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गजराज बने यमराजः बैल खोजने जंगल गए दो किसान भाइयों को हाथियों ने पटक कर मार डाला

Chaibasa Jharkhand News अपने बैलों को खोजने निकले दो किसानों को उग्र हाथियों ने बुरी तरह से पटक कर मौत के घाट उतार दिया है। एक किसान किसी तरह से अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। करीब छह घंटे बाद उसने अपने घर पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी।

Rakesh RanjanTue, 11 May 2021 10:06 PM (IST)
गजराज बने यमराजः बैल खोजने जंगल गए दो किसान भाइयों को हाथियों ने पटक कर मार डाला

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम), जासं। अपने बैलों को खोजने निकले दो किसानों को उग्र हाथियों ने बुरी तरह से पटक कर मौत के घाट उतार दिया है। एक किसान किसी तरह से अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। करीब छह घंटे बाद उसने अपने घर पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी। 24 घंटे बाद ग्रामीणों ने जंगल में पड़े दोनों किसान को मृत अवस्था में खोज निकाला। घटना पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र अंतर्गत रतनासाई जंगल में घटी है।

रतनासाई गांव के ग्रामीण मुंडा महेन्द्र बागे ने बताया कि उनके चार बैल दो सप्ताह पहले घर से कहीं निकल गये थे। बैलों की खोजबीन की गयी तो चार दिन पहले दो बैल ओडिशा से मिल गए। बाकी दो बैल काफी खोजबीन के बाद भी कहीं नहीं मिले। मुंडा ने बताया की उन्हीं दो बैलों को खोजने के लिए सोमवार की सुबह करीब नौ बजे उनका बेटा आमोस बागे, ममेरा भाई खागेश बिरुवा व गांव का एक युवक अरुण गोप जंगल की ओर निकले थे। 24 घंटे बाद दूसरे दिन मंगलवार की सुबह नौ बजे बेटे आमोस व खगेश के मृत होने की खबर मिली। इसके बाद करीब तीन घंटा तक जंगल की खाक छानने के बाद जंगल से पांच किलोमीटर अंदर स्थित बुरुई गोड़ा नामक स्थान पर दोनों का शव मिला। दोनों को हाथी ने पटक कर मार डाला था। उसके बाद ग्रामीणों ने कुमारडुंगी पुलिस प्रशासन व वन विभाग को घटना की जानकारी दी।

शव जंगल से निकालने के लिए करनी पडी मशक्कत

जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन व वन कर्मी 5 किलोमीटर का जंगल पार कर बुरुईगोड़ा नामक स्थल पहुंचे। दोनों के शव को जंगल से बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने जंगल में ही दोनों के शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया। उसके बाद जंगल अंदर से ग्रामीणों ने दोनों शव को खटिया में ढोकर 5 किलोमीटर का सफर तय कर बाहर निकाला। दोनों को देखने के लिये पूरा गांव जुटा था। शव परिजनों को दिखाकर कुमारडुंगी थाना पहुंचाया गया। थाना प्रभारी अंकिता सिंह ने बताया कि दोनों के शव को बुधवार के दिन पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल भेजा जाएगा।

हाथी से बचने के लिए 5 घंटे बदहवास भागता रहा अरुण गोप

कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के रतनासाई जंगल में सोमवार के दिन बैल खोजने निकले तीन किसान में से दो को उग्र हाथियों ने बुरी तरह से पटकर मार डाला है। इस हाथी व इंसान की लड़ाई के बीच से बाल-बाल बचकर निकला युवक छह घंटे बाद अपने घर पहुंचा। युवक 29 वर्षीय अरुण गोप है। उसने बताया कि सोमवार को आमोस के बैल खोजने के लिए आमोस, खगेश व मैं करीब नौ बजे घर से निकले थे। हम लोगों ने साथ भोजन ले रखा था। पांच किलोमीटर का लम्बा जंगल रास्ता सफर करने के बाद बुरुईगोड़ा नामक स्थल पर पहुंचे। वहां हम लोगों ने भोजन करने का निर्णय लिया। इसके लिए हमने पानी की खोज करनी शुरू की। आमोस ने बताया की पश्चिम-उत्तर दिशा में पानी का एक स्रोत है। वहीं चलकर भोजन करेंगे। हम तीनों पानी की तरफ रुख कर गए। कुछ दूर जाने के बाद जंगल में जोर से पेड़ों के हिलने की आवाज आई। आवाज काफी तेजी से हमारी ओर आ रही थी। आमोश व खगेश बात करने में मस्त थे। इसी बीच मैंने देखा कि दो जंगली हाथी काफी तेजी से हमारी तरफ भागकर आ रहे हैं। हाथियों को अपनी ओर आते हुऐ देखकर मैं भागने के लिए मुड़ा। तब तक हाथियों ने दोनों साथियों को घेर लिया था।

पांच घंटे भागने के बाद पहुंचा घर

मुड़ने से पत्थर में पैर फंस गया। इस कारण से मैं पत्थर से नीचे गिर गया। तीन बार पलटने के बाद थोड़ी देर के लिए बेहोश हो गया था। इस दौरान मुझे लगा की हाथियों ने मुझे भी पटक कर मार दिया है। करीब 2 मिनट बाद जब आंख खुली तो मैंने भगवान देशाउली का नाम लिया। बिना इधर-उधर देखें, सीधे भागना शुरू कर दिया। अंधाधुंध भागने के कारण मैं अपने गांव की दिशा पूरी तरह से भूल गया था। मैं गिरने के कारण जख्मी भी हो गया था। नाक व माथा से खून निकल रहा था। मैं बस भागता ही जा रहा था। लगभग 5 घंटे भागने के बाद पूरी तरह से थक कर एक पेड़ के नीचे बैठ गया। वहां अपने मन को शांत किया और अपने घर की दिशा खोजने लगा। काफी प्रयास करने के बाद घर की दिशा मिली। चल-चल कर गिरते पड़ते घर पहुंचा हूं।

पांच किमी की दूरी तय कर खटिया पर ढोकर जंगल से निकाले गए दोनों शव

तीन घंटे तक जंगल में खोजबीन करने के बाद बैल खोजने निकले दो लोगों के शव बुरी अवस्था में जंगल अंदर 5 किलोमीटर दूर पत्थरों के बीच मिला। दोनों को सोमवार के दिन दो हाथियों ने मिलकर बुरी तरह से पटक-पटक कर मार दिया था। पश्चिम सिहभूम जिले के कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के रत्नासाई निवासी ग्रामीण मुंडा महेन्द्र बागे का बेटा आमोस बागे व खगेश बिरुवा सोमवार को बैल खोजने निकले थे। लगभग 24 घंटा बाद दोनों के शव मिलने से पुलिस प्रशासन व वन कर्मचारी घटनास्थल पहुंचे। पंचनामा तैयार कर शव को बाहर निकालने का प्रयास किया। गांव वाले, समाजसेवी पुरेन्द्र हेम्ब्रम, सिंगा बागे, सुनिल मिंज, मजदुर नेता माधव चन्द्र कुंकल व कई अन्य लोगों ने मिलकर शव को खटिया में ढोकर 5 किलोमीटर जंगल से बाहर निकाल कर गांव पहुंचाया।

जंगल के अंदर नहीं पहुंच पाइ गाडी

जंगल अंदर होने के कारण वहां गाड़ी नहीं पहुंच पाई। गांव वाले शव को लाने के लिए घर से दो खटिया लेकर गए थे। वहां खटिया में दोनों को लादकर घर तक लाने के लिए दो टीम बनायी गयी। समाजसेवी व मजदूर नेता शव के आगे रास्ता बनाने में लगे हुए थे। झाड़ी व चट्टानों को चीरते हुऐ शव को बाहर निकाला गया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर बारी-बारी से शव को ढोकर जंगल से बाहर निकाल। हाथी के हमले से आमोस की दोनों आंखे पूरी तरह से फूट चुकी थी। बड़ी चिंटियां उसे खा रहीं थी। सिर पत्थर पर पटकने की वजह से फटा हुआ था। पेड़ की डाली से गाल व गले में नोच के निशान थे। माथा अंदर घुसा हुआ था। लगभग 50 कदम दूर में खगेश बिरुवा का शव पड़ा था। हाथी ने उसके दोनों पैर मोड़कर तोड़ दिये थे। हाथों को भी तोड़ दिया था। बता दें कि आमोश वन सुरक्षा समिति का अध्यक्ष था। वहीं जानकारी मिली की मृत खगेश खडकोरी से जमशेदपुर जाने वाली दिव्या बस का चालक था। लाॅकडाउन में गाड़ी बंद होने के कारण घर में ही रह रहा था।

हाथी के हमले से मृत युवकों के आश्रितों को मिलेगा 4-4 लाख रुपये मुआवजा

कुमारडुंगी थाना क्षेत्र स्थित रतनासाई जंगल में दो उग्र हाथियों ने बैल खोजने गए दो किसान को भटक कर मार डाला। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने घटना स्थल पहुंचकर घटना का जायजा लिया। मृतक रतनासाई निवासी आमोस बागे कक पत्नी अनीता बागे को वन विभाग ने अपातकालीन मुआवजा के तौर पर 10 हजार रुपये दिए। वहीं खगेश के परिजनों को भी वन विभाग ने 10 हजार रुपये मुआवजा दिया है। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया की दोनों परिवार को चार-चार लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया जाएगा। यह पैसा उनके खाते में आएगा। मुआवजा राशि चार से पांच माह के अंदर परिजनों को मिल जाएगी।

Edited By: Rakesh Ranjan

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