किनारा लगा गैस चूल्हा, जंगल में पत्ता बटोरने का मेला

किनारा लगा गैस चूल्हा, जंगल में पत्ता बटोरने का मेला

बांका। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी क्या हुई गांवों में परंपरागत चूल्हा फिर सुलग गया।

JagranFri, 05 Mar 2021 09:27 PM (IST)

बांका। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी क्या हुई, गांवों में परंपरागत चूल्हा फिर सुलग गया। लाभुकों ने चूल्हा और सिलेंडर को घर के किसी कोना में शोभा का वस्तु बना दिया है। अभी महिलाओं का झुंड जंगल में आए पतझड़ का लाभ लेकर पत्ता बटोर घर के चूल्हे का इंतजाम कर रही है। सुबह होते ही जंगल में जुटी महिलाओं की भीड़ रसोई गैस पर छाई महंगाई की कहानी कह रही है। इस बदलाव की झलक केवल जंगल और गरीबों की झोपड़ी में ही नहीं दिख रही है बल्कि, गैस एजेंसी का डाटा भी पूरी तरह उलट गया है। हालत यह है कि जिला में एक लाख 65 हजार उज्जवला कनेक्शन वाले परिवार में अभी 25 हजार कनेक्शन का भी हर महीने सिलंडर नहीं उठ रहा है। नाढ़ा पहाड़ जंगल में पत्ता जमा कर रही महिलाओं ने बताया कि उसमें सब को कनेक्शन नहीं है। जिसको है उसके लिए गैस खरीदने के लिए 900 रुपये जुगाड़ करना मुश्किल काम है। ओढ़नी डैम के पास जंगल से पत्ता बुहार रही महिलाओं ने बताया कि उसके टोले में सब को गैस कनेक्शन मिला है। लेकिन इतना महंगा गैस खरीद कर खाना बनाना किसी के बूते में नहीं है। जब सरकार फ्री में देगा तो देखेंगे।

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लॉकडाउन में मुफ्त उठ गया तीनों सिलंडर

उज्जवला कनेक्शन से सिलेंडर उठाव का आंकड़ा कोरोना से पहले भी काफी खराब रहा है। हां, लॉकडाउन में जब सरकार ने तीन मुफ्त सिलंडर की घोषणा की तो 1.65 लाख कनेक्शन में डेढ़ लाख से अधिक लाभुकों ने तीनों सिलंडर उठाकर खपत कर लिया। इसके बाद सिलंडर की कीमतों में लगातार इजाफा जारी है। दाम बढ़ने के साथ ही उठाव का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है। शीला इंडेन के संचालक राजेश कुमार साहा ने बताया कि उज्जवला कनेक्शन के उठाव की स्थिति बिल्कुल खराब है। अभी उनके पास 17 हजार कनेक्शन में हर महीने दो हजार भी सिलंडर नहीं उठ रहा है। एचपीसीएल एजेंसी के संचालक राहुल कुमार डोकानियां ने बताया कीमत बढ़ने के बाद उज्जवला कनेक्शन का उठाव लगभग बंद है।

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अभी उज्ज्वला कनेक्शन का 20 फीसद भी महीने में गैस नहीं उठा रहा है। इसका सटीक आंकड़ा संग्रह नहीं हो रहा है। लॉकडाउन में हमलोगों ने 1.65 लाख कनेक्शन में अधिकांश को तीन मुफ्त सिलेंडर उपलब्ध करा दिया था। इसके बाद से स्थिति बेहद सुस्त है।

आलोक राज, विक्रय पदाधिकारी, इंडियन ऑयल

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