समरसता और सद्भाव का रस घोल रहा प्रेम सागर फाउंडेशन, कुपोषित बच्चों के लिए वरदान बना फाउंडेशन

Gumla News जिला मुख्यालय से 45 किमी. दूरी पर भरनो के बनटोली गांव स्थित प्रेम सागर फाउंडेशन है। यह संस्था अलाभकारी और परोपकारी है। दशक 2010 में जब नक्सल चरम पर था। गरीबी के कारण लोगों को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती थी।

Madhukar KumarPublish: Sun, 23 Jan 2022 03:08 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 03:08 PM (IST)
समरसता और सद्भाव का रस घोल रहा प्रेम सागर फाउंडेशन, कुपोषित बच्चों के लिए वरदान बना फाउंडेशन

गुमला, जागरण संवाददाता। जिन बच्चों को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती । उनके लिए बड़े हाल में बैठकर पौष्टिक आहार के साथ दीवार पर लगी एलसीडी पर डिस्कवरी चैनल का आनंद लेना अद्भूत और अविश्वसनीय जैसा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण अदब के साथ आते हैं, भोजन करते हैं और जूठा थाली छोड़ देते हैं। जूठा थाली धोने का काम भी खाना खिलाने वाले ही करते हैं। ऐसी समरसता और सद्भाव का रस घोल रहा है प्रेम सागर फाउंडेशन।

जिला मुख्यालय से 45 किमी. दूरी पर भरनो के बनटोली गांव स्थित प्रेम सागर फाउंडेशन है। यह संस्था अलाभकारी और परोपकारी है। दशक 2010 में जब नक्सल चरम पर था। गरीबी के कारण लोगों को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती थी। बच्चे कुपोषित हो रहे थे। फटाहाल जीवन और पेट की आग बुझाना चुनौती से कम नहीं था। ऐसे समय में यहां जन भोजन नामक कार्यक्रम का शुभारंभ मार्च 2006 में विश्व विख्यात शांति वक्ता प्रेम रावत के हाथों शुभारंभ किया गया। बड़ी अदब के साथ हर वर्ग के लोग बिना भेदभाव के यहां पहुंचते हैं। पहुंचने वालों की संख्या एक दो नहीं बल्कि एक हजार तक होती है।

पांच -छह किमी. के आस पास के दो दर्जन गांव के लोग एक समय का पौष्टिक भोजन प्राप्त करते हैं। । आपाधापी, शोरशराबा , भागदौड़ से दूर कतारबद्ध होकर लोग भोजन प्राप्त करते हैं। हेल्थ और हाइजिन के सभी मानकों से पूर्ण लोगों को भोजन परोसा जाता है। प्रतिदिन सुबह आठ बजे विशाल हाल में बिछी दरी पर लोग बैठते हैं डटकर खाते हैं, खाने के बाद बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान अपने खेत जाते हैं और राहगीर अपने गतंव्य के लिए रवाना होते हैं। प्रेम सागर फाउंडेशन सड़क के किनारे खुले में हैं। चहारदीवारी नहीं है। बेरोकटोक कोई भी व्यक्ति अपनी क्षुधा शांति करने यहां पहुंचता है। प्रेम सागर फाउंडेशन इस क्षेत्र के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बात केवल खाने तक ही सीमित नहीं है।

यहां बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा, महिलाओं को सिलाई कढ़ाई, बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा जागरुकता कार्यक्रम ,नेत्र जांच शिविर, वस्त्र वितरण ,योगाभ्यास, युवतियों को आत्मरर्क्षार्थ मार्शल आर्ट सहित कई प्रकार की गतिविधियों के द्वारा ग्रामीणों को लाभांवित किया जाता है। कोरोना काल में लोगों तक अनाज और जरुरत को सामग्री पहुंचाना। नि:स्वार्थ भाव के साथ लोगों की सेवा देखते ही बनती है।लोगों के जिंदगी में आया है बदलाव पिछले कई महीनों से लखनउ से आकर फाउंडेशन का कार्य कर रहीं प्रियंका वर्मा बतातीं हैं कि ऐसे पिछड़े जगहों पर इस तरह का कार्यक्रम यहां के लोगों के लिए वरदान जैसा ही है। इस आस पास के लोगों के चेहरे पर मुस्काराहट है । शारीरिक और मानसिक रुप से लोग मजबूत हो रहे हैं। बच्चें पढ़ाई की ओर अग्रसर हो रहे हैं। महिलाएं युवतियां हुनरमंद हो रही हैं। लोगों का स्वास्थ्य में भी बदलाव आया है।

प्रेम सागर फाउंडेशन की स्थापित होने के बाद यहां के लोगों के जीवन में काफी बदलाव आया है। भोजन के अलावा अन्य गतिविधियों से लोग लाभांवित हो रहे हैं। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठाएं।

रणधीर गिरीप्रबंधक , प्रेम सागर फाउंडेशन

Edited By Madhukar Kumar

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