मन को भा गई प्रेमिका की बात और महाराज प्रमाणिक ने कर दिया सरेंडर, पढ़िए- कुख्यात नक्सली की कहानी

Jharkhand crime news हर कोई यह जानना चाहता है कि भाकपा माओवादी के कुख्यात नक्सली महाराज प्रमाणिक ने कैसे और क्यों झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आइए पढ़ते हैं lसरेंडर करने वाले महाराज प्रमाणिक की यह कहानी।

M EkhlaquePublish: Sat, 22 Jan 2022 05:00 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 05:00 AM (IST)
मन को भा गई प्रेमिका की बात और महाराज प्रमाणिक ने कर दिया सरेंडर, पढ़िए- कुख्यात नक्सली की कहानी

रांची, राज्य ब्यूरो। महाराज प्रमाणिक के आत्मसमर्पण के पीछे उसकी प्रेमिका की महत्वपूर्ण भूमिका बताया जा रहा है। सरायकेला-खरसांवा के पूर्व एसपी मोहम्मद अर्शी पर्व-त्योहार में महाराज प्रमाणिक के माता-पिता से मिलकर कई बार अपील कर चुके थे कि वे उसे झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के प्रति प्रेरित करें। उससे कहें कि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए।

प्रेमिका ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए किया प्रेरित

इसी तरह महाराज प्रमाणिक की प्रेमिका ने भी उसे प्रेरित किया कि जब तक वह हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा से नहीं जुड़ेगा, तब तक वह उसका साथ नहीं देगी। संगठन में तो अपने सीनियर नक्सलियों से महाराज प्रमाणिक दुखी था ही, प्रेमिका का प्रोत्साहन काम कर गया, जिससे महाराज प्रमाणिक ने आत्मसमर्पण कर दिया। मां को बचाने के लिए नक्सली बनने वाला महाराज प्रमाणिक प्रेमिका के प्रेम के सामने टूट गया और समाज की मुख्य धारा में लौट गया।

प्रशांत बोस के रूट को जानता था, जिसका लाभ पुलिस को मिला

महाराज प्रमाणिक माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य एक करोड़ के इनामी प्रशांत बोस उर्फ किशन के आने-जाने के रूट को जानता था। उसकी निशानदेही पर ही 12 नवंबर 2021 को झारखंड पुलिस ने सरायकेला-खरसांवा में कांड्रा-चौका रोड पर गितिलबेड़ा टॉल प्लाजा के पास घेराबंदी कर माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन, उसकी पत्नी शीला मरांडी व चार अन्य नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, महाराज प्रमाणिक का कहना है कि उसने 14 अगस्त 2021 को नक्सली संगठन जरूर छोड़ा था, लेकिन वह पुलिस के संपर्क में नहीं था। उसने हाल में पुलिस से संपर्क साधा और शुक्रवार को आत्मसमर्पण किया।

Edited By M Ekhlaque

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