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झारखंड में जज की हत्या मामले में CJI ने की कड़ी टिप्पणी, बोले- दुर्भाग्य- IB, CBI न्यायपालिका की नहीं कर रहे मदद

Jharkhand ADJ Murder Case झारखंड एडीजे हत्याकांड मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में यह एक नया चलन है। यहां न्यायाधीश को शिकायत करने की कोई स्वतंत्रता नहीं है।

Vikram GiriFri, 06 Aug 2021 03:08 PM (IST)
झारखंड में जज की हत्या मामले में CJI ने की कड़ी टिप्पणी, बोले- दुर्भाग्य- IB, CBI न्यायपालिका की नहीं कर रहे मदद

रांची, एएनआइ। झारखंड एडीजे हत्याकांड मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में यह एक नया चलन है। यहां न्यायाधीश को शिकायत करने की कोई स्वतंत्रता नहीं है। भले ही न्यायाधीश पुलिस या सीबीआई से शिकायत करते हैं लेकिन वे कोई जवाब नहीं देते हैं। आईबी, सीबीआई न्यायपालिका की बिल्कुल भी मदद नहीं कर रहे हैं। मैं यह बयान जिम्मेदारी की भावना के साथ दे रहा हूं।

गौरतलब है कि झारखंड के धनबाद जिले के एडीजे उत्तम आनंद की बीते दिनों हत्या कर दी गई। मॉर्निंग वाक पर निकले एडीजे उत्तम आनंद को पीछे से आ रहे ऑटो ने जान-बूझ कर ऑटो से उन्हें धक्का मारा। जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई भी हुई। जिसमें अदालत ने जल्द से जल्द सीबीआइ जांच शुरू करने का निर्देश दिया।

इस दौरान अदालत ने यह एसआइटी की ओर से जांच की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट को देख कर असंतुष्टि जाहिर करते हुए कई सवाल भी उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि घटना सुबह 5.08 बजे हुई तो प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब क्यों किया गया। क्यों प्राथमिकी 12.45 बजे दर्ज की गई। जबकि सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट है कि जज को उठाकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या पुलिस सिर्फ फर्द बयान के आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज करती है। क्या पुलिस स्वत: प्राथमिकी दर्ज नहीं करती। आखिर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने में छह घंटे क्यों लग गए। पुलिस को तो हमेशा अपनी आंख और कान खुले रखने चाहिए। सबूत कभी चल कर नहीं आता है। अदालत ने कहा कि इसका लाभ बचाव पक्ष को निचली अदालत में मिलेगा। जब वह इन बातों को अदालत में उठा कर अभियोजन को परेशानी में डाल देगा।

Edited By: Vikram Giri

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