अस्पतालों के बाहर और सड़कों पर घूम-घूमकर बांट रहे हैं भोजन

बेगूसराय एक आयुर्वेदिक दवा कंपनी के सौजन्य से लॉकडाउन के इस अवधि में बेसहारा और सरक

JagranFri, 07 May 2021 09:25 PM (IST)
अस्पतालों के बाहर और सड़कों पर घूम-घूमकर बांट रहे हैं भोजन

बेगूसराय : एक आयुर्वेदिक दवा कंपनी के सौजन्य से लॉकडाउन के इस अवधि में बेसहारा और सरकारी अस्पतालों के मरीजों के साथ-साथ उनके अभिभावकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। चार पहिया वाहन से पांच सदस्यीय टीम दिन भर सड़कों पर चक्कर काटती और जरूरतमंदों को भोजन का पैकेट बांटती है। शुक्रवार को यह टीम सदर अस्पताल बेगूसराय पहुंची।

टीम में शामिल सूरज कुमार, सज्जन कुमार, संजीव कुमार, नवीन साह, राज कुमार, शिव कुमार, राज कुमार राय आदि ने बताया कि आयुर्वेद की फील्ड में प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी द्वारा कोरोना काल में जरूरतमंदों की सहायता के लिए रोज निशुल्क भोजन का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है। कंपनी ने एक साथ देश के 19 शहरों में यह कार्य आरंभ किया है। इसके तहत कंपनी तीन लाख जरूरतमंदों को रोजाना भोजन उपलब्ध करा रही है। कंपनी के सीईओ और एमडी संजीव कुमार का मानना है कि लॉकडाउन हो जाने के कारण अपने मरीजों के साथ आए अभिभावकों को भोजन की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। अस्पतालों में मरीजों को तो खाना मिल जाता है, मगर बाहर रहने वाले उनके अभिभावकों को भोजन की किल्लत होती है। भोजनालय बंद हैं, सामुदायिक किचन का पता जानकर वहां पहुंचने में उन्हें काफी परेशानी होती है। ऐसी में कंपनी की टीम उनके पास पहुंचकर उन्हें भोजन मुहैया कराए। इसी के तहत अगले दस दिनों तक यह कार्य पूरे शहर में चलता रहेगा।

शवयात्रा में तय संख्या से अधिक लोगों को जाने से स्वजनों ने रोका

बेगूसराय : कोरोना ने जीवन शैली को बदल कर रख दिया है। सरकार द्वारा जिदगी बचाने एवं कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए मांगलिक कार्य, शव यात्रा, श्राद्धकर्म आदि में भाग लेने वालों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। ताकि संक्रमण पर रोक गाई जा सके। ऐसी ही एक तस्वीर बेगूसराय जिले के मंझौल से सामने आई है।

मंझौल अनुमंडल मुख्यालय स्थित सत्यारा चौक से निकलकर एसएच 55 होते हुए बूढ़ी गंडक नदी के सिउरी राजघाट जा रही एक शव यात्रा में तय नियम के मुताबिक करीब 20 लोग ही शामिल हुए। बताते चलें कि मंझौल सत्यारा चौक निवासी लगभग 80 वर्षीय नंदू सहनी का देहांत गुरुवार की बीती रात हो गई। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने बताया कि आसपास के गांव मोहल्ले के काफी लोग इनके अंतिम यात्रा में शामिल होना चाह रहे थे। परंतु, स्वजन ने सरकार की गाइडलाइन का हवाला देकर तय संख्या से अधिक लोगों को साथ चलने की अनुमति नहीं दी।

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