पैसेंजर वाहनों का डिस्पैच सितंबर में 41% तक गिरा, सेमीकंडक्टर चिप की रही कमी

Siyam के नए आंकड़ों के अनुसार दोपहिया वाहनों के डिस्पैच पर सितंबर 2020 में 1849546 की तुलना में 17 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। जिसके साथ मोटरसाइकिल डिस्पैच पिछले महीने 22 प्रतिशत घटकर 948161 इकाई रह गई। जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 1224117 थी।

BhavanaThu, 14 Oct 2021 05:04 PM (IST)
स्कूटर की बिक्री भी 7% घटकर 5,17,239 इकाई रही जो एक साल पहले 5,56,205 इकाई थी।

नई दिल्ली, पीटीआई। Passenger Vehicles Sales: ऑटो उद्योग बॉडी सियाम द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में यात्री वाहन थोक बिक्री में सितंबर में साल-दर-साल 41 फीसदी की गिरावट देखी गई, क्योंकि ऑटोमोबाइल निर्माताओं को सेमीकंडक्टर की कमी के कारण पर्याप्त इकाइयों का उत्पादन करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। पिछले महीने यात्री वाहनों की बिक्री एक साल पहले की अवधि में 2,72,027 इकाइयों की तुलना में 1,60,070 इकाई रही।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के नए आंकड़ों के अनुसार, डीलरों को दोपहिया वाहनों की डिस्पैच भी सितंबर 2020 में 18,49,546 की तुलना में 15,28,472 इकाइयों पर 17 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। जिसके साथ मोटरसाइकिल डिस्पैच पिछले महीने 22 प्रतिशत घटकर 9,48,161 इकाई रह गई, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 12,24,117 थी। इसके साथ स्कूटर की बिक्री भी 7 प्रतिशत घटकर 5,17,239 इकाई रही जो एक साल पहले 5,56,205 इकाई थी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो पिछले महीने सभी श्रेणियों में वाहनों की बिक्री साल-दर-साल 20 प्रतिशत घटकर 17,17,728 इकाई रही, जो पहले समान अवधि में 21,40,549 इकाई थी। वहीं पिछले महीने, यात्री वाहनों, तिपहिया, दोपहिया और क्वाड्रिसाइकिल का कुल उत्पादन 2,125,304 इकाई रहा, जो सितंबर 2020 की तुलना में 19 प्रतिशत कम है। जुलाई-सितंबर तिमाही में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 7,26,232 इकाइयों की तुलना में 2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 7,41,300 इकाई रही।

सियाम के अध्यक्ष केनिची आयुकावा ने कहा कि “भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर हम वाहनों की मांग में सुधार देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी उद्योग के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन रही है। कई सदस्यों वाहन निर्माता कंपनियों ने अपनी उत्पादन योजनाओं को कम कर दिया है। आयुकावा ने कहा, "कच्चे माल की ऊंची कीमतें भी एक चुनौती बनी हुई हैं। उद्योग इस तरह की आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों के प्रभाव को कम करने और उत्पादन को अनुकूलित करने के लिए हर संभव उपाय कर रहा है।"

 

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