बुनियादी विद्यालयों में दफन हो रहा बापू का सपना

औरंगाबाद। जिले के बुनियादी विद्यालयों में राष्ट्रपति महात्मा गांधी का सपना दफन होकर रह गया है। शिक्षकों के अभाव व जर्जर पुराने भवनों में विद्यालयों की बुनियाद न सिर्फ कमजोर हुई है बल्कि शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त होने लगा है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के समय बापू ने सबसे पहले बुनियादी यानी बेसिक शिक्षा की कल्पना की थी। इसी कल्पना को साकार करने के लिए देश की आजादी के पहले बापू ने वर्ष 1919 में शिक्षा के साथ छात्र छात्राओं के कौशल विकास का सपना लिए बुनियादी विद्यालयों की स्थापना की थी। बापू का सपना साकार करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 1949 में जिले में छह बुनियादी विद्यालयों की स्थापना की। देव प्रखंड के एरकी, विशुनपुर, कुटुंबा के रामपुर परसा, हसपुरा के ¨डडिर, सिहाड़ी एवं गोह के एकौना में बुनियादी विद्यालय को खोला गया। एरकी विद्यालय के लिए ग्रामीणों ने करीब 15 एकड़ जमीन दान दी। इसी तरह सभी बुनियादी विद्यालयों के लिए ग्रामीणों ने जमीन दान देकर विद्यालय की स्थापना की। जब विद्यालय खुला तो छात्र छात्राओं के कौशल विकास के लिए कई संसाधन उपलब्ध कराए गए। सूत की कटाई के लिए चरखा दिया गया था। स्थापना काल के कई वर्षों तक सभी विद्यालयों में चरखा चलता था। बागवानी की जाती थी। आज विद्यालयों में न सिर्फ चरखा चलना, बागवानी और सूत कटाई बंद हो गया बल्कि शिक्षकों के अभाव में बुनियादी विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त होने लगा है। विद्यालयों की बुनियाद न सिर्फ कमजोर हुई है बल्कि शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुका है। ¨डडिर एवं एकौना में एक भी नियमित शिक्षक नहीं हैं जिस कारण विद्यालय बंद हो गया है। रामपुर परसा में एक मात्र प्रधानाध्यापक नियमित हैं और तीन शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं। एरकी में एक शिक्षिका नियमित हैं बाकि 6 नियोजित शिक्षकों के सहारे विद्यालय को चलाया जा रहा है। विशुनपुर में एक नियमित एवं 4 नियोजित एवं सिहाड़ी में 2 नियमित एवं दो नियोजित शिक्षक कार्यरत हैं। सभी विद्यालयों में वर्ग एक से 8 तक की पढ़ाई होती है और सभी विद्यालयों में एक प्रधानाध्यापक एवं 10 सहायक शिक्षकों का पद स्वीकृत है। बागवानी के लिए एक शिक्षक होते थे जो आज एक भी विद्यालय में नहीं हैं। अगले माह में कुछ और शिक्षक सेवानिवृत हो जाएंगे। शिक्षकों के अभाव एवं कौशल विकास के सभी संसाधन समाप्त हो जाने से विद्यालयों में बापू का सपना अधूरा रहा गया।

फाइलों में दबी रह गई मॉडल व शिक्षक बहाली की योजना

बापू का सपना साकार करने के लिए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने बुनियादी विद्यालयों को मॉडल विद्यालय बनाने की योजना बनाई। विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था सु²ढ़ करने के लिए वर्ष 2012 में नियमित शिक्षकों की बहाली की योजना बनाई गई पर विभाग की दोनों योजना फाइलों में दबी रह गई। बुनियादी विद्यालय न मॉडल बन सका न शिक्षकों की बहाली की गई। आज हालात यह हो गई कि विभाग की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण बुनियादी विद्यालयों की स्थिति दयनीय हो गई है।

कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी

डीइओ मो. अलीम ने बताया कि बुनियादी विद्यालयों में नियमित बेसिक शिक्षकों की बहाली नहीं होने से विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। विद्यालयों में शिक्षण कार्य चलता रहे इसके लिए नियोजित शिक्षकों का पदस्थापन किया गया है। बुनियादी विद्यालय को मॉडल विद्यालय बनाने की राज्य सरकार ने योजना बनाई है। बुनियादी विद्यालयों में भवन का भी निर्माण कराया जा रहा है।

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