झारखंड में बोलना, चलना और रहना अपने आप में कला : दिलीप देव

जासं खूंटी बिरसा

JagranPublish: Sun, 03 Jul 2022 07:27 PM (IST)Updated: Sun, 03 Jul 2022 07:27 PM (IST)
झारखंड में बोलना, चलना और रहना अपने आप में कला : दिलीप देव

झारखंड में बोलना, चलना और रहना अपने आप में कला : दिलीप देव

जासं, खूंटी : बिरसा कालेज खूंटी में रविवार को फिल्म निर्माण से संबंधित कार्यशाला का आयोजन किया गया। कालेज की प्राचार्या प्रोफेसर जेरमेन कीड़ो ने फिल्म निर्देशक और संपादक दिलीप देव और निर्मात्री मधुमिता राय का परिचय विद्यार्थियों से कराते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। दिलीप देव ने भगवान बिरसा मुंडा की स्तुति करते हुए कार्यशाला में छात्रों को बताया कि सिनेमा और वीडियो कंटेंट के निर्माण में रोजगार और व्यापार की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि झारखंड में बोलना, चलना और रहना अपने आप में कला है, तो फिर यहां के युवा इस व्यापार में पीछे क्यों रहें। यहां के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में क्यों भटकें, जब यहां सिनेमा के जरिये पर्यटन और रोजगार का सृजन किया जा सकता है। झारखंड की लगभग साढ़े तीन करोड़ की आबादी, पचीसों तरह की बोलियां और संस्कृति, यहां की प्राकृतिक छटा, क्षेत्रीय भाषाओं का सिनेमा और वीडियो कंटेंट के निर्माण और व्यापार के लिए प्रचुर अवसर प्रदान कर सकता है, बशर्ते उन्हें इससे संबंधित जानकारियों के साथ जनजागरण किया जाए। यहां के नव युवाओं को तकनीकी ज्ञान से अवगत कराया जाए। दिलीप देव और मधुमिता राय इन्ही बातों को लेकर अबतक झारखंड के 12 जिलों में फिल्म निर्माण पर कार्यशाला का आयोजन कर चुके हैं। हिंदी मूवी 'अनवांटेड' के विषय में छात्रों को जानकारी देते हुए मधुमिता राय ने बताया कि दिलीप देव झारखंड के हैं और साथ ही हीरो नरेंद्र बिंद्रा, कैमरामैन, आर्ट डायरेक्टर, एक्सक्यूटिव प्रोडूसर सभी इसी राज्य के हैं। इनके अलावा बाकी के अन्य कलाकार और तकनीशियन, जिन्हें इस फिल्म से ब्रेक मिला है और आगे भी नई प्रतिभाओं के साथ काम करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 'अनवांटेड' हिंदी मूवी यूट्यूब में निश्शुल्क देखी जा सकती है। इसे एक करोड़ लोगों को दिखाने का लक्ष्य है और इसके बाद नागपुरी-सादरी, संथाली, खोरठा, हो, मुंडारी में स्थानीय प्रतिभाओं के साथ फिल्म बनाई जाएगी। उन्होंने प्राचार्या का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस नए उद्योग के बारे में छात्रों को जानकारी उपलब्ध कराने से अपनी भाषा, संस्कृति से विशेष लगाव होगा, क्योंकि इससे रोजगार का सृजन भी किया जा सकता है और पलायन को भी रोका जा सकता है।

Edited By Jagran

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