकचक थाना क्षेत्र के बरहपुरा निवासी मुहम्मद आलम उर्फ अलमा, बरारी थाना क्षेत्र के खंजरपुर स्थित डॉ. विकाश शर्मा की ओम न्यूरो साइंस के कर्मचारी पिंटू कुमार और चंदन कुमार की संलिप्तता की जानकारी दी। औषधि निरीक्षक दयानंद प्रसाद ने कोतवाली थानाध्यक्ष के नाम प्रतिवेदन दे गिरफ्तार राहुल राज, पिंटू कुमार के अलावा फरार आलम, चंदन कुमार और पल्स और ओम न्यूरो साइंस अस्पताल की भूमिका को जांच में संदिग्ध पाते हुए उपरोक्त व्यक्तियों और संस्थानों के विरुद्ध् ड्रग एण्ड कॉस्मेटिक एक्ट समेत अन्य कई संगीन आरोप में केस दर्ज कराया है। केस दर्ज कराने वाले औषधि निरीक्षक दयानंद प्रसाद ने जांच के क्रम में पल्स और ओम न्यूरो साइंस अस्पताल गए। दोनों जगहों के चंद कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध पाते हुए उन्हें नामजद बनाया। दोनों संस्थानों को भी आरोपित के रूप में सामने लाया लेकिन उनके संचालकों को नामजद आरोपित स्वयं नहीं बनाते हुए कोतवाली पुलिस के पाले में गेंद फेंक दिया है।

एक चिकित्सक से फोन कराने पर आसानी से हाथ लग गया राहुल

इसको लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चा फैल गई है। टोडरमल लेन स्थित मुकुल ट्रेडर्स से रेमडेसिविर की खरीद में गए पिंटू ठाकुर के बाद पल्स के मैनेजर राहुल राज को गिरफ्तार करने के लिए औषधि निरीक्षक ने एक चिकित्सक से फोन कराया था। पिंटू को मुकुल ट्रेडर्स के यहां भेजे जाने की जानकारी रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाले उस तगड़े नेटवर्क को पल-पल की थी। पल्स अस्पताल का मैनेजर राहुल राज उसी नेटवर्क का हिस्सा था। ऐसे में वह एक फोन पर पल्स अस्पताल तभी आ सकता था जब हालात सामान्य होने के संकेत मिले होंगे। हालांकि औषधि निरीक्षक दयानंद प्रसाद ने दर्ज केस में दोनों संस्थानों की भूमिका उजागर कर दी है। शुक्रवार को पुलिस दोनों संस्थानों में इस हाइप्रोफाइल केस में जांच को नहीं पहुंची। पूरे दिन जांचकर्ता दोनों गिरफ्तार आरोपितों की कोरोना जांच कराने, उसकी रिपोर्ट लेने और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने में ही गवां दी।

पिंटू को आलम ने कहा था तुम जाओ तो, दिक्कत होगी तो मुझसे या मैनेजर से बात करा देना

पल्स अस्पताल में छह मई 2021 को दिन में ही दम तोड़ चुके कोरोना मरीज नागेंद्र प्रसाद भगत नाम के व्यक्ति का आधार कार्ड एवं पल्स अस्पताल का डिमांड लेटर या जिसके नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन तीन वायल का आवंटन हुआ था। नागेंद्र बरारी रोड स्थित पल्स अस्पताल में ही भर्ती थे। योजना के तहत मृत व्यक्ति के नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन अलॉट कराकर उसे एजेंट के माध्यम से ऊंची कीमत पर कालाबाजारी करने की योजना थी। कोतवाली पुलिस की जांच में अभी और भी सच सामने आ सकता है। क्योंकि ऐसी योजना पर ये शातिर पहले भी काम कर चुके होंगे। कोतवाली पुलिस दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के लिए इसको लेकर शीघ्र न्यायालय में अर्जी देगी।

निजी अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीज के लिए नया स्टॉकिस्ट

सरकार स्तर पर रेमडेसिविर इंजेक्शन का डिमांड अस्पताल की तरफ से सरकार के दिए गए पोर्टल पर लिंक भेजा जाता था। जिसका अलाटमेंट पटना से होता था। अब औषधि नियंत्रण प्रशासन, भागलपुर ने इस संबंध में मुकुल ट्रेडर्स को स्टॉकिस्ट बनाया है। यह इंजेक्शन सरकारी दर पर उपलब्ध है और इसे गलत तरीके से अपनाकर ऊंची कीमत पर कालाबाजारी करने की योजना थी।

 

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