चतरा के सैंकड़ों गांव इस योजना से वंचित, चार महज में महज 30 प्रतिशत पूरा हुआ काम, कार्रवाई की तैयारी

सिमरिया अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम की रिपोर्ट आने के बाद कंपनी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई हो सकती है। चूंकि योजना को 2021 के नवंबर तक पूरा कर देना था। लेकिन योजना का क्रियान्वयन धीमी गति से हो रही है।

Madhukar KumarPublish: Sat, 29 Jan 2022 04:19 PM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 04:19 PM (IST)
चतरा के सैंकड़ों गांव इस योजना से वंचित, चार महज में महज 30 प्रतिशत पूरा हुआ काम, कार्रवाई की तैयारी

चतरा, जागरण संवाददाता। जिले के टंडवा प्रखंड के 76 गांवों को शुद्ध पानी पिलाने की योजना पर सुस्ती का ग्रहण लगा हुआ है। पिछले चार साल के भीतर महज 30 प्रतिशत योजना निर्माण का काम ही पूरा हो पाया है। हालांकि ठेका कंपनी श्रीराम पीकेसी के नाम पर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल बतौर अग्रिम 1.40 अरब रुपये हासिल कर लिया है। गत नवंबर में दिशा की हुई बैठक में अग्रिम की 80 करोड़ रुपये वापस लेने का निर्णय लिया गया था। लेकिन तकनीकी कारणों से राशि वापस नहीं हो पाई।

निर्माण कर रही कंपनी से नाराजगी

इधर काम की प्रगति को देखते हुए उपायुक्त अंजली यादव निर्माता कंपनी पर खासे नाराज हैं। उपायुक्त स्वयं इस योजना की मानिटरिंग कर रही हैं। निर्माता कंपनी की शिथिलता को देखते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। सिमरिया अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम की रिपोर्ट आने के बाद कंपनी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई हो सकती है। चूंकि योजना को 2021 के नवंबर तक पूरा कर देना था। लेकिन योजना का क्रियान्वयन धीमी गति से हो रही है। इस बीच छह महीना का अवधि विस्तार मिल चुका है। लेकिन उसके बाद भी प्रगति नहीं है। योजना का निर्माण जिला खनिज विकास फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से हो रहा है। जिस पर 2.33 अरब रुपये लागत आने का अनुमान है। 2017 में योजना निर्माण के लिए श्रीराम पीकेसी नामक ठेका कंपनी से करार हुआ। ठेका कंपनी जिस प्रकार से काम कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले तीन-चार साल में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाएगा।

नवबर 2021 तक योजना पूरा करना था। लेकिन ठेका कंपनी ने नहीं किया। करीब 30 से 35 प्रतिशत काम हुआ है। छह महीना का समय विस्तार दिया गया है। ऐसी संभावना है कि अगले वर्ष अगस्त तक 25 प्रतिशत गांवों में जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।

राजमोहन सिंह, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी, चतरा।

क्या कहते हैं डीडीसी

योजना की प्रगति संतोषजनक नहीं है। डीसी मैडम स्वयं मानिटरिंग कर रही हैं। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। दिशा की बैठक में सांसद सुनील कुमार सिंह ने प्रगति को लेकर सवाल उठाया था। बैठक में प्रस्ताव पारित कर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल से अग्रिम वापस लेने का निर्णय लिया गया था। लेकिन तकनीकी कारणों से राशि वापस नहीं हो सकती है। चूंकि राशि कोषागार में जमा है। कार्य के विरुद्ध राशि की निकासी हो रही है।

सुनील कुमार सिंह, डीसी, चतरा।

Edited By Madhukar Kumar

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