2.43 करोड़ की योजना के बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा पानी

बांका। बटसार पंचायत के भुसार गांव में निर्मित जलमीनार का पानी बलमचक गांव नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में निराशा है। विश्व बैंक ने दो करोड़ 43 लाख की लागत से तालाब के पास जलमीनार बनाया है।

JagranSat, 19 Jun 2021 09:33 PM (IST)
2.43 करोड़ की योजना के बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिल रहा पानी

बांका। बटसार पंचायत के भुसार गांव में निर्मित जलमीनार का पानी बलमचक गांव नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में निराशा है। विश्व बैंक ने दो करोड़ 43 लाख की लागत से तालाब के पास जलमीनार बनाया है। इससे भुसार सहित चार गांव नंदगोला, लौगाय और बलमचक तक पानी पहुंचाने की योजना है। पर बलमचक गांव की दूरी जलमीनार से एक किलोमीटर होने के कारण वहां सैकड़ो घरों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीणों ने कहा कि नीर निर्मल परियोजना से पानी की सप्लाई की गई। पर कई महीने बाद भी पानी पीने का सपना गावों वालों का साकार नहीं हो पाया है। जिससें वार्ड संख्या छह बलमचक गांव में पानी चालू होने दो महीने बाद भी कुशवाहा टोला में पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच पाई है। जिससें ग्रामीणों में विभाग के प्रति आक्रोश है। ग्रामीण महिला जयमाला देवी, रेखा देवी, मंजू देवी, रेणू देवी, उषा देवी, आशा देवी, पार्वती देवी, निक्कू देवी, प्रियंका देवी सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि बलमगांव गांव में दो टोलो हैं। जिसमें कुशवाहा टोला में पानी की किल्लत है। करीब डेढ़ सौ घर वाले इस टोले में पानी पीने के नाम पर एक सरकारी चापानल है। ग्रामीणों ने बताया कि पाईप चार इंच की जगह ढाई इंच का बिछाया गया है। गांव तक बिछाई गई पाईप भी जगह जगह लीकेज है। इस कारण पानी नहीं पहुंच रहा है। इधर, मुखिया रजनीश कुमार ने बताया कि संवेदक व पीएचईडी विभाग को ग्रामीणों के समक्ष उत्पन्न पेयजल समस्या से अवगत करा दिया गया है। दो दिनों में समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में पहल नहीं किया गया है। पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता राजीव रंजन लाल ने बताया कि कोरोना को लेकर सभी कर्मी परेशान हैं। एक सप्ताह के अंदर इन सारी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा।

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