महज आठ चिकित्सकों के भरोसे 30 बेड वाले अस्पताल का चल रहा काम

बांका। कोल्हासार पंचायत में मनरेगा के 47 लाख गबन मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार चार आरोपित जेल भेज दिया गया। इस पंचायत में पंचायत समिति की संचालित 13 योजनाओं में मिली अनियमितता में गुरुवार को पूछताछ के लिए कटोरिया में कार्यरत तत्कालीन पीआरएस नरेश दास तत्कालीन अकाउंटेंट अभिषेक दुबे एवं वर्तमान अकाउंटेंट अशफाक अहमद एवं कोल्हासार पंचायत के वेंडर शिव नारायण यादव को समाहरणालय बुलाया गया था।

JagranFri, 22 Oct 2021 10:12 PM (IST)
महज आठ चिकित्सकों के भरोसे 30 बेड वाले अस्पताल का चल रहा काम

अभियान

22बीएन 1,2

-03 लाख की आबादी का इलाज कर रहे आठ चिकित्सक

-150 मरीजों का प्रतिदिन हो रहा इलाज

-20 वर्षो से ड्रेसर व कंपाडर की कमी से जूझ रहा अस्पताल

संसू, धोरैया (बांका) :

बांका। वर्षो से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के बाद भी चिकित्सकों की कमी को पूरा नहीं किया गया है। जबकि, कोरोना ने यहां के एक होनहार चिकित्सक को दुनिया से छीनकर बड़ा झटका दिया है।

करीब तीन लाख की आबादी वाले इस अस्पताल में 20 वर्षों से ड्रेसर एवं कंपाउंडर का पद रिक्त हैं। इस कारण मरीजों के जख्मों पर कार्यालय सहायक मरहम पट्टी लगाते हैं। यहां आठ चिकित्सक के भरोसे 30 बेड का अस्पताल चल रहा है। एक सौ वर्ष से भी अधिक पुराने इस अस्पताल में एएनएम के साथ -साथ ड्रेसर, कंपाउंडर की घोर कमी है। ब्लड बैंक की कोई व्यवस्था नहीं रहने से प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत होना आम बात है।

इस अस्पताल में ओपीडी में 38 आईपीडी में 54 प्रकार की दवा उपलब्ध हैं, लेकिन खांसी, पेट दर्द विटामिन, बच्चों के लिए पैरासिटामोल सिरप आदि उपलब्ध नहीं है। मरीज राजेश ने बताया कि इस कारण बाहर लाना मरीजों की मजबूरी है। झारखंड राज्य की सीमा करीब तीन से चार किलोमीटर दूर होने के कारण वहां के भी मरीजों की काफी भीड़ होती है।

अस्पताल में मौजूद चिकित्सक डा आफताब आलम ने बताया कि इन दिनों मौसम में परिव‌र्त्तन के कारण सर्दी खासी बुखार से पीड़ित करीब डेढ़ सौ मरीज प्रतिदिन आते हैं। एएनएम के भी डेढ़ दर्जन पद रिक्त रहने से गांव के उपकेंद्रों पर ताला लटका रहता है। जिससें साप्ताहिक टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। आपरेशन थियेटर की व्यवस्था तो बहुत अच्छी है। कोरोना काल में चिकित्सक डा प्रेमराज बहादुर के आकस्मिक निधन हो जाने से यहां एक भी सर्जन चिकित्सक नहीं है। ब्लड बैंक की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण प्रसव के दौरान महिलाओं के समक्ष समस्या होती है। स्थानीय लोगों की मानें तो दुर्घटना में जख्मी लोगों को अस्पताल लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे अविलंब रेफर कर दिया जाता है। जबकि यहां आपरेशन, आक्सीजन, एक्सरे एम्बुलेंस की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सक की कमी के कारण समस्या बनी हुई है। कुछ चिकित्सक के गोड्डा एवं भागलपुर से आना जाना होता है।

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अस्पताल में बेड की संख्या : 30

चिकित्सक के पद : 12, रिक्त : 04

एएनएम के पद : 50, रिक्त : 18

हेल्थ मैनेजर : 01 रिक्त

ड्रेसर के पद : 01, रिक्त

कम्पाउंडर के पद : 01 रिक्त

लैब टेक्नीशियन पद :0 1 रिक्त

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कोट

अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के बाद भी मरीजों को 24 घंटे बेहतर सुविधा का लाभ देने का प्रयास किया जाता है। समस्याओं को लेकर वरीय अधिकारी के साथ साथ सांसद विधायक को भी निरीक्षण के दौरान अवगत कराया गया है। ओपीडी में 38 प्रकार आईपीडी में 54 तरह की दवा उपलब्ध है। कुछ एमरजेंसी दवा की लिस्ट तैयार का निर्देश दिया गया है।

डा. श्यामसुंदर दास, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

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