50 हजार की आबादी पर एक बेड, न दवा है न पानी

बेगूसराय एक तरफ सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वाकां

JagranTue, 03 Aug 2021 05:19 PM (IST)
50 हजार की आबादी पर एक बेड, न दवा है न पानी

बेगूसराय : एक तरफ सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, परंतु चमथा स्वास्थ्य उपकेंद्र का हाल बेहाल है। आक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की बात तो दूर, यहां न तो बेड, दवा और न ही एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए यहां की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र में नहीं हैं दवाएं

चमथा स्वास्थ्य उपकेंद्र की हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। बछवाड़ा प्रखंड की चमथा पंचायत-दो स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र भगवान भरोसे चल रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि स्वास्थ्य उपकेंद्र का दवा वितरण कक्ष खाली पड़ा है। दवाओं का अभाव है। यहां सामान्य स्वास्थ्य सेवा के लिए भी उपयोगी दवाओं के साथ कोरोना में दी जाने वाली महत्वपूर्ण दवाएं जैसे एजिथ्रोमाइसिन, पारासिटामोल, विटामिन-सी, आयरन, कैल्शियम जैसी दवाएं भी उपलब्धता नहीं है। लोगों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ती है। मात्र एक बेड है उपलब्ध

चमथा दियारा की पांच पंचायतों की 50 हजार की आबादी के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र में सिर्फ एक बेड उपलब्ध है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से मुकाबला कैसे होगा। इसकी आशंका लोगों को सता रही है। चमथा के लोगों को स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। स्थानीय चंदन कुमार, किरचन राय, महेश राय, सन्नी कुमार, मोनू कुमार आदि ने प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों से जल्द से जल्द उप स्वास्थ्य केंद्र को सुचारू रूप से चालू करवाने की मांग की है। इलाज के लिए जाना पड़ता है 15 किलोमीटर दूर बछवाड़ा पीएचसी

मालूम हो कि चमथा लगभग 20 वर्ग किलोमीटर के पांच पंचायतों चमथा-एक, दो, तीन, विशनपुर एवं दादुपुर में फैला है। ऐसे में बड़खूंट, संझापुर, छोटखूंट, लक्ष्मणटोल, बालुपर, चक्की, चिरैयाटोक, नंबर आदि जगहों के लगभग 50 हजार लोग इस अस्पताल पर आश्रित हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पांच साल पहले एक एंबुलेंस थी। परंतु, यहां से उसे हटा लिया गया। सुविधा नहीं रहने के कारण लोगों को 15 किलोमीटर दूर स्थित बछवाड़ा पीएचसी इलाज के लिए जाना पड़ता है। लोगों को आपातकालीन स्थिति में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। कई अभावग्रस्त लोग समय से इलाज नहीं मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं। स्वास्थ्य उपकेंद्र में नहीं है पीने के पानी की व्यवस्था

बताते चलें कि स्वास्थ्य उपकेंद्र परिसर में लगी एकमात्र चापाकल मरम्मत के अभाव में लंबे समय से बेकार पड़ा है। इससे मरीजों को पानी पीने एवं अस्पताल को साफ-सुथरा करने में भी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों के घरों से पानी मंगवा कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। कभी-कभी पड़ोस के लोग भी पानी देने में कतराते हैं तो स्वास्थ्य कर्मी और मरीज सकते में पड़ जाते हैं। विभाग के पदाधिकारी इसकी सुधि लेना मुनासिब नहीं समझते हैं।

स्थानीय ग्रामीण चंदन कुमार बताते हैं कि डॉक्टर साहब भी समय पर नहीं आते हैं। यहां इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद डाक्टर हर रोज उपस्थित नहीं रहते हैं। यहां न कोई इमरजेंसी सेवा है और न ही रात्रि में डॉक्टर की ड्यूटी ही है। अगर किसी व्यक्ति की हालत रात्रि में बिगड़ती है तो उसे बछवाड़ा पीएचसी जाना पड़ता है।

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कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे वारियर्स

संवाद सहयोगी, लाखो (बेगूसराय) : कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत एसडब्ल्यूएफ हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट अमन कांप्लेक्स लाखो में प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सोमवार को सेंटर संचालक प्रमोद कुमार ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस इंस्टीट्यूट में 160 प्रशिक्षुओं को 21 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 59 प्रशिक्षुओं को सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ऐसे व्यक्ति जो मेडिकल क्षेत्र में पूर्व से प्रशिक्षण ले चुके हैं, लेकिन उनके पास प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र नही है, वैसे व्यक्ति को आपातकालीन चिकित्सा सहायक का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रशिक्षण ले रहे 160 प्रशिक्षुओं को दो कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें जेनरल ड्यूटी असिस्टेंट एवं इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन शामिल हैं। 21 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुओं को 90 दिनों के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण बेगूसराय के विभिन्न पीएचसी एवं सरकार द्वारा उपलब्ध चिकित्सा संस्थान में प्रशिक्षण दिया जाएगा। मौके पर प्रशिक्षक डा. रमन कुमार, डा. कुमारी नेहा, डा. मुकेश कुमार, डा. पीके शर्मा, डा. अमित गौतम आदि मौजूद थे।

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