झारखंड में धान रखने की जगह नहीं, अभी तक 18 प्रतिशत ही हुई खरीदारी, आकड़ों मे देखें

Jharkhand News झारखंड में पिछले बार की तुलना में इस बार धान खरीदारी का लक्ष्य भी 60 लाख क्विंटल से बढ़ाकर 80 लाख क्विंटल कर दिया गया है लेकिन लैम्स व पैक्स में अभी तक धान बेचने वालों की संख्या कई जिलों में कम है।

Sanjay KumarPublish: Sat, 29 Jan 2022 10:02 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 10:02 AM (IST)
झारखंड में धान रखने की जगह नहीं, अभी तक 18 प्रतिशत ही हुई खरीदारी, आकड़ों मे देखें

रांची, (अनुज तिवारी)। Jharkhand News : बंपर धान की खेती होने के बाद भी झारखंड में किसान धान बिक्री के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सरकार को अभी तक किसानों ने मात्र 18.5 प्रतिशत ही धान बेचा है। जबकि धान खरीदारी की अंतिम तिथि 31 मार्च तक ही है। इसके बाद धान की खरीदारी नहीं होनी है। ऐसे में सिर्फ दो माह में 80 प्रतिशत से अधिक धान की खरीदारी करना एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

पिछले बार की तुलना में इस बार धान खरीदारी का लक्ष्य भी 60 लाख क्विंटल से बढ़ाकर 80 लाख क्विंटल कर दिया गया है, लेकिन लैम्स व पैक्स में अभी तक धान बेचने वालों की संख्या कई जिलों में कम है। जबकि कुछ जिलों में धान रखने की जगह ही नहीं है। पहले से ही यहां पर धान भर चुकें हैं।

धान खरीदारी का लक्ष्य ही अधिक रखा गया, नहीं है स्टोरेज की सुविधा

जेएसएफसी के एमडी यतेंद्र प्रसाद बताते हैं कि धान खरीदारी का जो लक्ष्य रखा गया है वो ही अधिक है। यह लक्ष्य ही कम निर्धारित रखना चाहिए था। दूसरी ओर स्टोरेज की भी समस्या है, झारखंड के जितने भी पैक्स व लैम्स हैं। वहां पर स्टोरेज की काफी समस्या है, जिसे बढ़ाने होगा। साथ ही राईस मील की भी कमी होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। हालांकि अभी 14 राईस मील का शिलान्यास हुआ है जिससे भविष्य में जरूर राहत मिलेगी।

धान की बिक्री बढ़ने की उम्मीद

इसके अतरिक्त एमडी यतेंद्र प्रसाद बताते हैं कि धान की खरीदारी हो रही है। सभी उपायुक्तों को पत्र भी लिखा जा रहा है कि वे अपने जिलों में धान खरीदारी को बढ़ाए ताकि अधिक से अधिक किसानों को सरकारी योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर से ही धान की खरीदारी हो रही है जिसके बाद अब धान की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

किसानों को अभी तक दूसरी किस्त के लिए करना पड़ रहा है इंतजार

इधर किसानों ने भी अपनी समस्या बतायी, जिसमें एक मुस्त पैसा नहीं मिलने की सबसे बड़ी समस्या है। किसानों को अभी तक दूसरी किस्त के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि कुछ किसानों को पूरा पैसा मिला है, लेकिन सभी को नहीं। साथ ही बिचौलियों के चक्कर में किसान औने-पौने दाम पर धान बेच रहे हैं, जबकि सरकार के स्तर से 20.50 पैसे प्रति किलों के हिसाब से धान की खरीदारी लैम्स व पैक्स में हो रही है।

जिला प्रतिशत धान उठाव का प्रतिशत, आंकड़ों में

  • गढ़वा 15.6
  • चतरा 19.9
  • कोडरमा 30.4
  • गिरिडीह 28.9
  • देवघर 8.6
  • गोड्डा 42
  • साहेबगंज 10
  • पाकुड़ 34
  • धनबाद 6.5
  • बोकारो 8.2
  • लोहरदगा 13.7
  • पूर्वी सिंहभूम 7.2
  • पलामू 9.6
  • लातेहार 13.2
  • हजारीबाग 16
  • रामगढ़ 25.4
  • दुमका 17.5
  • जामताड़ा 12.2
  • रांची 13
  • खूंटी 17
  • गुमला 26.9
  • सिमडेगा 22.2
  • पश्चिमी सिंहभूम 16
  • सरायकेला खरसांवा 11

कुल 18.5 प्रतिशत

Edited By Sanjay Kumar

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