पहाड़िया महिलाओं ने मेहनत से संवारी जिदगी

पहाड़ों व जंगलों में रहने वाली आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की तीन हजार महिलाएं लकड़ी चुनकर मुश्किल से 12 सौ रुपये कमाती थीं। अब वे स्वरोजगार जुड़ गई है। 36 महिलाएं बोरा सिलाई कर प्रतिमाह करीब पांच हजार कमा रही हैं।

JagranPublish: Mon, 17 Jan 2022 04:35 PM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 04:35 PM (IST)
पहाड़िया महिलाओं ने मेहनत से संवारी जिदगी

जागरण संवाददाता, पाकुड़ : पहाड़ों व जंगलों में रहने वाली आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की तीन हजार महिलाएं लकड़ी चुनकर मुश्किल से 12 सौ रुपये कमाती थीं। अब वे स्वरोजगार जुड़ गई है। 36 महिलाएं बोरा सिलाई कर प्रतिमाह करीब पांच हजार कमा रही हैं। तीन हजार महिलाएं लोबिया की खेती व मुर्गी पालन कर हर माह पांच से छह हजार रुपये कमा रही हैं। यह संभव हुआ झारखंड आजीविका मिशन के सहयोग से बनाए गए गुतु गलांग ट्रस्ट की मदद से। इसकी शुरुआत साल 2019 में हुई थी। सरकार ने 4.5 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया था। एक साल में महिलाओं के इस ट्रस्ट ने 71.51 लाख का कारोबार कर 14.89 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया है। ट्रस्ट का मकसद आदिम जनजाति पहाड़िया महिलाओं की मदद कर आर्थिक स्थिति में बदलाव लाना है।

डाकिया योजना के लिए तैयार कर रही बोरा

गुतु गलांग कल्याण ट्रस्ट के माध्यम से पीजीटी महिलाएं डाकिया योजना के अनाज पैकेजिग के लिए बोरा सिलाई का काम करती है। छह महिलाओं से इस कार्य की शुरुआत की गई। आज 36 महिलाएं कार्य करती हैं। झारखंड आजीविका मिशन की ओर से इन महिलाओं को मशीन व प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक माह 15 से 20 दिन कार्य कर ये महिलाएं प्रतिमाह करीब पांच हजार रुपये की आमदनी करती है।

मुकरीपहाड़ी गांव की रूबी मालतो बताती हैं कि पहले बाजार से बोरा खरीदकर अनाज की पैकिग करती थी। इससे कम आमदनी होती थी। अब स्वयं बोरा तैयार कर अनाज की पैकेजिग से अच्छी आमदनी हो जाती है। यहां प्रतिमाह 72 हजार बोरे की सिलाई की जाती है।

लोबिया की खेती से बदले हालात

लोबिया की व्यापक पैमाने पर खेती ने आदिम जनजाति महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। ट्रस्ट के माध्यम से तीन हजार से अधिक पहाड़िया महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उत्तम किस्म का लोबिया बीज मुहैया कराया गया। यहां लोबिया का उत्पादन बढ़ा। इसके अलावा महिलाएं बकरी व मुर्गी पालन कर रही है। लोबिया की खेती व बकरी मुर्गी पालन से ये पहाड़िया महिलाएं पांच से छह हजार रुपये की मासिक आय कर लेती है। लिट्टीपाड़ प्रखंड के केसवानी गांव की बमड़ी पहाडिन बताती है कि अच्छे बीज व प्रशिक्षण से लोबिया की अच्छी खेती कर सकी है। अब माल बेचने की भी समस्या नहीं है। पहाड़ों पर रहने वाले आदिम जनजाति परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार के स्तर पर कई योजनाएं चलाई जा रही है। जिले के हरेक पहाड़िया परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

वरुण रंजन, उपायुक्त,पाकुड़

Edited By Jagran

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