बमबारी व मिसाइलों के हमलों से उत्सर्जित गैसें वायुमंडल में ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ा रही खतरा

यह युद्ध मानव के लिए परिदृश्य को बेहद खतरनाक और दुर्गम बना दे रहा है। यह आगामी दिनों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए इतनी सारी बाधाएं पैदा कर देगा कि पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा ठीक होने में सालोंसाल लग जाएंगे।

Sanjay PokhriyalPublish: Fri, 24 Jun 2022 03:11 PM (IST)Updated: Fri, 24 Jun 2022 03:29 PM (IST)
बमबारी व मिसाइलों के हमलों से उत्सर्जित गैसें वायुमंडल में ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ा रही खतरा

कानपुर, आरती तिवारी। युद्ध किसी के भी बीच हो, उसके घातक प्रभाव तो प्रत्यक्ष तौर पर नजर आ जाते हैं, मगर इसके कुछ अप्रत्यक्ष प्रभाव भी होते हैं। युद्ध किन्हीं प्रांतों के बीच हो या देशों के, इससे सिर्फ इंसानों के जीवन को ही नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि प्रकृति भी घायल होती है। यह हमारा स्वार्थी स्वभाव है कि बेवजह नुकसान उठाने वाली इस प्रकृति और इसके तमाम घटकों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता।

बीते 100 से भी अधिक दिनों से यूक्रेन और रूस के बीच लगातार युद्ध जारी है। इससे प्रभावित होने वाले लोगों की खबरें तो आए दिन सामने आती हैं, मगर एक और तस्वीर है जो फिलहाल धुंधली है। आपसी अहम के चलते जारी इस युद्ध का नतीजा चाहे जो भी हो, मगर इसके कारण प्रकृति को जिस हद तक नुकसान पहुंच रहा है, उसका प्रभाव लंबे समय तक भुगतना होगा।

बमबारी व मिसाइलों के हमलों से उत्सर्जित गैसें वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा कई गुना बढ़ा चुकी हैं। संज्ञान रहे कि इन कारणों से पेड़-पौधों की वृद्धि तो रुकती ही है साथ ही जैव रासायनिक क्रियाओं, परागकण, फूल व बीजों की संख्या में भी गिरावट हो जाती है। इसके अलावा इन हमलों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का सबसे ज्यादा प्रभाव वहां के जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है। क्वींस यूनिवर्सिटी, बेलफास्ट के शोधकर्ताओं के अनुसार, मानव द्वारा किया जा रहा ध्वनि प्रदूषण जीवों की 100 से भी अधिक प्रजातियों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

पूर्वी यूरोप और पश्चिमी एशिया के बीच स्थित काला सागर जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है। यह तमाम प्रवासी पक्षियों के लिए जन्नत के समान जगह है। सर्दियों के मौसम में यहां करीब एक लाख से अधिक प्रवासी पक्षी अपना बसेरा करते हैं। इसके अलावा सफेद पूंछ वाली चील, रेड ब्रेस्टेड मरगेंसर, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ड जैसे अति दुर्लभ पक्षियों को भी यही ठिकाना भाता है। साथ ही यह क्षेत्र लुप्तप्राय सैंडी ब्लाइंड मोल रैट, ब्लैक सी बाटलनोज डालफिन, कई दुर्लभ फूल, अनगिनत घोंघे, दर्जनों प्रजातियों की मछलियों का भी घर है। जहां आज इन मासूमों की दुनिया को सेनाएं तहस-नहस कर रही हैं।

यूक्रेन जैसे पारिस्थितिकी परिवर्तन वाले क्षेत्र में वेटलैंड्स और जंगलों की एक बड़ी संख्या मौजूद है मगर युद्ध से यहां के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। उच्च तीव्रता के कारण जंगल की आग न केवल लोगों और वायुमंडल को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि इससे जैव विविधता को भी जोखिम बढ़ चुका है। यह युद्ध मानव के लिए परिदृश्य को बेहद खतरनाक और दुर्गम बना दे रहा है। यह आगामी दिनों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए इतनी सारी बाधाएं पैदा कर देगा कि पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा ठीक होने में सालोंसाल लग जाएंगे।

Edited By Sanjay Pokhriyal

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