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झारखंड सरकार तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी

एंपावर्ड कमेटी ने पिछली दो लहरों के आधार पर अनुमान लगाया है कि नवजात से 18 वर्ष के कुल 1.43 करोड़ बच्चों में यदि पांच प्रतिशत में भी संक्रमण हुआ तो 7.17 लाख बच्चे कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं।

Sanjay PokhriyalFri, 09 Jul 2021 04:48 PM (IST)
झारखंड सरकार तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी

रांची, प्रदीप शुक्ला। कोरोना की दूसरी लहर लगभग अंतिम पड़ाव पर है और राज्य सरकार अब संभावित तीसरी लहर से लड़ने की तैयारियों को पुख्ता करने में जुट गई है। जैसा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह आशंका जता रहे हैं कि यदि तीसरी लहर आती है तो संभव है कि इस बार महामारी की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आएं। इस बाबत अध्ययन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट भी ऐसे ही संकेत दे रही है। इसमें जो तथ्य हैं, वह थोड़े डराने वाले हैं। ऐसे में अभी से व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करनी जरूरी हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कíमयों की जरूरत पड़ सकती है।

तीसरी लहर आएगी भी अथवा नहीं? क्या इसमें बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होंगे? इसे लेकर भले ही विशेषज्ञों में अभी कोई आम राय नहीं बनी है, लेकिन एंपावर्ड कमेटी ने पिछली दो लहरों के आधार पर अनुमान लगाया है कि नवजात से 18 वर्ष के कुल 1.43 करोड़ बच्चों में यदि पांच प्रतिशत में भी संक्रमण हुआ तो 7.17 लाख बच्चे कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। कमेटी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संक्रमित होनेवाले बच्चों में 40 प्रतिशत यानी 2.87 लाख बच्चे कोरोना के लक्षण वाले हो सकते हैं। लक्षण वाले इन बच्चों में 2.35 लाख में सामान्य लक्षण हो सकते हैं, जो घर में भी ठीक हो सकते हैं। वहीं लगभग 43 हजार बच्चे मॉडरेट हो सकते हैं, जिन्हें पीडियाटिक वार्ड में भर्ती कराना पड़ सकता है, जबकि तीन प्रतिशत बच्चे गंभीर हो सकते हैं, जिनके लिए आइसीयू की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। मॉडरेट बच्चों में 90 प्रतिशत को आक्सीजन बेड तथा 10 प्रतिशत को हाई डिपेंडेंसी यूनिट की आवश्यकता हो सकती है। कमेटी ने यह भी कहा है कि यदि 10 प्रतिशत बच्चे प्रभावित होते हैं तो सभी आवश्यकताएं दोगुनी हो जाएंगी।

राज्य सरकार ने इस कमेटी की अनुशंसा के आलोक में बच्चों के लिए प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों में 100-100 आक्सीजन बेड, 25-25 एचडीयू तथा इतने ही पीडियाटिक आइसीयू तैयार करने का निर्णय लिया है। वहीं सभी सदर अस्पतालों में भी 100-100 आक्सीजन बेड, 20-20 एचडीयू तथा 16 पीडियाटिक आइसीयू तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह की व्यवस्था कुछ अनुमंडल अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी होगी। सदर अस्पतालों में बच्चों के लिए चाइल्ड फ्रेंडली वार्ड बनाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी कमी यहां शिशु रोग विशेषज्ञों की है। हालांकि एमबीबीएस चिकित्सकों को ही पीडियाटिक आइसीयू के मैनेजमेंट का प्रशिक्षण देकर शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी की भरपाई करने की कोशिश की जा रही है। प्रत्येक जिले से दो-दो शिशु रोग विशेषज्ञों, दो-दो चिकित्सा पदाधिकारियों तथा इतने ही स्टाफ नर्स को इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

झारखंड के बच्चों में कुपोषण की भी बड़ी समस्या रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों के अनुसार यहां के 48 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। स्वास्थ्य से संबंधित पत्रिका लैंसेट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना की वजह से कुपोषित बच्चों की संख्या में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। राज्य सरकार भी इसे लेकर चिंतित है। कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ी है या नहीं इसकी पुष्टि करने तथा तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए अति कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए सघन अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान वैसे बच्चे जिन्हें कुपोषण उपचार केंद्रों पर भर्ती कराना जरूरी है उन्हें भर्ती कराया जाएगा तथा जिन्हें घर पर ही उपचार, पोषक तत्व व परामर्श देकर ठीक किया जा सकता है उन्हें घर पर ही ये सुविधाएं एएनएम के माध्यम से प्रदान की जाएंगी।

इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। खासकर अस्पतालों में आक्सीजन की किल्लत न हो, इसपर विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्य के 52 अस्पतालों में लगाए जा रहे पीएसए आक्सीजन प्लांट इसमें महत्वपूर्ण हैं। इनमें 27 अस्पतालों में ये प्लांट पीएम केयर फंड से स्थापित किए जा रहे हैं। कोरोना जांच की गति और बढ़ाने के लिए उन जिलों में आरटी-पीसीआर लैब स्थापित की जा रही है, जहां यह सुविधा अभी तक नहीं है। पीएम केयर फंड से भी बड़ी संख्या में आक्सीजन कांसेंट्रेटर, आक्सीजन सिलेंडर आदि राज्य के सरकारी अस्पतालों को मिले हैं। चिकित्सकों व पारा मेडिकल कíमयों की कमी को देखते हुए जिला स्तर पर अनुबंध पर बहाली के निर्देश दिए गए हैं।

घटे दैनिक मामले : झारखंड में कोरोना का संक्रमण फिलहाल पूरी तरह काबू में है। अब यहां के विभिन्न जिलों में छिटपुट मामले ही मिल रहे हैं। पूरे राज्य में दैनिक मामले 50 के आसपास मिलते हैं। अच्छी बात यह है कि कोरोना का संक्रमण काफी कम होने के बाद भी राज्य में जांच की गति कम नहीं की गई है। राज्य में प्रत्येक दिन औसतन 50 हजार सैंपल की जांच अभी भी हो रही है।

[स्थानीय संपादक, झारखंड]

रांची के सदर अस्पताल में बनाए गए शिशु वार्ड का निरीक्षण करते अधिकारी। जागरण

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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