संक्रमित पुत्र अस्पताल में भर्ती, सदमे से मां ने तोड़ा दम, स्वजनों ने अंतिम संस्कार से किया इंकार

संक्रमित पुत्र अस्पताल में भर्ती, सदमे से मां ने तोड़ा दम, स्वजनों ने अंतिम संस्कार से किया इंकार

- फारबिसगंज स्टेशन चौक का मामला नगर परिषद कर्मियों ने वृद्ध महिला का किया अंतिम संस्कार - प

JagranSat, 15 May 2021 08:29 PM (IST)

- फारबिसगंज स्टेशन चौक का मामला नगर परिषद कर्मियों ने वृद्ध महिला का किया अंतिम संस्कार

- पुत्र के संक्रमित होने की जानकारी के बाद कोरोना के डर से समाज के लोग भी पीछे हटे।

फोटो नंबर 15 एआरआर 17

पुरुषोत्तम भगत, फारबिसगंज (अररिया): कोरोना के डर ने लोगों के अंदर मानवता को इतना खत्म कर दिया है कि लोग अब रिश्ते नाते और सामाजिकता का भी बहिष्कार करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। महामारी में मानव भी अपनी मानवता भूल चुके हैं। खून के रिश्ते पराए हो जा रहे हैं तो फिर अन्य रिश्तों को कौन पूछता है। ऐसी ही एक घटना फारबिसगंज में देखने को मिला जहां स्टेशन चौक निवासी अशोक भगत कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हो गए। पुत्र के अस्पताल में भर्ती होने के एक दिन बाद ही वियोग में मां ने दम तोड़ दिया। लेकिन यह विडंबना है कि वृद्ध महिला की मौत के दिन उनका शव घर में पड़ा रहा। समाज के लोगों के साथ स्वजनों ने भी कोरोना के डर से अंतिम संस्कार कराने से इंकार कर दिया। महिला की मौत के दूसरे दिन देर शाम को नगर परिषद कर्मियों के द्वारा सुभाष चौक की शमशान भूमि में महिला का अंतिम संस्कार किया गया। जानकारी के अनुसार मृतक महिला बिदा देवी उम्र लगभग 85 वर्ष पति स्व. विश्वनाथ भगत का इकलौता पुत्र अशोक भगत बुधवार को कोरोना संक्रमित हो गए। सांस लेने में तकलीफ एवं रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे अनुमंडल अस्पताल के डेडीकेटेड कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। घर में दो छोटे पोता एवं बहू ने वृद्ध मां को पुत्र के संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी। लेकिन कहते हैं कि मां का दिल ऐसा होता है जो जिसे अपनी संतान के मुसीबत में होने का एहसास बिन बताए हो जाता है। वृद्ध मां एक दिन तक अपने पुत्र को खोजती रही और वियोग में गुरुवार की रात को दम तोड़ दिया। इनसेट

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श्रवण कुमार की तरह मां की सेवा करता था अशोक -

बताया जाता है कि अशोक भगत, श्रवण कुमार की तरह अपनी मां की सेवा करते थे। उनकी मां बिदा देवी विगत दो साल से बीमार रहती थी। मां के पांव टूट जाने के बाद मां का सारा देखभाल पुत्र ही करता था। इकलौता पुत्र अशोक मां बिदा के आंखों का तारा था। पुत्र के हाथों से ही वह खाना खाती थी। किसी भी विकट परिस्थिति में वह अपने मां के पास सशरीर उपस्थित रहता था। पुत्र के अस्पताल में भर्ती हो जाने के बाद मां रह-रह कर अपने पुत्र को ही खोजती रहती थी और उसने खाना खाने से भी इंकार कर दिया था। इनसेट

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महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार में नगर परिषद कर्मियों ने भी आपदा को बनाया अवसर -

वृद्ध महिला के अंतिम संस्कार के लिए नगर परिषद कर्मियों ने 15 हजार रुपये स्वजनों से ली उसके बाद वृद्ध महिला का अंतिम संस्कार किया। सहरसा निवासी स्वजन बृजेश कुमार ने बताया कि बिदा देवी की मौत के बाद घर में दोनों छोटे बच्चे एवं बहू ने लोगों से अंतिम संस्कार के लिए गुहार भी की। लेकिन कोरोना के डर से सभी पीछे हट गए। जबकि उनका का जांच नही हुआ था वह दो साल से बीमार थी। ऐसी स्थिति में नगर परिषद कर्मियों से उनकी बात हुई जिस पर अंतिम संस्कार के लिए 30 हजार रुपये की मांग की लेकिन जान पहचान वह मानवता का हवाला देते हुए लगभग 15 हजार रुपये लेने के बाद नप कर्मियों के द्वारा अंतिम संस्कार किया गया। विडंबना यह है कि एंबुलेंस में शव ले जाने के लिए नगर परिषद से 3 हजार रुपया आवंटित किया गया, उसमें भी नप कर्मियों के द्वारा एंबुलेंस चालक को महज एक हजार रुपया दिया गया। एंबुलेंस चालक नितेश ने बताया कि उसे 8 सौ रुपया किराया और 2 सौ रुपये सफाई का भी दिया गया है।

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