हेसालौंग में जेई बीमारी से ग्रस्त चार साल का बच्चा मिला

स्वाद सूत्र गिद्दी (रामगढ़) डाड़ी प्रखंड के हेसालौंग भुइयां टोली में चार साल के बच्चे बादल के मिलने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।

JagranPublish: Sat, 25 Sep 2021 07:21 PM (IST)Updated: Sat, 25 Sep 2021 07:21 PM (IST)
हेसालौंग में जेई बीमारी से ग्रस्त चार साल का बच्चा मिला

स्वाद सूत्र, गिद्दी (रामगढ़) : डाड़ी प्रखंड के हेसालौंग भुइयां टोली में चार साल के बच्चे बादल के जेई बीमारी से ग्रस्त मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। बच्चे में जेई नामक बीमारी मिलने के बाद हजारीबाग सदर अस्पताल व चुरचू/डाड़ी की स्वास्थ्य विभाग की टीम शनिवार को हेसालौंग गांव में कैंप किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संक्रमित के आसपास रहने वाले करीब 15 बच्चों को सैंपल लेकर जांच के लिए रांची रिम्स भेज दिया। इस दौरान हेसालौंग गांव के नालियों में जहां मच्छर के लावा मारने वाली दवा की छिड़काव र्की गई। वहीं पूरे गांव में मशीन के माध्यम से फोंगिग कराया। इसके अलावे टीम ने गांव वासियों को सुकर व जलीय पंक्षी से दूर रहने के लिए अपील किया। लोगों से खासकर 14 वर्ष तक बच्चों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। हजारीबाग सदर अस्पताल के जीव विज्ञान वेत्ता महामारी रोग विशेषज्ञ डा. जावेद आलम व महेंद्र पाल ने बताया कि बादल के पिता राजेश ने बेटे को हाइली बुखार होने के बाद हजारीबाग में भर्ती कराकर उपचार करा रहे थे। इलाजरत डाक्टर को संदेह होने पर बच्चें का सेंपल लेकर 22 सितंबर को रांची रिम्स जांच के लिए भेजा था। 23 सितंबर को बच्चे को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद टीम ने गांव पहुंच कर संक्रमण से बचाव के लिए कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि जेई बीमारी गंदगी, सुकर व जलीय पंक्षी बत्तक आदि के पालन करने से उसके संपर्क में आने से 14 वर्ष तक बच्चों में होती है। इसके बचाव के लिए घरों के आसपास साफ-सफाई, सुकर व जलीय पंक्षी से दूर रहने की जरूरत है। उन्होंने हेसालौंग वासियों से इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम सभा करने और सुकर व बतक पालन नहीं करने को कहा। टीम में जीव विज्ञान वेत्ता महामारी रोग विशेषज्ञ डा. जावेद आलम, मैमुर सुल्तान, महेंद्र पाल, डा. मो. तसलीम, रूपलाल कुमार, विजय कुमार, रूपलाल कुमार, राजेश कुमार आदि हैं।

Edited By Jagran

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