डाल्फिन सेंचुरी बनने से रुकेगी गंगा में अवैध गतिविधियां

जागरण संवाददाता साहिबंगज जिले में बहने वाली

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 04:27 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 03:01 AM (IST)
डाल्फिन सेंचुरी बनने से रुकेगी गंगा में अवैध गतिविधियां

जागरण संवाददाता, साहिबंगज :

जिले में बहने वाली 83 किलोमीटर गंगा में डाल्फिन सेंचुरी घोषित होने के बाद इसमें अवैध गतिविधियां रुक जाएंगी। दो इंच से छोटे जाल से मछली मारने पर रोक लगेगी। डाल्फिन के प्रजनन के मौसम में भी गंगा में जाल डालने पर पूरी तरह रोक रहेगी। डाल्फिन सेंचुरी घोषित होने के बाद डाल्फिन के संरक्षण और संव‌र्द्धन के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी। इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी काम शुरू होगा। इसके लिए प्रत्येक वर्ष तीन से चार करोड़ रुपये मिलेंगे।

गौरतलब हो कि पांच अक्टूबर 2009 को केंद्र सरकार ने गंगा डाल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया। गंगा नदी में पाई जाने वाली डाल्फिन एक नेत्रहीन जलीय जीव है जिसकी घ्राण शक्ति काफी तीव्र है। इसके बाद इसके संरक्षण के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में भागलपुर में विक्रमशीला के आसपास के 60 किलोमीटर क्षेत्र को डाल्फिन सेंचुरी पिछले दिनों घोषित किया गया। यह देश का इकलौता डाल्फिन सेंचुरी है। करीब छह माह पूर्व साहिबगंज के वन विभाग ने जिले की सीमा में बहने वाली 83 किलोमीटर गंगा नदी को डाल्फिन सेंचुरी घोषित करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है जो अभी लंबित है। साहिबगंज में गंगा को डाल्फिन सेंचुरी घोषित कर दिया गया तो संभवत: यह देश का दूसरा डाल्फिन सेंचुरी होगा। पड़ोसी राज्य बिहार में डाल्फिन पर व्यापक पैमाने पर काम हो रहा है। देश के इकलौते डाल्फिन सेंचुरी के अलावा पिछले साल पटना में विश्व का पहला डाल्फिन शोध संस्थान भी खोला गया।

वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने की होगी पहल :

दो साल पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोजेक्ट डाल्फिन लांच करने की घोषणा के बाद साहिबगंज में बहने वाली गंगा को डाल्फिन सेंचुरी घोषित करने की उम्मीद जगी है। इसके बाद वन विभाग ने यहां से प्रस्ताव सरकार को भेजा। साहिबगंज में डाल्फिन सेंचुरी घोषित होने के बाद छोटी-छोटी मछली मारने वाले मछुआरों का कारोबार प्रभावित होगा। ऐसी स्थिति में गंगा किनारे रहने वाले लोगों को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे स्वरोजगार कर सकें। गंगा नदी पर पूरी तरह वन विभाग का नियंत्रण होगा। अब तक गंगा नदी में जाने से वन विभाग किसी को रोक नहीं सकता है लेकिन डाल्फिन सेंचुरी घोषित होने के बाद लोगों को रोकने का अधिकार वन विभाग को होगा। डाल्फिन को मारने पर सजा का प्रावधान भी सख्त होगा। दो साल पूर्व हुई गिनती के दौरान साहिबगंज एरिया में करीब तीन दर्जन डाल्फिन पाए गए थे। इस साल पुन: डाल्फिन की गिनती की तैयारी चल रही है। कोरोना काल में गंगा नदी में लोगों की गतिविधियां घटी हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस अवधि में डाल्फिन की संख्या बढ़ी होगी। डाल्फिन स्तनधारी जीव है और यह साफ पानी में रहना पसंद करती है।

क्यों पड़ी संरक्षण की जरूरत :

गंगा डाल्फिन को आइयूसीएन (अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त की श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में गंगा डाल्फिन की आबादी 1200 से 1800 के बीच है। गंगा डाल्फिन उन क्षेत्रों में रहना पसंद करती है जहां मछलियां बहुतायत में हो और पानी का प्रवाह धीमा हो। छोटी मछलियां डाल्फिन का भोजन होती है। नदी से उसे मारकर निकाल लेने से डाल्फिन को भोजन नहीं मिल पाता है और भोजन के अभाव में उनकी मौत हो जाती है। इसके अलावा डाल्फिन के तेल का उपयोग मछुआरे मछलियों को पकड़ने में करते हैं। इस वजह से कुछ लोग उसे अवैध रूप से मार देते हैं। कुछ लोग मांस के लिए भी डाल्फिन को मार देते हैं।

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वर्जन :

साहिबगंज में बहनेवाली 83 किलोमीटर गंगा को डाल्फिन सेंचुरी घोषित करने के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। विभाग ने उसे सरकार के पास भेज दिया है जहां वह लंबित है। जल्द ही इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। गंगा के डाल्फिन सेंचुरी घोषित होने के बाद डाल्फिन के संरक्षण व संव‌र्द्धन की कोशिश तेज होगी। गंगा में अवैध गतिविधियों पर रोक लगायी जाएगी। छोटी मछलियों को मारने पर भी रोक लगेगी। हालांकि इससे उद्योग-धंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इको टूरिज्म बढ़ेगा। पड़ोसी राज्य बिहार में डाल्फिन पर काफी काम हो रहा है।

मनीष तिवारी, डीएफओ, साहिबगंज

Edited By Jagran

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