आस्था का केंद्र बना मोतीहाट का चैती दुर्गा मंदिर

आस्था का केंद्र बना मोतीहाट का चैती दुर्गा मंदिर

बांका। मंदार की तलहटी में स्थित मोतीहाट का दुर्गा मंदिर जमींदारी प्रथा के समय से ही अपनी दैवीय शक्ति और भक्ति के लिए लोक आस्था का केंद्र रहा है।

JagranThu, 15 Apr 2021 11:00 PM (IST)

बांका। मंदार की तलहटी में स्थित मोतीहाट का दुर्गा मंदिर जमींदारी प्रथा के समय से ही अपनी दैवीय शक्ति और भक्ति के लिए लोक आस्था का केंद्र रहा है।

इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति से जुड़ी है। वासंती नवरात्र पर यहां वर्षों से चली आ रही मां आदिशक्ति की पूजा अर्चना व सप्तसती पाठ के साथ होने वाले नाटक के मंचन की परंपरा आज भी जीवंत है। पर कोरोला काल के कारण पिछले साल की तरह इस साल भी समारोह पर ग्राहण लग गया है।

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इतिहास:

मोतीहाट दुर्गा मंदिर का इतिहास सौ साल से भी पुराना है। इस मंदिर का निर्माण सबलपुर ड्योडी के जमींदार कालिका सिह ने किया था। उन्होंने ही मां दुर्गा पूजा की शुरुआत कराई थी। जिसे उसके वंशजों ने कई साल तक निभाई। लेकिन जमींदारी प्रथा खत्म होने के बाद यहां की जमीन को देवघर के व्यवसायी तिलक चंद बादला ने खरीद ली। इसके बाद उनके द्वारा ही यहां पूजा व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाने लगा। लेकिन उनके द्वारा यहां की जमीन बेच दिए जाने के बाद पिछले पांच साल से मंदिर में चैती दुर्गा पूजा की कमान पूर्णिया के ओम प्रकाश सिंह ने संभाल रखी है।

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मुख्य आकर्षण:

भागलपुर-हंसडीहा मुख्य मार्ग पर मोतीहाट में स्थित चैती दुर्गा मंदिर में पूरे विधि विधान से मां की उपासना श्रद्धालुओं को आध्यात्म से जोड़ता है। साथ ही वर्षों से यहां के स्थानीय लोगों द्वारा किए जाने वाले नाटक मंचन की परंपरा आज भी चली आ रही है। कहा जाता है कि सच्चे मन से मन्नतें मांगने पर सभी मुरादें पूरी होती है।

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