शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले

शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले

बेगूसराय एक मार्च का दिन बखरी के लिए खास है। इसी दिन बखरी की माटी के लाल पिटू सिंह ने आ

JagranSun, 28 Feb 2021 09:10 PM (IST)

बेगूसराय : एक मार्च का दिन बखरी के लिए खास है। इसी दिन बखरी की माटी के लाल पिटू सिंह ने आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। सोमवार को कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद पिटू के गांव बगरस ध्यानचक्की में क्षेत्र की जनता अपने वीर सपूत के दूसरे शहादत दिवस पर ''''शौर्य नमन'''' श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। इसमें कई कार्यक्रम आयोजित हैं। शौर्य नमन कार्यक्रम में सामाजिक साहित्यिक संस्था अभिनव पहल के द्वारा शहादत एवं शौर्य पर विचार गोष्ठी, सम्मान समारोह, देशभक्ति पर आधारित गीतों, प्रहसन एवं पौधारोपण आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जबकि पीएचसी बखरी के द्वारा स्वास्थ्य शिविर, प्रखंड कार्यालय के द्वारा वृद्धावस्था पेंशन शिविर आदि का भी आयोजन किया गया है। साथ में हवन यज्ञ भी आयोजित है। उक्त जानकारी स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शहीद के भाई मिथिलेश सिंह, जितेंद्र जीतू, अभिनव पहल के अध्यक्ष प्रमोद केशरी एवं कार्यक्रम समन्वयक बसंत कुमार एवं अभिषेक राजन ने दी।

मालूम हो कि नौ जुलाई 1984 को बखरी के बगरस ध्यानचक्की गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए पिटू अपने पांच भाईयों में सबसे छोटा, सबका दुलारा और प्यारा था। बचपन से ही वह अदम्य साहसी और राष्ट्र सेवा कूट कूटकर भरी हुई थी। राष्ट्र कर्तव्य से ओतप्रोत पिटू 2009 में सीआरपीएफ में बतौर इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे। एक मार्च 2019 को कश्मीर के हंदवाड़ा में अपनी उसी वीरता और देश कर्तव्य का परिचय देते हुए सीआरपीएफ जवान पिटू ने देश के दुश्मन आतंकियों से डटकर मुकाबला किया और तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। परंतु, सर्च आउट के क्रम में वे आतंकियों की गोली का शिकार हुए तथा देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। पिटू की इसी वीरता को सलाम करते हुए 26 जनवरी 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने उन्हें कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया है।

दो वर्ष में भी मुख्यमंत्री के आदेश पर नहीं हुआ अमल

शहीदों और उनके स्वजनों के प्रति सिस्टम की उपेक्षापूर्ण नीति को दर्शाता है। देश के वीर जवानों की शहादत के समय सरकार और उसका तंत्र खूब आंसू बहाता और बड़ी बड़ी घोषणाएं करता है। परंतु, समय बीतने के साथ-साथ उक्त घोषणाएं किसी को याद नहीं रहती। बखरी के वीर सपूत पिटू की शहादत के समय भी सरकार ने उनके स्वजनों की सुख सुविधाओं तथा गांव के विकास की अनेकों घोषणाएं की थी। उस समय भारी लाव-लश्कर के साथ शहीद के घर श्रद्धांजलि देने पहुंचे सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद की स्थिति के मद्देनजर उनके चारों किसान भाइयों को आवास सुविधा मुहैया कराने का निर्देश अपने अमलों को दिया था। साथ ही गांव के चौक पर गोलंबर के निर्माण तथा शहीद की आदमकद प्रतिमा की स्थापना की बात कही गई थी। मौके पर उस समय प्रमंडलीय आयुक्त, डीआइजी मनू महाराज, जिला के डीएम, एसपी समेत अनुमंडल के सभी अधिकारी मौजूद थे। परंतु, शहादत के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो बगरस ध्यानचक्की गांव की सूरत बदली और न ही पिटू के स्वजनों को किसी तरह की अतिरिक्त सहूलियत ही नसीब हुई। नतीजा, शहीद के चारों भाई अमरेश प्रसाद सिंह, मिथिलेश प्रसाद सिंह, इंद्रेश प्रसाद सिंह और मनीष प्रसाद सिंह आज भी उसी ईंट के जीर्ण-शीर्ण खपरैल तथा फूस के मकान में गुजारा करने को विवश हैं। गांव की टूटी-फूटी सड़कों पर ग्रामीण आज भी धूल फांक रहे हैं। न कहीं गोलंबर है और न शहीद की आदमकद प्रतिमा। हां, गांव के प्रवेश द्वार पर मुख्य सड़क किनारे स्थानीय विधान पार्षद रजनीश सिंह ने अपने निजी कोष से अमर शहीद पिटू सिंह स्मृति द्वार का निर्माण कराकर उन्हें सम्मान देने का काम जरूर किया है। शहीद के भाई मिथिलेश सिंह बताते हैं कि आवास तो दूर, उन भाइयों को सरकार की ओर से एक अदद शौचालय तक नहीं दिया गया। प्रखंड में इस संबंध में उनकी कोई नहीं सुनता। शौचालय के अभाव में घर की महिला और पुरुष की परेशानियों का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अपने शहीद और दुलारे भाई को याद करते हुए मिथिलेश ने डबडबाई आंखों से बताया कि किसी भाई के नाम राशन कार्ड तक नहीं था। लगातार ब्लॉक का चक्कर काटने के बाद राशन कार्ड तो मिला, मगर वह भी त्रुटियों से भरा है। किसी राशन कार्ड में फोटो दूसरे का लगा हुआ है तो किसी में घर के आधे से अधिक सदस्यों का नाम ही गायब है। हालांकि उन्होंने सरकारी मुआवजे तथा शहीद की विधवा को सरकारी नौकरी मिलने की बात कही है। बहरहाल गांव के राम सुरेश सहनी, उमेश गोस्वामी, अमर गोस्वामी, रामनाथ सहनी, सुनील सहनी, रंजीत महतो, राजकिशोर महतो, रामू महतो आदि ग्रामीणों ने बखरी में पिटू के नाम पर डिग्री कॉलेज की स्थापना, बगरस चौक का नाम पिटू के नाम पर करने तथा वहां गोलंबर का निर्माण कर उसमें पिटू की आदमकद प्रतिमा की स्थापना करने की मांग सरकार से की है।

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