AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष केंद्र पर उठाए सवाल, असदुद्दीन ओवैसी के आवास पर हुए पथराव को लेकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने असदुद्दीन ओवैसी के दिल्ली के सरकारी आवास पर हुए पथराव की निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया है।

Shivam BajpaiSat, 25 Sep 2021 09:08 AM (IST)
AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्ली आवास पर हुए हमले की निंदा की।

संवाद सहयोगी, किशनगंज। एआइएमआइएम (AIMIM) हमेशा दलित, शोषित और पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक और अधिकार के लिए संघर्ष करता रहता है, लेकिन कई पार्टी के लोगों को इससे नाराजगी है। इसी का परिणाम है कि एआइएमआइएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के सरकारी आवास पर पथराव किया गया। यह बातें शुक्रवार को एआइएमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने लहरा स्थित कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि एआइएमआइएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक प्रखर नेता होने के साथ कुशल वक्ता भी हैं। हमेशा ही दलित, शोषित और पिछड़ों, अल्पसंख्यकों सहित सभी जाति के लोगों के लिए सड़क से लेकर संसद तक आवाज बुलंद करते रहे हैं। इसी का परिणाम है कि उन्हें संसद द्वारा संसद रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। देश की राजधानी दिल्ली में उनके आवास पर जिस तरह से पथराव किया गया। जहां की कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से केंद्र सरकार के अधीन होती है। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो। इसके लिए राष्ट्रपति को भी ज्ञापन भेजा गया है। इस दौरान मुख्य रूप से कोचाधामन विधायक इजहार अशफी और जिलाध्यक्ष इशहाक आलम मौजूद रहे।

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दिल्ली में सरकारी आवास पर पथराव

बुधवार को असदुद्दीन ओवैसी के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में तोड़फोड़ की गई। इस दौरान पथराव भी किया गया। मामले में पांच की गिरफ्तारी की गई है। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इधर ओवैसी ने जान का खतरा बताते हुए अतिरिक्त सुरक्षा की मांग भी की है। हैदराबाद सांसद के सरकारी आवास पर हुए हमले के बाद बिहार AIMIM नेता और विधायक लगातार इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को ओवैसी ने पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित बंगले पर हुई तोड़फोड़ के बाद उनकी जान को खतरा है। ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए। साथ ही घर पर हुए हमले की जांच संसद की विशेषाधिकार कमेटी को दी जाए।

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