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Olympic Day 2021: बेटियों के जिम्मे है इस बार ओलंपिक का पदक, पढ़ें यह खास खबर

International Olympic Day 2021 Jharkhand News टोक्यो ओलंपिक में पहली बार झारखंड की तीन बेटियां देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। एकीकृत बिहार के समय जयपाल सिंह मुंडा व सिलवानुस डुंगडुंग पदक जीत चुके हैं। अब इस बार बेटियों से पदक की उम्‍मीद है।

Sujeet Kumar SumanWed, 23 Jun 2021 12:56 PM (IST)
Olympic Day 2021: बेटियों के जिम्मे है इस बार ओलंपिक का पदक, पढ़ें यह खास खबर

रांची, [संजीव रंजन]। टोक्यो ओलंपिक में क्या झारखंड के खिलाड़ी ओलंपिक पदक जीतने का टोटा समाप्त कर पाएंगे। यह ऐसा प्रश्न है जो राज्य के हर खेल प्रेमियों के मन में कौंध रहा है। टोक्यो ओलंपिक में पहली बार झारखंड के तीन खिलाड़ी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। तीरंदाजी में दीपिका कुमारी और हाॅकी में निक्की प्रधान व सलीमा टेटे पदक जीतने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को तैयार हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि इस बार झारखंड के लिए पदक का टोटा समाप्त करने की जिम्मेवारी बेटियों पर है।

प्रतिभा की धनी बिरसा की धरती पर एक से एक खिलाड़ी हुए, लेकिन मात्र दो जयपाल सिंह मुंडा व सिलवानुस डुंगडुंग ही स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। हालांकि दोनों ने पदक उस समय जीता, जब झारखंड का अस्तित्व नहीं था। यह अखंड बिहार का हिस्सा था। ऐसे में यह प्रश्न खड़ा होता है कि क्या बेटियों इस बार झारखंड को पहला पदक दिलाएगी।

दीपिका का तीसरा ओलंपिक

रातू की गलियों से खेलते हुए विश्व की नंबर एक तीरंदाज बनने वाली दीपिका कुमारी का यह तीसरा ओलंपिक है। 2012 लंदन व 2016 रियो ओलंपिक में वह कुछ खास नहीं कर पाई थीं। इस बार टोक्यो ओलंपिक में तीरंदाजी स्पर्द्धा में भारत की ओर से वह एकमात्र महिला तीरंदाज हैं। ऐसे में यह देखना है कि 130 करोड़ जनता की अपेक्षाओं पर वह कितना खरा उतरती हैं। वहीं निक्की प्रधान का यह दूसरा ओलंपिक है। 2016 रियो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा था। इस बार टीम के साथ-साथ निक्की से भी उम्मीदें हैं। वहीं सिमडेगा की सलीमा टेटे का यह पहला ओलंपिक है। जोश से लबरेज यह महिला खिलाड़ी अपने पहले ओलंपिक में ही कुछ करने को बेताब है। उसने कहा भी है कि अब मेरा लक्ष्य ओलंपिक पदक जीतना है।

जयपाल सिंह मुंडा ने जीता था स्वर्ण

भारतीय हॉकी टीम ने वर्ष 1928 से 1956 तक ओलंपिक में छह स्वर्ण पदक जीते थे। 1928 में भारत की जिस टीम ने स्वर्ण जीता था, उसके कप्तान जयपाल सिंह मुंडा थे। फाइनल में भारत ने नीदरलैंड्स को 3-0 से हराया था। हालांकि फाइनल मैच जयपाल सिंह मुंडा किसी कारणवश नहीं खेल पाए थे।

मास्को में स्वर्ण जीतने वाली टीम के सदस्य थे सिलवानुस डुंगडुंग

1980 मास्को ओलंपिक में भारत ने स्पेन को हरा कर स्वर्ण जीता था। उस टीम में सिमडेगा के सिलवानुस डुंगडुंग भी शामिल थे। मास्को ओलंपिक के बाद भारत हॉकी में पदक नहीं जीत पाया है।

बास्केटबॉल और हैंडबॉल में ओलंपिक खेल चुके हैं हरभजन

जमशेदपुर में टाटा कंपनी में कार्यरत हरभजन सिंह 1980 मास्को ओलंपिक में बास्केटबॉल और हैंडबॉल में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन पदक जीतने में वे असफल रहे। 1984 लास एंजिल्स ओलंपिक में खूंटी के मनोहर टोप्पनो ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन टीम नाक आउट दौर में नहीं पहुंच पाई थी। वहीं रांची साई की प्रशिक्षक रीना कुमारी 2004 एथेंस ओलंपिक में भाग ले चुकी हैं। व्यक्तिगत स्पर्द्धा में वह 43वें स्थान पर रही थी, जबकि टीम इवेंट में भारतीय टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी।

'निक्की व सलीमा बेहतरीन खिलाड़ी हैं। भारतीय टीम को टोक्यो ओलंपिक में अगर बेहतर करना है तो वह मैच दर मैच अपनी योजना बनाकर खेले। मिले मौके का लाभ उठाए। निक्की व सलीमा को मैं यही कहूंगा कि आपके पास खोने को कुछ नहीं है। बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो।' -सिलवानुस डुंगडुंग, पूर्व ओलंपियन।

'सलीमा का पहला ओलंपिक है जबकि निक्की दूसरी बार ओलंपिक खेल रही है। उन्हें बिना किसी दबाव में आकर अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना चाहिए। भारतीय टीम अच्छी है और इस बार वह अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।' -मनोहर टोप्पनो, पूर्व ओलंपियन।

Edited By: Sujeet Kumar Suman

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