आदिवासियों का यह गांव, जहां से देश को दिया जाता है यह संदेश

बांका के इस गांव जहां रहते हैं ज्‍यादातर आदिवासी।

बांका के आदिवासी बस्तियां बांट रही स्वच्छता का संदेश। मिट्टी घर और सड़क पर हर दिन गोबर का लेपन। हर त्योहार और शादी-विवाह पर चलता सफाई का अभियान। आदिवासी बस्तियों का आर्थिक पिछड़ापन भी इसमें कभी बाधक नहीं बनता है।

Dilip Kumar shuklaTue, 02 Mar 2021 07:26 AM (IST)

बांका [डॉ राहुल कुमार]। सरकारें अब भले स्वच्छता अभियान का नारा दे रही हो, मगर बांका की दो सौ आदिवासी बस्तियां वर्षों से स्वच्छता का संदेश बांट रही है। इनका घर-आंगन से लेकर दरवाजा और सड़कों की सफाई देख आप दंग रह जाएंगे। किसी बस्ती में आईए गलियों की सफाई देख मन गदगद हो जाएगा। मिट्टी के घरों की ऐसी सफाई देख अभी आप मोबाइल सेल्फी का मौका भी नहीं चूकेंगे। आदिवासी बस्तियों का आर्थिक पिछड़ापन भी इसमें कभी बाधक नहीं बनता है। आदिवासी स्वच्छता को अपनी संस्कृति माने हुए हैं। बड़ी आदिवासी बस्ती ललमटिया, शोभापाथर, जयपुर, टेंगपांजा, दुधियातरी, कारीपथार, लीलावरण सब गांव का एक ही नजारा है। जिला आदिवासी सांस्कृतिक विकास मंच के अध्यक्ष जंबू हांसदा, उप सचिव शिवनारायण किस्कू आदि बताते हैं कि आदिवासी समाज प्रकृति का पुजारी रहा है। उसने गंदा रहना नहीं सीखा है। मानव इससे अपने को दूसरे जीवों से अलग करता है। अगर हम गंदगी के बीच रहते हैं तो फिर अन्य जीव और इंसान में क्या फर्क रहेगा। आपको किसी के घर खाने का अन्न भले नहीं मिले, लेकिन गंदगी तो नहीं ही मिलेगी। वह खुद साफ रहेगा और आसपास की जगहों को भी साफ रखेगा।

माटी के घरों में हर दिन गोबर का लेप

सामान्य तौर पर हर आदिवासी बस्ती में बड़े त्योहार सोहराय और दीपावली पर हर साल घर की विशेष साफ-सफाई और कलाकारी का काम होता है। इसके अलावा किसी घर में शादी-विवाह या किसी और उत्सव पर भी सफाई का अभियान चलता है। इस दौरान जंगल-पहाड़ से ही रंग-बिरंग की मिट्टी लाकर घर दीवारों और देहरी को चमकाया जाता है। सामान्य गांवों में सार्वजनिक सड़क या गलियां अक्सर गंदगी का शिकार रहती है। लेकिन आदिवासी बस्ती में हर घर अपने सामने के सार्वजनिक स्थान की साफ सफाई रखता है। अगर घर के सामने सड़क है तो वे अपनी देहरी के साथ पक्की पीसीसी सड़क को भी गोबर से लीप का सुदंर और स्वच्छ बनाता है।

नाला और मवेशी की गंदगी का खास इंतजाम

सामान्य बस्तियों में घर के नाला का पानी सड़कों की ओर निकलता है। पर आदिवासी गंदगी से बचने के लिए नाला को घर के पिछले हिस्से या दूर निकालते हैं। सड़क पर कारगर नाला की सुविधा रहने पर ही पानी बाहर निकलता है। इसी तरह अधिकांश आदिवासी परिवार पशुपालन भी करता है। इसके बावजूद उसके घर के आगे गंदगी नहीं दिखती है। अगर सड़क पर मवेशी बांधी जा रही है तो इसकी गंदगी प्रबंधन का इंतजाम होता है।

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