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Lalu Yadav Bail Granted:अबकी सीबीआइ पर भारी पड़े सिब्‍बल, पढ़ें कोर्ट की सुनवाई हू-ब-हू...

Lalu Yadav Bail Granted चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू यादव को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है। अदालत ने दो निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है।

Alok ShahiSat, 17 Apr 2021 09:42 PM (IST)
Lalu Yadav Bail Granted:अबकी सीबीआइ पर भारी पड़े सिब्‍बल, पढ़ें कोर्ट की सुनवाई हू-ब-हू...

रांची, राज्य ब्यूरो। Lalu Yadav Bail Granted चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू यादव को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है। अदालत ने लालू प्रसाद को एक-एक लाख रुपये के दो निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा उन्हें पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की भी राशि जमा करनी होगी। निचली अदालत में उन्हें पासपोर्ट जमा करना होगा। बिना अनुमति के लालू विदेश नहीं जा सकते हैं और न ही अपना पता और मोबाइल बदल सकते हैं।

अदालत ने लालू के दुमका कोषागार में मिली सजा की आधी अवधि पूरी करने पर जमानत प्रदान की है। दुमका वाले केस में लालू प्रसाद को सीबीआइ कोर्ट ने आइपीसी में सात साल और पीसी एक्ट में सात साल की सजा सुनवाई है। साथ ही दोनों धाराओं में तीस-तीस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सुनवाई के दौरान लालू की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल और देवर्षि मंडल ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद ने इस मामले में छह अप्रैल को सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है। क्योंकि अदालत ने 19 फरवरी को माना था कि लालू प्रसाद की आधी सजा पूरी करने में एक माह 17 दिन कम हैं।

वहीं, सीबीआइ का यह कहना कि लालू प्रसाद को कुल चौदह साल की सजा मिली है। यह जमानत पर सुनवाई के दौरान बल्कि अपील की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को उठाया जाना चाहिए। अदालत किसी भी समय जमानत प्रदान कर सकती है, जैसा कि आरसी20 में सुप्रीम कोर्ट ने लालू को जमानत दी है, लेकिन चारा घोटाला से संबंधित सभी मामलों में हाई कोर्ट ने आधी सजा पर जमानत देने का मानक तय किया है।

इसी आधार पर लालू ने भी जमानत देने की गुहार लगाई है। इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। सीबीआइ की ओर से लालू की जमानत का जोरदार विरोध किया गया। कहा गया कि सीबीआइ कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आइपीसी में सात साल और पीसी एक्ट में सात साल की सजा दी जा रही, जो अलग-अलग चलेंगी। यानि लालू प्रसाद को कुल 14 साल की सजा मिली है।

वहीं, लालू की ओर से निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई है, कि सजाएं अलग-अलग चलने की बजाय एक साथ चलाई जाएं।  ऐसे में लालू की जमानत पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने सीबीआइ की दलीलों को खारिज करते हुए लालू प्रसाद को सशर्त जमानत की सुविधा प्रदान की है।  बता दें कि लालू प्रसाद यादव को चाईबासा के दो, देवघर और दुमका मामले में सजा मिल चुकी है।

तीन मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल गई थी। अब दुमका कोषागार वाले मामले में  जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आ जाएंगे। लालू प्रसाद के अधिवक्ता देवर्षि मंडल ने कहा कि सोमवार को लालू प्रसाद की ओर से जमानत के लिए बेल बांड भरा जाएगा। फिलहाल लालू का इलाज दिल्ली स्थित एम्स में चल रहा है।

लालू प्रसाद यादव की फैक्ट फाइल

  • 23 दिसंबर 2017 में देवघर मामले में जेल
  • 4 जनवरी 2018 को देवघर मामले में सजा
  • 24 जनवरी 2018 को चाईबासा में सजा
  • 24 मार्च 2018 को दुमका में सजा
  • 11 मई 2018 को तीनों केस में प्रोविजन बेल मिली
  • 30 अगस्त 2018 को सरेंडर किया, तब से वे जेल में हैं।

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