हॉकी खिलाड़ी पूनम मुंडू की सफलता की कहानी, गोल पर बजती तालियों ने चैंपियन बनने की दिखाई राह

hockey player Poonam Mundu. पूनम मुंडू और उसके परिजनों को उम्मीद है कि हॉकी उनके सपनों को पूरा करेगी।

Sachin MishraPublish: Mon, 18 Feb 2019 01:26 PM (IST)Updated: Mon, 18 Feb 2019 01:26 PM (IST)
हॉकी खिलाड़ी पूनम मुंडू की सफलता की कहानी, गोल पर बजती तालियों ने चैंपियन बनने की दिखाई राह

कर्रा (खूंटी), संवाद सूत्र। पूनम मुंडू के घर में हॉकी का माहौल था मां व पिता दोनों चाहते थे कि उनकी बेटी हॉकी खेले, लेकिन उसकी कोई खास रुचि नहीं थी। बेटी में हॉकी का जुनून पैदा करने के उद्देश्य से पिता अपनी लाडली को ले रांची में हॉकी मैच देखने पहुंचे। हॉकी खिलाड़ियों की चमक-दमक, गोल पर बजती तालियों ने नन्हीं पूनम के मन में ऐसा घर किया कि पिता से कह बैठी उसे तो हॉकी स्टार ही बनना है।

हॉकी स्टिक मांगने पर पिता जुनास मुंडू और मां बहीमनी मुंडू ने हाथ में बांस की स्टिक थमा दी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, सो बेटी मान गई। उसकी स्टिक से करने लगी अभ्यास। गांव की लड़कियां हॉकी नहीं खेलती थीं तो लड़कों के साथ ही अभ्यास करती रही। गांव के मैदान और खेतों पर खूब अभ्यास करती। मां-बाप ने खेलने से कभी रोका नहीं। हुनर में धार आई तो लड़के अपनी टीम के लिए पूनम को घर से बुलाकर ले जाने लगे। फिर तो खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड अंतर्गत केसूंगी पंचायत के गांगूटोली निवासी पूनम मुंडू ने हॉकी को जिंदगी बना ली। न उसे खाने की चिंता रहती और न किसी और बात की सुध। पिता हॉकी खेलते थे, स्थानीय बच्चों को सिखाते भी थे तो बेटी को हॉकी की बारीकियां सिखाई। फिर एक दिन पड़ोसियों की राय पर पिता पूनम को लेकर बरियातू हॉकी सेंटर पहुंचे।

किसी तरह पिता ने हॉकी स्टिक भी दिलवा दी थी। साथी खिलाड़ियों और कोच के सानिध्य में तो पूनम के सिर पर हॉकी का जुनून सवार हो गया। सुबह शाम अभ्यास करने के बावजूद उसे जब भी समय मिलता वह मैदान में स्टिक से साथ उतर जाती। कई बार इसके लिए स्कूल के शिक्षकों से डांट भी पड़ी। शिक्षकों ने उसे समझाया कि खेल के साथ पढ़ाई भी जरूरी है। लेकिन पूनम कहां मानने वाली थी। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई। 14 वर्ष की उम्र में वह अंडर 14 झारखंड टीम में चुन ली गई। इसके बाद वह भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सेंटर में चली गई। पूनम वहां खेलने से पहले मैदान का 20 चक्कर लगाती और जब वह पसीने से पूरी तरह भींग जाती तब वह हॉकी खेलना शुरू करती।

2018 में उसने सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2017-18, 19 में रजत जीतने वाली टीम की वह सदस्य रही। जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन 18 लड़कियों में से एक चैंपियन पूनम मुंडू की सफलता आज हर किसी के लिए मिसाल है। गांव में तो जैसे हर दूसरी लड़की अब हॉकी में राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजोने लगी है। मां-बाप की तमन्ना है कि उसकी बेटी इस खेल में और आगे जाए, भारत के लिए सोना जीते। पूनम और उसके परिजनों को उम्मीद है कि हॉकी उनके सपनों को पूरा करेगी।

 

Edited By Sachin Mishra

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