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Olympic Day 2021: म्यूनिख, मास्को के बाद अब टोक्यो ओलंपिक में भी धमक, माइकल-सिलवानुस के बाद सलीमा दिखाएगी जलवा

International Olympic Day 2021 Jharkhand News Simdega News भारतीय महिला हॉकी टीम में चयनित होकर सिमडेगा की सलीमा टेटे ने साबित किया है कि सिमडेगा में प्रतिभाएं अभी भी विद्यमान हैं। बस उसे तराशने व निखारने की जरूरत है।

Sujeet Kumar SumanWed, 23 Jun 2021 04:54 PM (IST)
Olympic Day 2021: म्यूनिख, मास्को के बाद अब टोक्यो ओलंपिक में भी धमक, माइकल-सिलवानुस के बाद सलीमा दिखाएगी जलवा

सिमडेगा, [वाचस्पति मिश्र]। म्यूनिख, मास्को के बाद टोक्यो ओलंपिक में भी सिमडेगा की धमक होगी। विदित हो कि माइकल किंडो, सिलवानुस डुंगडुंग के बाद जिले की हॉकी स्टार सलीमा टेटे ओलंपिक गर्ल के रूप में टोक्यो ओलंपिक में अपनी हॉकी स्टिक से कमाल दिखाएगी। भारतीय महिला हॉकी टीम में चयनित होकर सलीमा ने साबित किया है कि सिमडेगा में प्रतिभाएं अब भी विद्यमान हैं। बस उसे तराशने व निखारने की जरूरत है। वैसे सिमडेगा जिला तो पूर्व से भी खिलाड़‍ियों की खान रहा है।

इसने दर्जनों अंतरराष्‍ट्रीय, सैकड़ों राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी समेत 3 ओलंपियन दिए हैं। सर्वप्रथम माइकिल किंडो का चयन 1972 में म्यूनिख ओलंपिक के लिए हुआ था। 1972 में भारतीय टीम ने जर्मनी के म्यूनिख में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक प्राप्त किया था। वैसे माइकल किंडो 1975 में विश्वकप में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय टीम के सदस्य रहे थे। इसके बाद 1980 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम में जिले के सिलवानुस डुंगडुंग का चयन मास्को ओलंपिक के लिए हुआ था।

सलीमा के परिवार के सदस्‍य।

तब भारतीय टीम ने जोरदार प्रदर्शन कर गोल्ड पर कब्जा जमाया था। उसके बाद लगभग 40 वर्षों के बाद सलीमा टेटे का चयन भारतीय महिला हॉकी टीम में टोक्यो ओलंपिक के लिए हुआ है। अब सबकी उम्मीदें टोक्यो ओलंपिक पर टीकी हैं। लोग यह आशा कर रहे हैं कि भारतीय महिला टीम इस बार भी ओलंपिक में पदक लेकर ही लौटेगी। हाॅकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने बताया कि जिले के खिलाड़‍ियों में खेल के प्रति जुनून देखने लायक होता है। सुविधाएं बढ़ेंगी तो जिले से और भी ओलंपियन निकलेंगे।

किसान परिवार से निकलकर तीन बने ओलंपियन

सिमडेगा जिले में तीनों ओलंपियन किसान व गरीब परिवार से निकले हैं। माइकल किंडो मूल रूप से कुरडेग प्रखंड के बैघमा के रहने वाले थे। उनके माता-पिता पतरसिया किंडो एवं पास्कल किंडो खेतों में काम करते थे। गरीबी व अभाव के बीच भी माइकल किंडो अपनी प्रतिभा के बल पर ओलंपियन बनने तक का सफर तय किया। पिछले वर्ष 31 दिसंबर को माइकिल किंडो का निधन हो गया।

सलीमा टेटे और निक्‍की प्रधान।

इसी तरह केरसई प्रखंड के ठेसूटोली के रहने वाले सिलवानुस डुंगडुंग के माता-पिता मोनिका डुंगडुंग व मार्कुस डुंगडुग किसान थे। सिलवानुस डुंगडुंग भी अभावों के बीच अपनी प्रतिभा के बल पर मास्को ओलंपिक तक पहुंचे। यहां उन्होंने देश को गोल्ड दिलाने में योगदान दिया। अब सलीमा की बात करें तो सिमडेगा के बड़कीछापर गांव के किसान सुलक्शन टेट एवं सुभानी टेटे की पुत्री है। खेत-खलिहान से हॉकी की शुरुआत करने वाली सलीमा का चयन टोक्यो ओलंपिक के लिए हुआ है। सलीमा के माता-पिता आज भी खेतों में काम कर रहे हैं।

उपायुक्त की शर्त सलीमा ने किया पूरा

वर्ष 2013 में तत्कालीन उपायुक्त ने इस शर्त के साथ एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम बनवाने का वादा हॉकी सिमडेगा व खिलाड़‍ियों से किया था, कि उन्हें ओलंपियन दें। 2015 में एस्ट्रोटर्फ बनकर तैयार हुआ और करीब 5 वर्षों के बाद सलीमा टेटे ने ओलंपियन के रूप में चयनित होकर वादा पूरा किया।

राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजे गए दो दिग्गज

जिले के दो दिग्गज ओलंपियनों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से नवाजा गया है। माइकल किंडो ने जहां अर्जुन अवार्ड तो वहीं सिलवानुस डुंगडुंग ने मेजर ध्यानचंद अवार्ड जीतकर जिले का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करा दिया। इससे आने वाली पीढ़‍ियां प्रेरित होती रहेंगी।

Edited By: Sujeet Kumar Suman

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